दो पश्चिमी विक्षोभों के असर से 26 से 28 मार्च के आसपास उत्तर भारत में बारिश- बर्फबारी, आंधी और वज्रपात के आसार
पूर्वोत्तर राज्यों में चक्रवाती प्रसार व जेट स्ट्रीम के कारण कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं
मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका
देश के कई हिस्सों में तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा, जबकि पूर्वी भारत में बाद में हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है
केरल, कोंकण और गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी और थकान महसूस होगी
भारत के अलग-अलग इलाकों में विभिन्न मौसमीय प्रणालियों की वजह से बारिश, आंधी और तापमान में बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के द्वारा आज, सुबह 25 मार्च, 2026 को जारी अपडेट में कहा गया है कि मौसम में बदलाव के पीछे मुख्य रूप से हवा के ऊपरी हिस्सों में बने चक्रवाती प्रसार, जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ जिम्मेवार हैं। इन मौसम प्रणालियों का असर देश के उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण सभी भागों में दिखाई देगा।
पूर्वोत्तर भारत में मौसम
चक्रवाती प्रसार व पूर्वोत्तर भारत के ऊपर चल रही उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम की वजह से पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मौसम अधिक सक्रिय बना हुआ है। यहां आज, गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने का अंदेशा जताया गया है। इन राज्यों के कुछ हिस्सों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं जिनकी गति 30 से 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
वहीं आज, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी गरज के साथ बारिश देखने को मिल सकती है। इस कारण लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि अचानक मौसम बदल सकता है।
पश्चिम और मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?
मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं है। यहां हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि यह बारिश बहुत ज्यादा नहीं होगी, लेकिन कुछ हिस्सों में बिजली गिरने का अंदेशा बना रहेगा। इसलिए खेतों में काम कर रहे लोगों और खुले में रहने वालों को सतर्क रहना चाहिए। इन क्षेत्रों में मौसम थोड़े समय के लिए ही प्रभावित रहेगा।
दक्षिण भारत में मौसम का रुख
दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। यहां पर गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवाओं की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
यह स्थिति खासकर उन इलाकों में अधिक असर डाल सकती है जहां पहले से गर्मी बढ़ रही है। अचानक आने वाली बारिश से थोड़ी राहत भी मिल सकती है, लेकिन बिजली और तेज हवा से नुकसान के आसार भी बने हुए हैं।
उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज
उत्तर भारत में मौसम पर दो पश्चिमी विक्षोभों का असर देखने को मिलेगा। पहला विक्षोभ 26 मार्च से सक्रिय होगा और दूसरा 28 मार्च की रात से प्रभाव दिखाएगा। इसके कारण जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले हिस्सों में बर्फबारी हो सकती है।
इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी 26 मार्च को हल्की बारिश और आंधी चलने की आशंका जताई गई है। उत्तर प्रदेश में 27 मार्च को मौसम बदल सकता है। इन क्षेत्रों में तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। उत्तर भारत में अधिकतम तापमान दो से चार डिग्री तक बढ़ सकता है। मध्य भारत में दो से तीन डिग्री की वृद्धि हो सकती है।
पूर्वी भारत में तापमान तीन से पांच डिग्री तक बढ़ने के आसार हैं, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट भी आ सकती है। पश्चिम भारत में भी तापमान बढ़ेगा, लेकिन बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होगा। देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 24 मार्च, 2026 को महाराष्ट्र के अमरावती और वर्धा में अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के गुरदासपुर और उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद में न्यूनतम तापमान 14.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कहां रहेगा गर्म और उमस भरा मौसम?
बढ़ते तापमान के चलते केरल, कोंकण और गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा। यहां लोगों को ज्यादा गर्मी और चिपचिपाहट महसूस हो सकती है। इस तरह के मौसम में शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी हो सकती है। इसलिए लोगों को ज्यादा पानी पीना चाहिए और धूप में कम निकलना चाहिए।
किसानों के लिए सलाह
मौसम में इस बदलाव का असर खेती पर भी पड़ सकता है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें अपनी उपज को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए या उसे ढककर रखना चाहिए। तेज हवा के कारण फसल उड़ सकती है या खराब हो सकती है। छोटे पौधों और फलदार पेड़ों को सहारा देना जरूरी है ताकि वे गिरें नहीं। कोंकण क्षेत्र में आम और काजू के पेड़ों को नियमित पानी देना चाहिए ताकि फल खराब न हों। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए सूखी घास या पत्तियों का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो देश के अलग-अलग इलाकों में मौसम का मिजाज बदलता हुआ नजर आ रहा है। कहीं बारिश और आंधी है तो कहीं तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को सावधान रहने और मौसम की जानकारी पर ध्यान देने की जरूरत है। किसानों के लिए यह समय और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही से नुकसान हो सकता है। सही तैयारी और सावधानी से इस बदलते मौसम का सामना आसानी से किया जा सकता है।