वन्य जीव एवं जैव विविधता

संसद में आज: साल 2030 तक तीन अरब टन कार्बन जमा करने का लक्ष्य; सरकार के पास लू से मरने वाले वन्यजीवों की जानकारी नहीं

लोकसभा व राज्यसभा में आज, तीन अगस्त, 2026 को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा समेत कई अहम मुद्दों को लेकर उठाए गए सवालों का सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के द्वारा जवाब दिया गया

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य अतिरिक्त कार्बन संचयन करना है।

  • सरकार का दावा मैंग्रोव संरक्षण, स्वच्छ वायु और वन्यजीव सुरक्षा के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत राज्यों के साथ प्रयास तेज किए।

  • देश में 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का तेजी से विस्तार जारी है।

  • नमामि गंगे मिशन के तहत सीवरेज, नदी तट विकास और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई।

  • लोकसभा और राज्यसभा में सरकार ने पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा, वायु गुणवत्ता और गंगा संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियां जानकारियां दी।

कार्बन सिंक लक्ष्य का आकलन

संसद का मानसून सत्र जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में मंत्रालय के तहत कार्य करने वाले फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई), देहरादून का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि देश के वन संसाधनों और वन कार्बन भंडार का हर दो साल में इसके द्वारा आकलन किया जाता है। यह आकलन इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के माध्यम से प्रकाशित किया जाता है। इस कार्य में उपग्रह चित्रों, रिमोट सेंसिंग, राष्ट्रीय वन सूची और जमीन पर किए गए सर्वे का उपयोग किया जाता है।

यादव ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) को भारत द्वारा प्रस्तुत प्रथम द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में वन क्षेत्र का शुद्ध कार्बन सिंक 0.149 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रहा। साल 2022 तक भारत ने वन और वृक्षों के माध्यम से 2.44 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य कार्बन का संचयन कर लिया है। भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य अतिरिक्त कार्बन संचयन करना है। मंत्री ने कहा कि भारत अपने निर्धारित लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच चुका है। यह उपलब्धि जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

तमिलनाडु में मैंग्रोव बहाली के लिए धन

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय देश के तटीय इलाकों में मैंग्रोव वनों के संरक्षण और विकास के लिए "मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैन्जिबल इनकम्स (मिष्टी)" योजना चला रहा है। इस योजना का उद्देश्य मैंग्रोव वनों का संरक्षण, तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाव करना है।

सिंह ने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने अब तक इस योजना के तहत केंद्र सरकार से किसी प्रकार की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव नहीं भेजा है। हालांकि राज्य सरकार की जानकारी के अनुसार, पिछले पांच सालों में तमिलनाडु में 4,183 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव का निर्माण और पुनर्स्थापन किया गया है। उन्होंने कहा कि मैंग्रोव तटीय क्षेत्रों को समुद्री तूफानों और कटाव से बचाने के साथ-साथ जैव विविधता को भी मजबूत बनाते हैं।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए एयरशेड आधारित प्रबंधन

सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि देश के शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए भारत सरकार ने साल 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शुरू किया था। यह कार्यक्रम 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों में लागू किया गया है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों, राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ वायु कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उन्हें कम करने के उपाय किए जा रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों को एयरशेड आधारित योजना बनाने के लिए भी कहा गया है। एयरशेड का अर्थ ऐसे क्षेत्र से है जहां हवा का प्रवाह और प्रदूषण एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। सिंह ने बताया कि 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य कार्ययोजनाएं तैयार कर ली हैं तथा सभी 130 शहरों ने भी अपने-अपने स्वच्छ वायु कार्ययोजना तैयार की है। सरकार का उद्देश्य लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना और प्रदूषण के स्तर को लगातार कम करना है।

देश में हीटवेव से वन्यजीवों की मौत

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, वहीं हीटवेव से वन्यजीवों की मौत को लेकर सदन में पूछे गए एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि गर्मी और हीटवेव के कारण वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सरकार लगातार निगरानी रख रही है। वन्यजीवों की मृत्यु से संबंधित जानकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एकत्र की जाती है।

सिंह ने बताया कि अब तक किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से अत्यधिक गर्मी या हीटवेव के कारण वन्यजीवों की सामूहिक मृत्यु या बड़े पैमाने पर संकट की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि राज्यों से नियमित रूप से जानकारी हासिल की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ट्रांसमिशन अवसंरचना और ग्रिड की तैयारी

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार ने साल 2030 तक 500 गीगावाट बिना जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। जून 2026 तक देश में लगभग 297.4 गीगावाट बिना-जीवाश्म क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसमें 288.6 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा तथा 8.8 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है।

नाइक ने कहा कि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही राज्यों के भीतर बिजली के बेहतर संचार के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना लागू की जा रही है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पहले चरण के तहत आठ राज्यों में हजारों किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें और बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता स्थापित की जा चुकी है। वहीं ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर दूसरे चरण के तहत सात राज्यों में भी तेजी से कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं से भविष्य में सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर उपयोग संभव होगा और स्वच्छ ऊर्जा को देशभर तक पहुंचाना आसान बनेगा।

नमामि गंगे मिशन के तहत लक्ष्य और उपलब्धियां

नमामि गंगे मिशन को लेकर सदन में पूछे गए के प्रश्न का उत्तर देते हुआ आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार का नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की एक अहम योजना है। इस योजना के तहत सीवरेज व्यवस्था, नदी तट विकास और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चौधरी ने बताया कि अब तक 218 सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 35,794 करोड़ रुपये है और इनके माध्यम से 6,610 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज उपचार क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 145 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 4,260 एमएलडी की उपचार क्षमता तैयार हो गई है।

नदी तट विकास के लिए 84 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से 64 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए जाजमऊ, बंथर और मथुरा में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित किए गए हैं। इनमें जाजमऊ और मथुरा की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ बनाना, प्रदूषण कम करना और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराना है। सरकार का प्रयास है कि आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, बेहतर नदी तट और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रभावी उपचार के माध्यम से गंगा की स्वच्छता और अविरलता को लंबे समय तक बनाए रखा जाए।