जलवायु परिवर्तन के कारण टूना की प्रवास दिशा बदल रही है, जिससे छोटे मछुआरों की आजीविका और लागत पर असर पड़ रहा है फोटो साभार: आईस्टॉक
वन्य जीव एवं जैव विविधता

गंभीर संकट से उभरने के बाद जलवायु परिवर्तन की चपेट में है पोषक तत्वों से भरपूर टूना मछली

विश्व टूना दिवस: वैश्विक सहयोग और सख्त नियमों से टूना मछलियों की वापसी, लेकिन जलवायु परिवर्तन और बायकैच जैसी चुनौतियां अभी भी बरकरार

Dayanidhi

  • विश्व टूना दिवस पर दुनिया ने टिकाऊ मत्स्य पालन की सफलता देखी, जहां अधिकांश टूना भंडार अब वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित माने जाते हैं

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सख्त नियमों ने टूना मछलियों को बचाया, जिससे पहले संकट में फंसी कई प्रजातियां अब तेजी से उभर रही हैं

  • जलवायु परिवर्तन के कारण टूना की प्रवास दिशा बदल रही है, जिससे छोटे मछुआरों की आजीविका और लागत पर असर पड़ रहा है

  • बायकैच की समस्या अब भी गंभीर है, जिसमें शार्क, कछुए और अल्बाट्रॉस जैसे समुद्री जीव गलती से जाल में फंस जाते हैं

  • संयुक्त राष्ट्र और खाद्य एवं कृषि संगठन के प्रयासों से टिकाऊ टूना मत्स्य पालन और समुद्री जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिला है

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जिम्मेदारी से टूना मछली पकड़ने के महत्व को उजागर करने के लिए दो मई को 'विश्व टूना दिवस' घोषित किया। इसलिए हर साल दो मई को विश्व टूना दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया को टूना मछली के महत्व और इसके संरक्षण की जरूरत के बारे में जागरूक करना है।

टूना आज दुनिया भर के घरों और होटलों में आमतौर पर खाई जाती है। यह न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसमें ओमेगा-3, प्रोटीन और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

पहले संकट, अब सुधार

कुछ साल पहले तक टूना मछली के सामने गंभीर संकट था। बढ़ती मांग के कारण कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ी जाने लगी। कमजोर प्रबंधन और नियमों की कमी के कारण कई टूना प्रजातियां खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थीं। साल 2017 में केवल 75 प्रतिशत टूना ही ऐसे स्रोतों से आ रही थी, जिन्हें सुरक्षित माना जाता था।

लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 99 प्रतिशत टूना मछली अब ऐसे स्रोतों से आ रही है, जिन्हें वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित माना गया है। दुनिया में मौजूद 23 प्रमुख टूना भंडारों में से केवल दो ही अभी भी अत्यधिक शिकार का सामना कर रहे हैं। यह बदलाव यह दिखाता है कि सही प्रयासों से पर्यावरण को बचाया जा सकता है।

अटलांटिक ब्लूफिन टूना इसका एक अच्छा उदाहरण है। यह मछली पहले बहुत कम दिखाई देती थी, लेकिन अब यह फिर से इंग्लैंड और आयरलैंड के समुद्री इलाकों में देखने को मिल रही है। यह सुधार सख्त नियमों और बेहतर निगरानी का परिणाम है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ताकत

इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण देशों के बीच सहयोग है। दुनिया के कई देशों ने मिलकर ऐसे नियम बनाए हैं, जिनसे यह तय होता है कि कितनी मात्रा में टूना मछली पकड़ी जा सकती है। इन नियमों को वैज्ञानिकों, सरकारों और मछुआरों की सहमति से बनाया जाता है।

नई तकनीकों ने भी इसमें मदद की है। अब इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिए मछली पकड़ने की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। इससे गलत तरीके से मछली पकड़ने पर रोक लगती है और सही आंकड़े जुटाए जा सकते हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसका कॉमन ओशन्स टूना प्रोजेक्ट मछुआरों को प्रशिक्षण देता है और टिकाऊ मछली पकड़ने के तरीके सिखाता है। इसके साथ ही यह नई तकनीकों को बढ़ावा देता है, जिससे पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ती है।

नई चुनौतियां भी सामने

हालांकि स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन चुनौतियां अभी भी खत्म नहीं हुई हैं। जलवायु परिवर्तन इसका एक बड़ा कारण है। समुद्र का तापमान बढ़ने से टूना मछलियां अपने रास्ते बदल रही हैं और समुद्र में दूर तक चली जा रही हैं। इससे मछुआरों की लागत बढ़ रही है और छोटे मछुआरों की आजीविका पर खतरा पैदा हो रहा है।

इसके अलावा, बायकैच यानी अन्य समुद्री जीवों का गलती से जाल में फंस जाना भी एक बड़ी समस्या है। इसमें शार्क, कछुए और समुद्री पक्षी शामिल हैं। खासकर अल्बाट्रॉस जैसे पक्षी इसके कारण खतरे में हैं।

इन समस्याओं से निपटने के लिए 2026 में बीबीएनजे समझौता लागू हुआ है। यह समझौता समुद्र के उन हिस्सों में जैव विविधता की रक्षा के लिए बनाया गया है, जो किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं आते।

हम सबकी जिम्मेदारी

टूना मछलियां बेहद खास होती हैं। ये बहुत तेज तैर सकती हैं और हजारों किलोमीटर तक समुद्र में यात्रा करती हैं। ये समुद्री खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और समुद्र के संतुलन को बनाए रखती हैं।

टूना मछलियों की स्थिति में सुधार यह दिखाता है कि जब देश मिलकर काम करते हैं और वैज्ञानिक सलाह का पालन करते हैं, तो सकारात्मक बदलाव संभव है। लेकिन यह भी सच है कि यह सफलता स्थायी नहीं है। अगर हम सतर्क नहीं रहे, तो स्थिति फिर खराब हो सकती है।

विश्व टूना दिवस के अवसर पर यह जरूरी है कि हम इस उपलब्धि का स्वागत करें और साथ ही भविष्य के लिए जिम्मेदारी भी समझें। टूना को बचाना केवल एक मछली को बचाना नहीं है, बल्कि पूरे समुद्री पर्यावरण की रक्षा करना है।