झारखंड में डिप्रेशन सक्रिय, अगले 24 घंटे में कमजोर होगा; कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट।
दिल्ली-एनसीआर में आज बारिश के साथ गरज-चमक, तेज हवाओं की संभावना; मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया।
उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और बादल फटने का खतरा।
छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी तेज बारिश के आसार।
किसानों को जलभराव से बचाव, फसल सुरक्षित रखने और बिजली चमकने के दौरान खेतों से दूर रहने की सलाह।
मौसम विभाग की ओर से शुक्रवार, 14 अगस्त, 2026 को जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से बना डिप्रेशन अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह यह झारखंड और उससे सटे पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों के ऊपर बना हुआ था। यह जमशेदपुर के उत्तर-पश्चिम में करीब 40 किमी की दूरी पर था। इसके अगले 24 घंटे में झारखंड के ऊपर से आगे बढ़ने और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है।
वहीं, मानसून ट्रफ इस समय अमृतसर, बरेली, वाराणसी और रांची से होते हुए झारखंड के ऊपर बने डिप्रेशन तथा पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों के रास्ते दीघा तक बनी हुई है। इसके बाद यह दक्षिण-पूर्व दिशा में उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रही है। यह स्थिति मानसूनी गतिविधियों को सक्रिय रखने में मदद कर रही है, जिससे कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इसके कारण उत्तर-पश्चिम भारत और पहाड़ी इलाकों के मौसम पर भी असर पड़ सकता है।
इन राज्यों में बहुत भारी से लेकर अत्यधिक भारी बारिश के आसार
मानसून व कम दवाब संबंधी मौसमीय प्रणालियों के कारण आज, 14 अगस्त, 2026 को झारखंड, पश्चिम बंगाल मंे गंगा के तटीय इलाकों और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी, जबकि कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है। मौसम विभाग ने इन सभी राज्यों में बारिश के लिए ऑरेंज से लेकर रेड अलर्ट तक जारी किया है। इन राज्यों में 204.5 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है।
कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, आज अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, केरल, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, पंजाब, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, उत्तर प्रदेश तथा विदर्भ के अलग-अलग इलाकों में भी भारी बारिश की संभावना है। इन सभी राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बादल बरस सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, आज दिल्ली-एनसीआर में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में आज आसमान में बादल छाए रहने और दिन के समय बारिश होने की उम्मीद है। राजधानी के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
पहाड़ी राज्यों में भी भारी से लेकर बहुत भारी बारिश का खतरा
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड के नैनीताल, ऋषिकेश, हरिद्वार, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां 115 से 204 मिमी तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। साथ ही तेज हवाएं भी चलने का भी अंदेशा जताया गया है।
हिमाचल प्रदेश में भी कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और आंधी का पूर्वानुमान लगाया गया है। मनाली में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कुल्लू, कांगड़ा, मंडी, चंबा, सोलन, सिरमौर, किन्नौर और अन्य इलाकों में भी मौसम खराब रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में आज बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
वहीं आज, 14 अगस्त, 2026 को जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर, अनंतनाग, किश्तवाड़, डोडा, पुंछ, सांबा, कठुआ, बारामुला और राजौरी में गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में तेज हवाएं भी चलने के भी आसार हैं। यहां भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
बादल फटने की घटनाओं से बढ़ी चिंता
पहाड़ी राज्यों में हाल के दिनों में बादल फटने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ से लेकर उत्तराखंड के चमोली तक कई जगहों पर भयंकर बारिश के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और वहां जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
भारी बारिश के दौरान नदी, नाले और छोटी धाराएं अचानक उफान पर आ सकती हैं। लोगों को ऐसे स्थानों के पास जाने से बचना चाहिए। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में भी यात्रा करते समय सतर्क रहना जरूरी है।
कुछ राज्यों में सामान्य से ज्यादा तापमान
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, असम और मेघालय तथा उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। वहीं असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 5.1 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया।
कल, 13 अगस्त, 2026 को मैदानी इलाकों में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस तमिलनाडु के कोविलांगुलम में दर्ज हुआ। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस मध्य प्रदेश के खरगोन में दर्ज किया गया।
कई इलाकों में हुई अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में सुबह 8:30 बजे से आज सुबह 5:30 बजे तक कुछ इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के नागपट्टिनम जिले में 120 मिमी बारिश हुई। वहीं जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के डोडा जिले के भद्रवाह में 60 मिमी बारिश दर्ज की गई।
लोगों और किसानों के लिए जरूरी सावधानी
भारी बारिश की आशंका वाले इलाकों में किसान खेतों में जलभराव न होने दें और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए नालियों की व्यवस्था रखें। कटी फसल, बीज, खाद और कृषि उपकरणों को सुरक्षित व सूखी जगह पर रखें। बारिश और तेज हवाओं के दौरान खेत में काम करने से बचें। बिजली चमकने पर खुले खेत या पेड़ के नीचे न रहें और सुरक्षित स्थान पर जाएं। लगातार बारिश में अतिरिक्त सिंचाई न करें। केले, मक्का और सब्जियों जैसी फसलों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा दें। बारिश के बाद जलभराव, फसल गिरने और मिट्टी कटाव की जांच करें।
मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है। इसलिए लोगों और किसानों को स्थानीय स्तर पर जारी मौसम विभाग और प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। भारी बारिश के दौरान सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचना, जलभराव वाले इलाकों से दूरी रखना और बिजली गिरने के समय खुले स्थान से बचना जरूरी है। किसानों को भी मौसम के अनुसार खेती के काम की योजना बनानी चाहिए, ताकि बारिश से फसल और कृषि सामान को कम से कम नुकसान हो।