मौसम विभाग का अनुमान, अगर मानसून आठ जून, 2026 तक पहुंचता है तो भी सामान्य माना जाएगा, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है। 
मौसम

केरल में 26 मई को आने वाले मानसून में देरी? अब तीन जून के बाद आने की संभावना

केरल में मानसून की देरी, हवाएं कमजोर, चक्रवात और एल नीनो के असर से बारिश की शुरुआत टली, मौसम विभाग ने नया अनुमान किया जारी

Dayanidhi

  • केरल में मानसून के आगमन में लगातार देरी, अब तीन जून के बाद आने की संभावना, मौसम विभाग का नया पूर्वानुमान।

  • कमजोर पश्चिमी हवाओं के कारण अरब सागर से मानसूनी सिस्टम सही तरीके से विकसित नहीं हो पा रहा, बारिश की शुरुआत रुकी।

  • बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ने मानसूनी हवाओं की दिशा और गति को बाधित कर मौसम प्रणाली को अस्थिर किया।

  • प्रशांत महासागर में एल नीनो बनने के संकेत, जिससे भारत में मानसून कमजोर और असमान बारिश की आशंका बढ़ गई है।

  • मौसम विभाग का अनुमान, अगर मानसून आठ जून, 2026 तक पहुंचता है तो भी सामान्य माना जाएगा, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।

भारत में इस साल 26 मई को केरल में दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तीन जून के बाद आने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अब इसके तीन जून, 2026 से पहले आने की संभावना नहीं है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि यह और भी देर से आ सकता है। मानसून के आगमन की तारीख इस बार तीसरी बार बदली गई है, जिससे मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई को केरल पहुंचेगा, जो सामान्य तारीख एक जून से पहले था। लेकिन उस दिन मानसून नहीं आया। इसके बाद तारीख बदलकर 28 मई की गई, फिर इसे सामान्य समय यानी एक जून के आसपास बताया गया। अब नवीनतम अनुमान के अनुसार मानसून कम से कम तीन जून के बाद ही केरल पहुंचेगा।

आखिर मानसून के आगमन में देरी क्यों हो रही है

मानसून का केरल में आगमन केवल बारिश शुरू होने की घटना नहीं है, बल्कि इसके लिए कई मौसमीय स्थितियों का एक साथ बनना जरूरी होता है। मौसम विभाग तब ही मानसून के आगमन की घोषणा करता है जब केरल के 60 प्रतिशत से अधिक मौसम केंद्रों पर लगातार बारिश हो, अरब सागर से आने वाली हवाएं यानी पश्चिमी हवाएं पर्याप्त मजबूत हों और उपग्रह चित्रों में बादलों का घना समूह दिखाई दे।

इस समय सबसे बड़ी समस्या कमजोर पश्चिमी हवाओं की है। अरब सागर से आने वाली हवाएं इतनी मजबूत नहीं हो पा रही हैं कि वे मानसून को आगे बढ़ा सकें। हालांकि केरल और लक्षद्वीप के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो रही है, लेकिन यह मानसून के औपचारिक आगमन के लिए काफी नहीं है।

चक्रवात का असर और मौसम में अस्थिरता

हाल ही में बंगाल की खाड़ी में बने एक चक्रवात ने भी मौसम प्रणाली को प्रभावित किया है। चक्रवात अक्सर मानसून की हवाओं को कमजोर कर देते हैं क्योंकि वे हवा के सामान्य प्रवाह को बदल देते हैं। इसी वजह से मानसून की व्यवस्था पूरी तरह से संगठित नहीं हो पा रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक जून के आसपास हवाएं धीरे-धीरे मजबूत हो सकती हैं, जिससे मानसून की शुरुआत संभव है। लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है, इसलिए सटीक तारीख बताना मुश्किल है।

जलवायु परिवर्तन का असर

जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता से 2026 के मानसून का पूर्वानुमान और कठिन बना रहा है। कई जलवायु कारक एक साथ काम कर रहे हैं, जिससे मानसून का अनुमान लगाना जटिल हो गया है, हालांकि स्थिति स्थिर भी रह सकती है।

वहीं, एल नीनो का असर हर बार एक जैसा नहीं होता और इसका प्रभाव अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग तरह से दिखाई देता है। प्रशांत महासागर से जुड़ी यह जलवायु प्रणाली एल नीनो-दक्षिणी दोलन भारतीय मानसून को प्रभावित करती है, लेकिन इसका परिणाम हमेशा समान नहीं रहता।

एल नीनो का प्रभाव और वैश्विक मौसम प्रणाली

इस साल एक और बड़ी चिंता एल नीनो से जुड़ी हुई है। प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र में समुद्री तापमान में बदलाव के कारण एल नीनो की स्थिति बनती है। इस स्थिति का असर भारत के मानसून पर भी पड़ता है।

एल नीनो के दौरान भारत में मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है या उसकी बारिश कम हो जाती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार एल नीनो जल्दी विकसित हो सकता है, जिससे मानसून पर दबाव बढ़ सकता है। इससे बारिश की मात्रा कम होने की संभावना भी जताई जा रही है।

भारत के लिए मानसून का महत्व और देरी का असर

भारत में मानसून केवल मौसमीय घटना नहीं है, बल्कि यह कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और बारिश का सीधा असर फसलों पर पड़ता है।

हालांकि केरल में कुछ दिनों की देरी का मतलब पूरे देश में समस्या होना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, यदि मानसून आठ जून, 2026 तक भी आ जाता है, तो इसे सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर इससे भी अधिक देरी होती है, तो चिंता बढ़ सकती है।

इस समय देश के कई हिस्सों में पहले से ही तेज गर्मी और हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में मानसून की देरी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। इसके अलावा यदि एल नीनो मजबूत होता है, तो पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

आगे का अनुमान और स्थिति

मौसम विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे जून के पहले सप्ताह में हवाएं मजबूत होंगी, मानसून के आगे बढ़ने की संभावना बढ़ेगी। लेकिन अभी मौसम प्रणाली पूरी तरह संतुलित नहीं है, इसलिए अनिश्चितता बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मानसून कब आता है, उससे ज्यादा यह देखना है कि वह पूरे सीजन में कितना मजबूत रहता है। अगर बारिश असमान रही या बीच-बीच में रुकती रही, तो इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

इस तरह, केरल में मानसून की देरी भले ही कुछ दिनों की हो, लेकिन इसके पीछे मौजूद वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम कारण इसे एक महत्वपूर्ण मौसम घटना बना रहे हैं।