फाइल फोटो: सीएसई 
वन्य जीव एवं जैव विविधता

सरिस्का बफर जोन में अनंता स्पा-रिसॉर्ट पर एनजीटी की सख्ती, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की जांच को संयुक्त समिति गठित

सरिस्का बफर जोन में अनंता स्पा-रिसॉर्ट पर पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन का मामला, एनजीटी ने चार सदस्यीय संयुक्त समिति से स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की

Susan Chacko

  • एनजीटी ने सरिस्का बफर जोन में स्थित अनंता स्पा-रिसॉर्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है।

  • समिति को यह जांच करनी है कि क्या रिसॉर्ट ने 20,000 वर्गमीटर से अधिक निर्माण, 75 से अधिक कमरों और अन्य सुविधाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति, वन्यजीव स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण और भूजल दोहन की अनुमति ली थी या नहीं।

  • याचिका में कहा गया है कि रिसॉर्ट ने बिना आवश्यक अनुमतियों के निर्माण, भूजल दोहन और नाले की भूमि के व्यावसायिक उपयोग जैसे गंभीर उल्लंघन किए हैं।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने 6 जुलाई, 2026 को राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को निर्देश दिया कि वे यह स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करें कि अलवर जिले की प्रतापगढ़ तहसील के गांव ग्वाड़ा कुंदाल स्थित अनंता स्पा एवं रिसॉर्ट, अजबगढ़ की स्थापना आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां एवं अन्य वैधानिक अनुमतियां प्राप्त करने के बाद की गई थी या नहीं।

एनजीटी ने जयपुर स्थित केंद्रीय भूजल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक तथा अनंता स्पा एवं रिसॉर्ट को भी अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति को स्थल का निरीक्षण कर तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट तथा की गई कार्रवाई का ब्यौरा न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर, 2026 को होगी।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि अनंता स्पा एवं रिसॉर्ट ने गांव ग्वाड़ा कुंदाल में आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां एवं अन्य अनिवार्य अनुमतियां प्राप्त किए बिना ही रिसॉर्ट का निर्माण और विकास किया। याचिका में कहा गया है कि यह व्यावसायिक प्रतिष्ठान सरिस्का बाघ अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर स्थित है।

याचिका के अनुसार, 75 से अधिक कमरों, बैंक्वेट हॉल, तैराकी ताल, तथा अन्य सहायक सुविधाओं वाले इस रिसॉर्ट का निर्मित क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर से अधिक है। पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना की अनुसूची 8(क) के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य था, लेकिन रिसॉर्ट का निर्माण बिना ऐसी स्वीकृति के ही कर दिया गया।

याचिका में यह भी कहा गया है कि रिसॉर्ट ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से स्थापना की सहमति तथा संचालन की सहमति प्राप्त नहीं की। इसके अलावा, रिसॉर्ट की स्थापना और संचालन के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से वन्यजीव स्वीकृति भी नहीं ली गई। आरोप है कि रिसॉर्ट अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना भूजल का दोहन कर रहा है।

याचिका के अनुसार, रिसॉर्ट का एक निर्माण गांव ग्वाड़ा कुंदाल के खसरा संख्या 92 पर किया गया है, जिसका राजस्व अभिलेखों में दर्ज स्वरूप गैर मुमकिन नाला है। याचिका में कहा गया है कि विधि के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार जल स्रोतों वाली भूमि का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को उनके मूल स्वरूप में संरक्षित रखा जाना आवश्यक है। इसलिए रिसॉर्ट ने पर्यावरणीय नियमों का अनेक स्तरों पर उल्लंघन किया है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) ने 12 जुलाई, 2024 को संरक्षित क्षेत्रों के बफर क्षेत्र तथा पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्रों की परिधि में संचालित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए थे।

इन निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2015 में संरक्षित क्षेत्रों की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर व्यावसायिक गतिविधियों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को आवश्यक संशोधनों के साथ सभी संरक्षित क्षेत्रों पर लागू किया गया था। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि वन्यजीव स्वीकृति, वन स्वीकृति तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया था कि वन विभाग की टिप्पणियां प्राप्त होने तक किसी भी भूमि का व्यावसायिक उपयोग के लिए रूपांतरण न किया जाए तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।