गुजरात, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट, जबकि अनेक राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी। 
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मानसून की दिल्ली समेत उत्तर के शेष हिस्सों में जल्द दस्तक, कई राज्यों में बारिश का रेड अलर्ट

दिल्ली में जल्द पहुंचेगा मानसून, कई राज्यों में भारी से अत्यधिक बारिश का रेड अलर्ट, आंधी-बिजली का खतरा, असम में बाढ़ से बढ़ी चिंता, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

Dayanidhi

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले दो दिनों में दिल्ली समेत उत्तर भारत के शेष हिस्सों में पहुंचने की संभावना है।

  • गुजरात, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट, जबकि अनेक राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी।

  • उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत, कई राज्यों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी।

  • असम में बाढ़ से करीब 48,500 लोग प्रभावित, 179 गांव जलमग्न और 2,117 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को नुकसान।

  • मौसम विभाग ने लोगों और किसानों को सतर्क रहने, जलभराव से बचने, फसलों की सुरक्षा और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, एक जुलाई 2026 को मानसून ने उत्तर अरब सागर, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर के सभी हिस्सों को कवर कर लिया है। वहीं, हरियाणा और पंजाब के कुछ इलाकों में भी मानसून पहुंच चुका है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बारिश से बदला मौसम

गुरुवार, दो जुलाई, 2026 की सुबह दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हुई बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत दिलाई। कई इलाकों में तेज बारिश के साथ ठंडी हवाएं चलीं, जिससे मौसम सुहावना हो गया।

मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने, मध्यम बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान लगाया है। इस दौरान अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है।

कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी

मानसून की सक्रियता के चलते देश के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने तटीय कर्नाटक, गुजरात, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी तथा कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों के कुछ हिस्सों में 204.5 मिमी से अधिक बारिश होने का अंदेशा जताया गया है।

इसके अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, विदर्भ, ओडिशा तथा सौराष्ट्र-कच्छ में भी भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है।

वहीं आज, दो जुलाई, 2026 को बिहार, पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, केरल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन सभी राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश होने का अनुमान है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है।

आंधी, बिजली और तेज हवाओं का खतरा

बारिश के साथ कई राज्यों में तेज हवाएं और आकाशीय बिजली भी लोगों की चिंता बढ़ा सकती हैं। मौसम विभाग की मानें तो कई राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ जगहों पर हवा की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत होने की खबर है। इसके बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास न जाने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी गरज-चमक के समय सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी है।

असम में बाढ़ से बढ़ी मुश्किलें

पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश ने असम में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य के करीब 48,500 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां 44 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। डिब्रूगढ़, बिस्वनाथ और नलबाड़ी जिलों में भी हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है।

बाढ़ के कारण राज्य के 179 गांव जलमग्न हो गए हैं, जबकि लगभग 2,117 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

समुद्र में न जाएं मछुआरे

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाओं और ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है। गुजरात, कोंकण-गोवा, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, ओडिशा तट और अंडमान सागर के आसपास समुद्र में मौसम बेहद खराब रहने की आशंका जताई है। कई इलाकों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

तापमान में नहीं होगा बड़ा बदलाव

मौसम विभाग ने आज सुबह जारी अपने पूर्वानुमान में कहा है कि सात जुलाई तक देश के अधिकतर इलाकों में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। वहीं कल, एक जुलाई, 2026 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में सबसे अधिक 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि ओडिशा के नयागढ़ में मैदानी क्षेत्रों का सबसे कम न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है।

लोगों और किसानों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाले इलाकों में जाने से परहेज करें। बिजली चमकने के समय खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लोग प्रशासन की चेतावनियों पर विशेष ध्यान दें और सुरक्षित स्थानों पर रहने की व्यवस्था करें।

किसानों को सलाह दी गई है कि जहां फसल तैयार हो चुकी है, वहां मौसम को देखते हुए जल्द कटाई कर लें। खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे। बारिश के दौरान कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव न करें।

पशुपालक अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें तथा चारा और स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर लें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसान कृषि यंत्र, बीज और खाद जैसी जरूरी सामग्री को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर रखें।

देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। एक ओर बारिश लोगों को भीषण गर्मी से राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं जनजीवन और खेती के लिए चुनौती बन रही हैं। ऐसे में सतर्कता, समय पर तैयारी और मौसम विभाग की सलाह का पालन करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।