फोटो- सौम्या श्रीवास्तव 
वन्य जीव एवं जैव विविधता

बॉटल ब्रश के फूलों की झंकार: सजावटी और औषधीय गुणों का संगम

इस ऑस्ट्रेलियाई प्रजाति को अंग्रेज लगभग दो सौ साल पहले अपने साथ ले आए थे।

Vanita Suneja

मार्च से अप्रैल तक, बसंत को अलविदा कहते-कहते बॉटल ब्रश की नतमस्तक-सी होती टहनियों में लाल गुच्छों जैसे फूल लटक जाते हैं।

यह वह समय होता है जब ट्रॉपिकल वृक्षों की पुरानी पत्तियां गिर रही होती हैं। बॉटल ब्रश की पत्तियां उतनी नहीं गिरतीं, पर हल्के-हल्के फूलों से पराग निकलकर नीचे झड़ता रहता है। ऊपर भंवरे, मधुमक्खियां और पक्षी मकरंद लेने के लिए आतुर दिखाई देते हैं।

इस ऑस्ट्रेलियाई प्रजाति को अंग्रेज लगभग दो सौ साल पहले अपने साथ ले आए थे। यह विदेशी से देसी बनने के लिए पर्याप्त समय होता है, इसलिए बॉटल ब्रश ने अपने लिए स्थानीय नाम भी बना लिए हैं।

जैसे अंग्रेजी में इसका नाम फूल के आकार—बोतल साफ करने वाले ब्रश—पर रखा गया है, वैसे ही इसे अलग-अलग भाषाओं में अलग नाम मिले हैं। मराठी में इसे “झंकारा” कहते हैं, मानो फूल किसी झंकार देने वाले वाद्य जैसे हों; हिन्दी में “चील”, जैसे पंख फैलाए चील हों; और गुजरात में इसे “लैला-मजनूं” भी कहा जाता है, मानो झुकी-झुकी झाड़ियों में लैला-मजनूं रम गए हों।

अगर जगह मिले तो यह एक छोटा पेड़ बनकर खड़ा हो जाता है, नहीं तो झाड़ी जैसा फैल जाता है। यह गमलों में भी आसानी से उग जाता है। धूप और बरसात दोनों सहन कर लेने की क्षमता के कारण इसने एक मजबूत सजावटी पौधे के रूप में अपनी जगह बना ली है।

जैव विविधता बढ़ाने के लिए भी यह एक उम्दा पेड़ माना जाता है, क्योंकि इसके फूलों के रस के लिए पतंगे, मधुमक्खियां, भंवरे, हमिंग बर्ड और चमगादड़ आदि मंडराते रहते हैं। इतना ही नहीं, इस पेड़ में कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया की प्राचीन जनजातियों ने इसके गुणों को बहुत पहले पहचान लिया था, इसलिए यह उनकी संस्कृति और मिथकों में भी रचा-बसा है। इसके फूलों से मीठा शरबत बनाया जाता रहा है और पत्तियों का उपयोग खांसी, जुकाम, दस्त और गठिया के इलाज में किया जाता रहा है। इस पेड़ पर इसके औषधीय गुणों को जानने के लिए अनेक शोध भी किए जा रहे हैं, और पाया गया है कि इसमें कई ऐसे तत्व हैं जो दवाइयों के निर्माण में उपयोगी हो सकते हैं।

बॉटल ब्रश को वैज्ञानिक नाम रॉबर्ट ब्राउन ने दिया था, जो ऑस्ट्रेलिया वनस्पति अभियान पर गए थे। इसका नाम कैलिस्टेमन सिट्रीनस है—“कैलिस्टेमन” का अर्थ यूनानी भाषा में “सबसे सुंदर स्टेमन” होता है।

दिल्ली में इंडिया गेट पर नहर के साथ-साथ और कर्तव्य पथ पर बॉटल ब्रश के पेड़ों की कतारें बेहद सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती हैं। अगर आप फरीदाबाद में हैं, तो सेक्टर-12 के टाउन पार्क में झंडे के पास लगभग 7-8 पेड़ों का एक छोटा-सा समूह भी देखने को मिल जाएगा।

देश के कई हिस्सों में बॉटल ब्रश एक सहनशील और मजबूत प्रजाति के रूप में आमतौर पर सजावटी पौधे के रूप में लगाया जाता है—चाहे बगीचे हों, सड़क के किनारे, नहरों के पास, जंगल या बस्तियां—यह हर जगह दिखाई दे जाता है।