जुलाई 2026 में देशभर में औसत बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका, अधिकांश क्षेत्रों में मानसून कमजोर रह सकता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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जुलाई 2026 में सामान्य से कम बारिश के आसार, तापमान भी रहेगा ज्यादा : मौसम विभाग

मौसम विभाग के द्वारा जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि जुलाई में देश के अधिकतर इलाकों में सामान्य से कम बारिश व तापमान के अधिक रहने के आसार, किसानों की बढ़ सकती है चिंता।

Dayanidhi

  • जुलाई 2026 में देशभर में औसत बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका, अधिकांश क्षेत्रों में मानसून कमजोर रह सकता है।

  • देश के अधिकतर इलाकों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान, लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

  • उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।

  • कम बारिश से खेती, जल संसाधनों, पेयजल उपलब्धता और जलविद्युत उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जल संरक्षण पर जोर दिया गया।

  • कमजोर एल नीनो के मजबूत होने के संकेत, जबकि हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति मानसून के दौरान बनी रह सकती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जुलाई 2026 के लिए मासिक बारिश और तापमान का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार, जुलाई में पूरे देश में औसत बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। वहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि समय रहते तैयारी और मौसम संबंधी सलाह का पालन करके संभावित चुनौतियों का काफी हद तक सामना किया जा सकता है।

जुलाई में कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के मुताबिक, जुलाई 2026 में देशभर में औसत बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 94 प्रतिशत से कम रहने के आसार हैं। साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने में देश की औसत वर्षा 280.4 मिमी मानी जाती है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा देश के अधिकतर इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।

खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है असर

कम बारिश का सबसे अधिक असर कृषि, जल संसाधनों और पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है। बारिश कम होने से जलाशयों में पानी की मात्रा घट सकती है और सिंचाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन, पर्यावरण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। कई क्षेत्रों में गर्मी और जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों और राज्य सरकारों को जल संरक्षण, उपलब्ध जल का बेहतर प्रबंधन और कृषि के लिए वैकल्पिक योजनाएं पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है।

अधिकांश राज्यों में तापमान रहेगा अधिक

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई के दौरान देश के अधिकतर इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अंदेशा है। केवल पश्चिम-मध्य भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है। हालांकि मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है। अधिक तापमान के कारण लोगों को उमस और गर्मी का अधिक सामना करना पड़ सकता है।

एल नीनो के प्रभाव पर नजर

विभाग ने बताया कि इस समय प्रशांत महासागर में कमजोर एल नीनो की स्थिति बनी हुई है। मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्टिंग सिस्टम (एमएमसीएफएस) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। दूसरी ओर, हिंद महासागर में वर्तमान में न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) की स्थिति बनी हुई है और मानसून के पूरे मौसम में इसके इसी स्थिति में बने रहने की संभावना है। इन दोनों समुद्री परिस्थितियों का मानसून पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।