मौसम

दो दशक में दस साल जून में हुई सामान्य से कम बारिश, अभी तक 32 फीसदी वर्षा में कमी

जून महीने में भारत के 71 फीसदी (511) जिले में बारिश की कमी बनी हुई है।

Vivek Mishra, Himanshu Nitnaware, Pulaha Roy

मॉनसून का आगमन हो चुका है और किसान अभी तक वर्षा के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। देश के कुल 718 जिलों में से 511 जिलों में यानी 71 फीसदी में जून महीने में वर्षा की कमी बनी हुई है। देश के 38 जिलों में वर्षा की एक बूंद तक नहीं गिरी है। इनमें 28 जिले तो सिर्फ उत्तर प्रदेश से हैं। 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक बीते दो दशक में दस साल ऐसे रहे हैं जब जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इनमें 2009 (48 फीसदी कम), 2012 (29 फीसदी कम) और 2014 (42 फीसदी कम वर्षा), 2019  (32 फीसदी कम वर्षा) दर्ज की गई थी। इनमें 2019 और 2012 को छोड़कर बाकी वर्षों में कमजोर एलनीनो रिकॉर्ड किया गया था। 

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक 347 जिलों में अत्यधिक कम वर्षा (लार्ज डिफिशिएंट रेनफॉल) दर्ज की गई है जबकि 126 जिलों में वर्षा डिफिशिएंट यानी कम श्रेणी में रिकॉर्ड हुई है। 

आईएमडी के मुताबिक 60 फीसदी से अधिक वर्षा लॉर्ज एक्सेस, 20 फीसदी से 59 फीसदी तक वर्षा को एक्सेस व 19 फीसदी कम व ज्यादा वर्षा सामान्य श्रेणी में मानी जाती है। जबकि -59 से -20 फीसदी तक डिफिशिएंट, -99 से -60 फीसदी वर्षा लार्ज डिफिशिएंट मानी जाती है। 

देश में मॉनसून का आगमन 8 जून को हुआ था। तबसे अब तक यानी 20 जून तक उपलब्ध वर्षा आंकड़ों से पता चलता है कि सिर्फ 85 जिले यानी 5 फीसदी में ही सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई है। 

21 जून तक देश ने 61.9 एमएम वर्षा हासिल की जो कि एक जून से 21 जून तक के सामान्य अवधि 92.8 एमएम से 33 फीसदी कम है। आईएमडी के मुताबिक बीते वर्ष 2022 में जून महीने में सामान्य 165.3 से 8 फीसदी कम वर्षा यानी 152 एमएम वर्षा महीने में रिकॉर्ड की गई थी। 

उड़ीसा के कटक में कृषिमौसम वैज्ञानिक देबाशीश जेना ने बताया कि अगले सप्ताह 23 से 29 जून तक मॉनसून अपनी रफ्तार पकड़ सकता है। अभी तक वर्षा न होने के कारण बुआई बाधित हुई है। भारत के दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्र में जून महीने में सामान्य वर्षा हो सकती है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, उड़ीसा और महाराष्ट्र में वर्षा में तेजी आ सकती है। देश के पश्चिमी हिस्से में चक्रवात बिपरजॉय के कारण वर्षा के आसार बन रहे हैं। इससे बुआई में भी बढोत्तरी हो सकती है। 75 से 100 एमएम की कुल वर्षा किसानों को बुआई के लिए मददगार है। 

हालांकि, आईएमडी के स्टैंडराइज्ड परसिपिटेशन इंडेक्स के मुताबिक भारत के केंद्रीय भाग में सूखे की स्थिति रह सकती है। आईएमडी, पुणे के वरिष्ठ वैज्ञानिक पुलक गुहाठाकुरता ने कहा कि देश के कई हिस्सों में सूखा है यदि आने वाले हफ्ते में वर्षा में कमी होती है तो सूखे की स्थितियां आगे बढ़ सकती हैं। आईएमडी लगातार सूखे की स्थिति की निगरानी कर रहा है अभी से सूखे का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। इस संबंध में किसानों के लिए समय आने पर एडवाइजरी जारी की जाएगी। 

यदि जून महीने में वर्षा में कमी रह जाती है तो हम बीते 20 वर्षों में सबसे खराब स्थितियों वाले जून महीने के वर्षों की कतार में यह वर्ष भी जुड़ जाएगा। 2009 और 2014 ऐसे ही सूखाग्रस्त जून वाले वर्ष थे।