संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण हेतु सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात में बिजली लाइनों को भूमिगत करने के निर्देश दिए फोटो: आईस्टॉक
वन्य जीव एवं जैव विविधता

संसद में आज: अत्यंत दुर्लभ व संकटग्रस्त पक्षी 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' की संख्या लगातार घट रही है

16 मार्च 2026 को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में दोनों सदनों में पर्यावरण, जल और ऊर्जा से जुड़े कई मुद्दों पर उठाए गए मुद्दों का सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के मंत्रियों ने संसद में जानकारी दी।

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने हेतु पर्यावरण संरक्षण कोष नियम 2026 लागू, प्रदूषण कानूनों के उल्लंघन से प्राप्त जुर्माना फंड में जमा होगा।

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 90 शहरों में अध्ययन, सड़क धूल, वाहन, उद्योग और कचरा जलाना प्रमुख वायु प्रदूषण स्रोत।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देशभर में 4922 स्थानों पर जल गुणवत्ता निगरानी कर रहा, बीओडी के आधार पर प्रदूषित नदी क्षेत्रों की पहचान।

  • संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण हेतु सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात में बिजली लाइनों को भूमिगत या पुनर्निर्देशित करने निर्देश दिए।

  • भारत में 31 जनवरी 2026 तक 201 कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र, कुल स्थापित क्षमता लगभग 227.83 गीगावाट।

पर्यावरण संरक्षण निधि नियम, 2026

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण निधि नियम, 2026 को लागू किया है। यह नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई करना और पर्यावरण संरक्षण के लिए धन उपलब्ध कराना है।

इन नियमों के अनुसार, पर्यावरण से जुड़े कानूनों के उल्लंघन पर जो जुर्माना लगाया जाएगा, वह अब पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा किया जाएगा। इसमें तीन प्रमुख कानूनों के तहत लगाए गए जुर्माने शामिल होंगे -

  • जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

  • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

मंत्री ने कहा कि इस फंड का उपयोग पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने और उसे ठीक करने के लिए किया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि किसी क्षेत्र की भूमि या जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं तो उनकी सफाई और सुधार के लिए इस फंड का उपयोग किया जा सकता है।

सरकार ने यह भी तय किया है कि इस फंड की कुल राशि का अधिकतम पांच प्रतिशत प्रशासनिक खर्चों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें परियोजना प्रबंधन इकाई के कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय के उपकरण, फर्नीचर, ऑडिट और कानूनी सेवाओं का खर्च शामिल होगा।

वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान संबंधी अध्ययन

वायु प्रदूषण को लेकर सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसे कम करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत विभिन्न शहरों में स्रोत-निर्धारण अध्ययन करवाई हैं।

सिंह ने कहा इन अध्ययनों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि हवा में प्रदूषण के लिए कौन-कौन से स्रोत सबसे अधिक जिम्मेदार हैं। अब तक देश के 90 शहरों में यह अध्ययन किया गया है, जिनमें दिल्ली भी शामिल है।

इन अध्ययनों से यह पता चला कि पीएम10 कणों के मुख्य स्रोत निम्न हैं -

  • सड़क की धूल और निर्माण कार्य - लगभग 14 से 58 प्रतिशत

  • वाहनों से निकलने वाला धुआं - लगभग 10 से 33 प्रतिशत

  • औद्योगिक स्रोत - लगभग 8 से 34 प्रतिशत

  • कचरा और बायोमास जलाना - लगभग 8 से 29 प्रतिशत

दिल्ली के लिए साल 2018 में “प्रमुख स्रोतों की पहचान हेतु दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्रोतों का निर्धारण” नामक अध्ययन किया गया था।

नदियों पर औद्योगिक प्रदूषण का प्रभाव

सदन में उठे एक अन्य सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण नदियों का प्रदूषण एक बड़ी चिंता का विषय है। देश में नदियों की जल गुणवत्ता की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाती है।

