नवंबर 2026 में देश के अधिकांश इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने का मौसम विभाग ने अनुमान जताया। फोटो साभार: आईस्टॉक
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नवंबर रहेगा गर्म, देश के अधिकतर इलाकों में सामान्य से कम बारिश

दक्षिण भारत में 77 प्रतिशत से कम रह सकती है बारिश, उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना

Dayanidhi

  • नवंबर 2026 में देश के अधिकांश इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने का मौसम विभाग ने अनुमान जताया।

  • दक्षिण भारत के पांच मौसम उपखंडों में नवंबर की बारिश दीर्घकालिक औसत के 77 प्रतिशत से कम रहने की संभावना।

  • मध्य, उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने के संकेत मिले हैं।

  • देश के अधिकांश हिस्सों में नवंबर के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

  • प्रशांत महासागर में बहुत मजबूत अल नीनो की स्थिति नवंबर-दिसंबर तक बने रहने की आशंका जताई गई है।

नवंबर का महीना देश के अधिकांश इलाकों के लिए मौसम के लिहाज से कुछ अलग रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, नवंबर 2026 में देश के अधिकतर इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। वहीं, दक्षिण भारत के पांच मौसम संबंधी उपखंडों में भी बारिश सामान्य से काफी कम रह सकती है। दूसरी ओर, देश के ज्यादातर हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मौसम विभाग ने 31 अक्टूबर को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में नवंबर के दौरान बारिश और तापमान की संभावित स्थिति की जानकारी दी है। इसके अनुसार, मध्य, उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। हालांकि देश के बड़े हिस्से में बारिश की कमी रहने के संकेत हैं।

दक्षिण भारत में बारिश की सबसे ज्यादा चिंता

मौसम विभाग के मुताबिक, भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में नवंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की बहुत ज्यादा आशंका है। इस क्षेत्र में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, केरल और माहे तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं।

इन पांच मौसम संबंधी उपखंडों में नवंबर की बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 77 प्रतिशत से भी कम रह सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में नवंबर महीने की सामान्य बारिश लगभग 118.7 मिमी है। ऐसे में इस बार बारिश का सामान्य स्तर से नीचे रहना किसानों और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

दक्षिण भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश काफी महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान होने वाली वर्षा खेती, जलाशयों और भूजल स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए नवंबर में बारिश की कमी का असर क्षेत्र की मौसमी परिस्थितियों पर पड़ सकता है।

देशभर में भी सामान्य से कम बरसेंगे बादल

मौसम विभाग ने पूरे देश में नवंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है। देश में नवंबर महीने की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 29.7 मिलीमीटर है। इस बार कुल बारिश एलपीए के 77 प्रतिशत से कम रहने का अंदेशा जताया गया है।

हालांकि सभी क्षेत्रों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। इसके अलावा देश के अधिकांश अन्य हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।

इस पूर्वानुमान से पता चलता है कि नवंबर में बारिश का वितरण असमान रह सकता है। कुछ हिस्सों में बादल अच्छी बारिश करा सकते हैं, जबकि कई इलाकों में मौसम शुष्क बना रह सकता है।

दिन में ज्यादा गर्मी, रातें भी रहेंगी अपेक्षाकृत गर्म

नवंबर के दौरान तापमान को लेकर भी मौसम विभाग ने अहम संकेत दिए हैं। विभाग के अनुसार, देश के अधिकांश इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। इसका मतलब है कि नवंबर में भी कई इलाकों में दिन के समय अपेक्षाकृत गर्मी महसूस हो सकती है।

हालांकि हिमालय की तलहटी से जुड़े कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। इन इलाकों में नवंबर के दौरान अपेक्षाकृत ठंडा मौसम रहने की संभावना है।

रात के तापमान में भी बढ़ोतरी के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार, देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। हालांकि मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य से लेकर सामान्य से कम रहने का अनुमान है।

इस तरह नवंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इससे सर्दी की शुरुआत कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है।

प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो का प्रभाव

मौसम विभाग के पूर्वानुमान में प्रशांत महासागर की समुद्री परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बहुत मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। आईएमडी के मानसून मिशन युग्मित पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडल के अनुसार, नवंबर और दिसंबर 2026 के दौरान भी बहुत मजबूत अल नीनो की स्थिति बने रहने के आसार हैं।

अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान से जुड़ी एक जलवायु स्थिति है, जिसका असर दुनिया के कई क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में भी इसका संबंध मानसून और बारिश की परिस्थितियों से देखा जाता है।

हिंद महासागर में तटस्थ स्थिति रहने का अनुमान

प्रशांत महासागर के साथ-साथ हिंद महासागर की समुद्री सतह का तापमान भी भारतीय मौसम को प्रभावित करता है। इसे समझने के लिए इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) पर नजर रखी जाती है।

मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल हिंद महासागर में आईओडी की स्थिति तटस्थ बनी हुई है। हालांकि, इसका मान सकारात्मक आईओडी की निर्धारित सीमा 0.4 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा है, लेकिन किसी स्थिति को स्थापित घटना मानने के लिए इस स्तर का लगातार बने रहना जरूरी है।

वैश्विक जलवायु मॉडल के मुताबिक, दिसंबर 2026 तक मानसून के बाद के मौसम में आईओडी की तटस्थ स्थिति बने रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, नवंबर 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान की आशंका है। दक्षिण भारत में बारिश की कमी विशेष रूप से अहम रहेगी, जबकि कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा राहत दे सकती है।