गौरव, उन शुरुआती आठ चीतों में शामिल था जिन्हें भारत में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत नामीबिया से लाया गया था। 21 सितंबर 2026 को उसकी मौत हो गई।
गौरव की उम्र 10 वर्ष थी। भारत लाए जाने से पहले उसका नाम एल्टन था, जिसे भारत आने के बाद बदलकर गौरव कर दिया गया था।
प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, “लगभग शाम 4 बजे नामीबिया से लाए गए 10 वर्ष से अधिक उम्र के चीता गौरव की कूनो नेशनल पार्क में इलाज के दौरान मौत हो गई। गौरव को 12 सितंबर 2026 को जंगल से रेस्क्यू किया गया था, क्योंकि वह कमजोर और सुस्त दिखाई दे रहा था।”
बयान के अनुसार, जांच में गौरव बेहद कमजोर पाया गया। उसके शरीर की मांसपेशियां काफी कम हो गई थीं और वह गंभीर रूप से निर्जलित था।
तत्काल सिस्टमिक और सपोर्टिव उपचार शुरू किया गया। इसके बाद गौरव को पालपुर ले जाया गया, जहां उसे नजदीकी निगरानी और आगे के उपचार के लिए क्वारंटीन बोमा में रखा गया।
अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती चिकित्सकीय जांच के आधार पर गौरव में किसी पुरानी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका थी। उपचार के बावजूद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
अधिकारी ने बताया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम और लिए गए नमूनों की जांच के बाद ही पता चलेगा। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इस संबंध में और जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
अफ्रीकी चीते की जंगल में औसत जीवन प्रत्याशा 8 से 12 वर्ष होती है।
फिलहाल कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 51 है, जिनमें 36 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।
कुल चीतों में से 16 फिलहाल जंगल में खुले तौर पर विचरण कर रहे हैं, जबकि चार चीते गांधी सागर अभयारण्य में रह रहे हैं।
इस तरह भारत में अब चीतों की कुल संख्या 55 हो गई है। सितंबर 2022 में दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से कुल 20 चीते भारत लाए गए थे। चीता पुनर्वास परियोजना शुरू हुए अब चार वर्ष हो चुके हैं।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2022 में प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद से भारत में वयस्क और शावकों समेत कुल 24 चीतों की मौत हो चुकी है।
मेटास्ट्रिंग फाउंडेशन के सीईओ और बायोडायवर्सिटी कोलैबोरेटिव के समन्वयक रवि चेल्लम ने कहा कि अधिकारियों को इस मामले में कहीं अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अधिकारियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करके मौत का वास्तविक कारण बताना चाहिए। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा।”