यह कार्य राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत किया जाता है। इस कार्यक्रम में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी सहयोग करते हैं।

नदी के पानी की गुणवत्ता को मापने के लिए जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का उपयोग किया जाता है। बीओडी यह बताता है कि पानी में कितना जैविक प्रदूषण मौजूद है।

यदि किसी नदी का बीओडी का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक होता है तो उस नदी के हिस्से को प्रदूषित नदी-खंड माना जाता है। इन प्रदूषित हिस्सों को पांच श्रेणियों में बांटा गया है:

  • प्राथमिकता 1 – सबसे अधिक सोबसाइट

  • प्राथमिकता 2 - अत्यधिक मजबूत

  • प्राथमिकता 3 - मध्यम प्रदूषण

  • प्राथमिकता 4 - कम प्रदूषण

  • प्राथमिकता 5 - सबसे कम प्रदूषण

देश में कुल 4922 जगहों पर जल गुणवत्ता की निगरानी की जाती है, जिनमें 2265 जगहें नदियों पर हैं।

संकटग्रस्त पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

भारत की एक अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी प्रजाति ग्रेट इंडियन बस्टर्ड है। इसको लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि यह मुख्य रूप से घास के मैदानों में पाई जाती है और इसकी संख्या लगातार घट रही है।

इस पक्षी के सामने कई चुनौतियां हैं, जैसे -

  • प्राकृतिक आवास का नष्ट होना

  • कृषि गतिविधियों का बढ़ना

  • आवास की गुणवत्ता में गिरावट

  • जंगली और आवारा कुत्तों द्वारा शिकार

  • मानव गतिविधियां

इसके अलावा बिजली की ऊंची तारों और पवन चक्कियों से टकराने के कारण भी इन पक्षियों की मृत्यु हो जाती है। एक और समस्या यह है कि यह पक्षी बहुत धीमी गति से प्रजनन करता है।

इस विषय पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अहम निर्देश दिए हैं। एम.के. रणजीतसिंह बनाम भारत संघ मामले में अदालत ने कहा कि जिन क्षेत्रों में यह पक्षी पाया जाता है, वहां बिजली की लाइनों को भूमिगत करने या उनके मार्ग बदलने जैसे कदम उठाए जाएं। यह निर्देश मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के लिए दिए गए हैं।

भारत में कोयला-आधारित तापीय विद्युत संयंत्र

सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आज, विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने राज्यसभा में कहा कि भारत में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की बड़ी भूमिका है। देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई थर्मल पावर प्लांट काम कर रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक भारत में 201 कोयला और लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्र चालू हैं। इनकी कुल क्षमता लगभग 227.83 गीगावाट है।

इन संयंत्रों का संचालन तीन प्रकार की संस्थाओं द्वारा किया जाता है -

  • केंद्रीय बिजली उत्पादन कंपनियां

  • राज्य बिजली उत्पादन कंपनियां

  • निजी स्वतंत्र बिजली उत्पादक

यमुना नदी की निगरानी

यमुना नदी को लेकर सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि भारत की प्रमुख नदियों में से एक यमुना नदीr की जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाती है।

यह निगरानी राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत की जाती है। यमुना नदी के लिए कुल 33 स्थानों पर पानी की जांच की जाती है।

इन जगहों का वितरण इस प्रकार है -

  • उत्तराखंड के चार जगहों पर

  • हिमाचल प्रदेश के चार जगहों पर

  • हरियाणा के छह जगहों पर

  • दिल्ली के सात जगहों पर

  • उत्तर प्रदेश के 12 जगहों पर

यमुना नदी को साफ करने के लिए सरकार नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत भी काम कर रही है। इस कार्यक्रम को स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन लागू करता है। मंत्री ने कहा वित्त वर्ष 2020-21 से 28 फरवरी 2026 तक यमुना नदी में प्रदूषण कम करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं के लिए 1477.10 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।