मध्य प्रदेश में कम दबाव सक्रिय, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली में येलो और पहाड़ी क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट।
उत्तराखंड और हिमाचल में भारी से लेकर बहुत भारी बारिश की चेतावनी, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन व सड़क बाधित होने का खतरा।
असम में बाढ़ से 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित, पूर्वी जिलों में हालात गंभीर, राहत-बचाव कार्य जारी।
पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान, कई इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी।
किसानों को जल निकासी मजबूत करने और तैयार फसल सुरक्षित रखने की सलाह, गरज-चमक में खुली जगहों पर जाने से बचने की अपील।
मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में जारी है। इसके कारण मध्य भारत के साथ-साथ उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मानसून ट्रफ इस समय जैसलमेर, गुना, उत्तर मध्य प्रदेश के पास बने कम दबाव वाले क्षेत्र, डाल्टनगंज और दीघा से होकर गुजर रही है।
इसके बाद यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बढ़ते हुए मध्य-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच रही है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ हिस्सों, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। पश्चिमी विक्षोभ इस समय ऊपरी वायुमंडल में एक ट्रफ के रूप में मौजूद है। यह उत्तर भारत के मौसम पर अपना प्रभाव डाल रहा है। इन मौसमीय प्रणालियों के चलते मौसम विभाग के द्वारा आज, 10 अगस्त, 2026 को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश की संभावना
दिल्ली में सोमवार सुबह आसमान में बादल छाए रहे। वहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सुबह से धूप देखने को मिली। हालांकि मौसम कभी भी बदल सकता है। मौसम विभाग ने दिल्ली में आज भारी बारिश की संभावना जताई है और येलो अलर्ट जारी किया है।
लगातार बारिश के कारण दिल्ली में तापमान सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। आज सोमवार,10 अगस्त को अधिकतम तापमान के 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान के 26 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में आज, उत्तराखंड के कई इलाकों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की आशंका जताई है। देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बादल बरस सकते हैं।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। कांगड़ा और सिरमौर के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिलासपुर, मंडी और सोलन में येलो अलर्ट जारी है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है।
आज, 10 अगस्त, 2026 को जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बादलों के जमकर बरसने के आसार हैं। मौसम विभाग ने यहां भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
कई राज्यों में भारी से लेकर बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के मुताबिक आज, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया। इन राज्यों में भी 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा आज, असम और मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बादल बरस सकते हैं।
असम में बाढ़ से हालात गंभीर
असम में लगातार जारी बाढ़ ने कई इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। राज्य के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नौ अगस्त, 2026 को जारी असम के डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ से 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बुलेटिन में 60 पुरुषों, 23 महिलाओं और 18 बच्चों की मौत की जानकारी दी गई है। मृत बच्चों में 12 लड़के और छह लड़कियां शामिल हैं। कुल मिलाकर मौत के आंकड़े 100 के पार पहुंच गए हैं। बाढ़ से राज्य के कई हिस्सों में घर, सड़कें और दूसरी जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।
पूर्वी असम के चार जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं। कई इलाकों पर सामान्य आवागमन बाधित है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
तापमान में उतार-चढ़ाव, कई राज्यों में सामान्य से अधिक गर्मी
मौसम विभाग के मुताबिक, देश के कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। अरुणाचल प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.1 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। उत्तराखंड और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों के साथ असम और मेघालय, ओडिशा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पश्चिमी राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भी तापमान सामान्य से अधिक रहा।
न्यूनतम तापमान भी कई राज्यों में सामान्य से ऊपर रहा। असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में यह 5.1 डिग्री सेल्सियस से अधिक यानी सामान्य से ऊपर दर्ज हुआ। बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ इलाकों में भी रात का तापमान सामान्य से अधिक रहा।
कल, नौ अगस्त, 2026 को तमिलनाडु के मदुरै में देश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस असम के हाफलॉन्ग में दर्ज हुआ।
पिछले 24 घंटे में कहां कितने बरसे बादल?
पिछले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश के भोपाल और गुना में अच्छी बारिश दर्ज की गई। भोपाल के अरेरा हिल्स में 120 मिमी और गुना में 70 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून-मोकामपुर में भी 40 मिमी बारिश हुई।
किसानों और लोगों के लिए जरूरी सावधानी
भारी बारिश और गरज-चमक की आशंका को देखते हुए किसानों को खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है। नालियों और जल निकासी के रास्तों की सफाई पहले से कर लें, ताकि जलभराव से फसलों को नुकसान न हो। तैयार फसल की समय पर कटाई कर उसे सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें।
बारिश के दौरान कीटनाशक या खाद का छिड़काव करने से बचना चाहिए, क्योंकि बारिश के पानी के साथ दवा बह सकती है। गरज-चमक के दौरान किसान खुले खेत, पेड़, तालाब और नदियों के पास न जाएं तथा तुरंत सुरक्षित भवन में चले जाएं। पशुओं को भी सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें।
लोगों और किसानों को मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों, नदियों और नालों के पास जाने से बचना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी बाढ़, बिजली गिरने और जलभराव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है।