हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 2-3 मार्च को 20-30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार।
उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से 4 से 7 डिग्री अधिक रहने के आसार, मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी।
4 मार्च से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, जम्मू-कश्मीर में 4 से 7 मार्च के बीच हल्की बारिश या बर्फबारी संभव।
गुजरात और कोंकण-गोवा में 4 से 7 मार्च के दौरान गर्म और उमस भरा मौसम रहने की चेतावनी जारी।
मौसम में बदलाव के बीच किसानों को सिंचाई, नमी संरक्षण और फसलों को सहारा देने की सलाह।
मार्च 2026 के शुरुआती दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर ऊंचाई पर तेज हवाओं वाली एक प्रणाली सक्रिय है। साथ ही आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी और कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, दो मार्च, 2026 को जारी बुलेटिन के मुताबिक, इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर लगभग 12.6 किमी की ऊंचाई पर 120 नॉट की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं। इसे उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम कहा जाता है। यह ऊपरी हवा की धारा मौसम को प्रभावित करती है और तापमान में बदलाव ला सकती है।
इसकी वजह से दो और तीन मार्च को हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
वहीं चार मार्च, 2026 की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी इलाकों के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके कारण जम्मू और कश्मीर में चार से सात मार्च के बीच हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। बारिश और बर्फबारी से पहाड़ी इलाकों में तापमान में गिरावट आ सकती है।
तापमान में बढ़ोतरी के आसार
विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होगी। उत्तर-पश्चिम भारत की बात करें तो यहां अगले पांच दिनों में तापमान तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगभग दो डिग्री की बढ़ोतरी होगी। कई इलाकों में तापमान सामान्य से चार से सात डिग्री तक अधिक रहने का अंदेशा जताया गया है।
वहीं मध्य भारत में अगले पांच दिनों में तापमान दो से चार डिग्री तक बढ़ सकता है। पूर्वी भारत में अगले चार से पांच दिनों तक तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। उसके बाद दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।
महाराष्ट्र में अगले दो दिनों तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। इसके बाद तीन से चार डिग्री की बढ़ोतरी होने के आसार हैं। गुजरात में अगले चार दिनों में तापमान तीन से पांच डिग्री तक बढ़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पूर्व भारत में अगले चार दिनों में तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ सकता है। जबकि भारत के उत्तर प्रायद्वीप में अगले तीन दिनों तक कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। उसके बाद तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ सकता है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, एक मार्च, 2026 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के अमृतसर में न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गर्म और उमस भरा मौसम
चार और पांच मार्च को कोंकण और गोवा में तथा चार से सात मार्च के बीच गुजरात के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे मौसम में लोगों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए और धूप में अधिक समय तक रहने से बचना चाहिए।
पिछले 24 घंटों में कहां और कितने बरसे बादल?
पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय के कई इलाकों में बारिश हुई। वहीं, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कुछ जगहों पर बारिश दर्ज की गई है। जबकि देश के बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में 1 सेमी और असम के तेजपुर में भी 1 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसमी बदलाव को देखते हुए विभाग की किसानों के लिए अहम सलाह
जम्मू और कश्मीर के किसानों को कहा गया है कि वे गेहूं, सरसों और सब्जियों में हल्की सिंचाई करें। मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें।
हिमाचल प्रदेश में भी गेहूं और शुरुआती सब्जियों में सुरक्षा सिंचाई करने का सुझाव दिया गया है। पॉलीहाउस में उगाई जा रही शिमला मिर्च और टमाटर में उचित वेंटिलेशन रखने की बात कही गई है।
पंजाब के किसानों को सलाह दी गई है कि वे सरसों, गोभी और आलू में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई करते रहें। हरियाणा में फूल और फली बनने की अवस्था में सरसों और चना में हल्की सिंचाई करने का सुझाव दिया गया है।
उत्तराखंड में गेहूं, मसूर, चना और सरसों में हल्की और बार-बार सिंचाई करने का सुझाव है। गेहूं में फूल और दाना भरने की अवस्था तथा सरसों और चना में फली बनने के समय विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं, सरसों, चना, आलू और जल्दी बोई गई गन्ने की फसल में हल्की और नियमित सिंचाई करने की सलाह दी गई है। राजस्थान में जीरा, इसबगोल, सरसों और चना में सिंचाई करने को कहा गया है।
इसके अलावा भी खेती के लिए सुझाव दिए गए हैं, जिसमें मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग का उपयोग करना। खेतों में मेड़बंदी सही रखना ताकि पानी का संरक्षण हो सके। अनावश्यक गुड़ाई से बचने की भी सलाह दी गई है, इससे मिट्टी की नमी कम हो सकती है। तेज हवाओं से बचाव के लिए सब्जियों और फलदार पौधों को सहारा दें। बागवानी फसलों को बाहरी सहारा दें ताकि वे गिरने से बच सकें।
देश के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने के आसार हैं। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से काफी अधिक रह सकता है। वहीं, पश्चिमी हिमालयी इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी संभव है।