पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रसार के कारण उत्तर भारत में बारिश-बर्फबारी, तेज हवाएं व वज्रपात के आसार।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित मैदानी इलाकों में 26-27 मार्च को हल्की से मध्यम बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं।
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में 26 से 29 मार्च तक लगातार बारिश, आंधी-तूफान व 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के आसार।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश की चेतावनी, जिससे फसलों को नुकसान व जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
तेज हवाओं, ओलावृष्टि और बारिश से फसलों, पेड़ों, बिजली की लाइनों व कमजोर मकानों को नुकसान, किसानों को सतर्क रहने की सलाह।
मार्च के अंतिम दिनों में देश के कई इलाकों में मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती प्रसार और तेज हवाओं को जिम्मेवार ठहराया है। मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, 26 मार्च 2026 को जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि इन मौसमीय गतिविधियों के कारण उत्तर भारत, पूर्वोत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत के कई राज्यों में बारिश-बर्फबारी, आंधी और गरज-चमक जारी रह सकती है।
उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?
पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में सक्रिय है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में एक ट्रफ भी बना हुआ है, जो मौसम को और अधिक अस्थिर बना रहा है। इसका सीधा असर जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों पर पड़ रहा है। इन राज्यों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, वज्रपात व बारिश होने तथा ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है।
इसके अलावा मैदानी इलाकों में भी उपरोक्त मौसमीय गतिविधियों का असर दिखाई देगा। इन राज्यों में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली शामिल हैं, जहां 26 और 27 मार्च को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। हवा की गति के 30 से 40 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने के आसार हैं। इससे तापमान में हल्की गिरावट महसूस हो सकती है और मौसम सुहावना भी हो सकता है, लेकिन तेज हवाओं के कारण कुछ नुकसान का भी अंदेशा जताया गया है।
वहीं आज, 26 मार्च 2026 को राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों और उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह का मौसम देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में भी हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार जताए गए हैं।
पूर्वोत्तर भारत में मौसम की स्थिति
पूर्वोत्तर भारत में मौसम काफी उग्र बना हुआ है। चक्रवाती प्रसार व उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम के कारण यहां पर तेज हवाओं के साथ बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले कुछ दिनों तक बारिश के दौरा के जारी रहने की संभावना है।
यहां हवा की रफ्तार के 30 से 50 किमी प्रति घंटा तक रह सकती है। इससे कुछ हिस्सों में पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
पूर्वी भारत में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?
विभाग की मानें तो पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश देखने को मिल रही है। खासकर उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बादल बरस सकते हैं। गर्मी से राहत के साथ-साथ यह बारिश खेती के लिए कुछ जगहों पर फायदेमंद हो सकती है, लेकिन ज्यादा पानी जमा होने से फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है।
मध्य भारत के मौसम का हाल
मौसम विभाग का कहना है कि मध्य भारत में भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं है। छत्तीसगढ़ और विदर्भ में हल्की बारिश और गरज-चमक के आसार बने हुए हैं। यहां भी तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे खेतों और पेड़ों को नुकसान हो सकता है। हालांकि यहां बारिश ज्यादा तेज नहीं होगी, लेकिन मौसम में बदलाव जरूर महसूस होगा।
पश्चिम भारत के मौसम का रुख
पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश हो सकती है। खासकर तटीय महाराष्ट्र के और अंदरूनी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। यह बदलाव अचानक हो सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
भारी बारिश, वज्रपात और ओलावृष्टि से नुकसान का अंदेशा
इस तरह के मौसम में कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं और बड़े पेड़ भी गिर सकते हैं। इससे बिजली और संचार लाइनों को नुकसान पहुंच सकता है।
खेतों में खड़ी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। खासकर केला और पपीता जैसी फसलें तेज हवा और ओलावृष्टि से ज्यादा प्रभावित होती हैं। ओले गिरने से इंसानों और जानवरों को भी चोट लग सकती है। कमजोर मकानों और झोपड़ियों को भी आंशिक नुकसान हो सकता है। खुले में रखी चीजें उड़ सकती हैं, इसलिए सावधानी रखना जरूरी है।
किसानों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने किसानों को इस समय खास सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि जो फसलें तैयार हो चुकी हैं, उन्हें जल्दी से काटकर सुरक्षित स्थान पर रख लेना चाहिए। खेतों में पानी जमा न हो, इसके लिए सही निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।
सब्जियों और पौधों की नर्सरी को प्लास्टिक या जाल से ढक देना चाहिए ताकि वे तेज बारिश और हवा से सुरक्षित रहें। बागानों में भी पेड़ों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम के इस बदलाव के साथ तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में पहले तापमान थोड़ा बढ़ेगा, फिर कुछ दिनों बाद गिरावट आएगी। मध्य और पूर्वी भारत में भी हल्की बढ़ोतरी के बाद तापमान स्थिर रहेगा। गुजरात में भी पहले तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन बाद में थोड़ी कमी आ सकती है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 25 मार्च, 2026 को महाराष्ट्र के अकोला में अधिकतम तापमान 40.7 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गर्म और उमस भरा मौसम
देश के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम भी बना हुआ है। खासकर केरल और कोंकण के इलाकों में लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। यह मौसम शरीर को थका सकता है, इसलिए लोगों को पानी ज्यादा पीना चाहिए और धूप से बचना चाहिए।
कुल मिलाकर, देश के कई हिस्सों में इस समय मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। कहीं बारिश हो रही है, कहीं तेज हवाएं चल रही हैं और कहीं तापमान में बदलाव हो रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहना जरूरी है।
खासकर किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। आम लोगों को भी खराब मौसम के दौरान बाहर निकलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। मौसम में यह बदलाव कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, इसलिए समय-समय पर मौसम की जानकारी लेते रहना जरूरी है।