मलक्का जलडमरूमध्य में बना गहरा दबाव आज , 26 नवंबर तक चक्रवात ‘सेंयार’ में बदल सकता है। फोटो साभार: विंडी
मौसम

चक्रवात ‘सेंयार’ की आहट: तमिलनाडु, केरल, अंडमान-निकोबार में भारी बारिश की चेतावनी

मलक्का जलडमरूमध्य में बना गहरा दबाव चक्रवात ‘सेंयार’ में बदलने के आसार, दक्षिण भारत और अंडमान-निकोबार में भारी बारिश अलर्ट।

Dayanidhi

  • मलक्का जलडमरूमध्य में बना गहरा दबाव आज , 26 नवंबर तक चक्रवात ‘सेंयार’ में बदल सकता है।

  • अंडमान-निकोबार में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी।

  • तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में लगातार बारिश और गरज-चमक का अनुमान।

  • तमिलनाडु के कई जिलों में बारिश से जलभराव, मंगलवार को स्कूल-कॉलेज बंद रहे।

  • बंगाल की खाड़ी में दो सक्रिय मौसम प्रणालियां, समुद्री गतिविधियों और तटीय क्षेत्रों के लिए सतर्कता आवश्यक।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज सुबह, 26 नवंबर, 2025 को जारी अपने ताजा अपडेट में कहा है कि सामुद्रिक इलाकों में सक्रिय दो अलग-अलग मौसमी गतिविधियां आने वाले दिनों में देश के दक्षिणी हिस्सों के मौसम को काफी प्रभावित कर सकते हैं।

मलक्का जलडमरूमध्य और इसके आसपास बने एक गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के आज, 26 नवंबर को चक्रवात में बदलने की आशंका है। यदि यह चक्रवात बनता है, तो इसका नाम ‘सेंयार’ रखा जाएगा, जिसका अर्थ है ‘शेर’। यह नाम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ओर से सुझाया गया है, जो उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामों में भाग लेने वाले 13 देशों में से एक है।

सामान्य तौर पर नवंबर का महीना बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है और इस साल भी वही परिस्थितियां बनती दिख रही हैं। इस समय दो मुख्य मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं- पहली, मलक्का जलडमरूमध्य में बना गहरा दबाव और दूसरी, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी एवं दक्षिण श्रीलंका के पास बना कम दबाव का क्षेत्र। इनमें से मलक्का क्षेत्र वाला तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है और 26 नवंबर की सुबह तक चक्रवात ‘सेंयार’ का रूप ले सकता है।

मलक्का जलडमरूमध्य से उठ सकता है चक्रवात

मौसम विभाग ने अपने ताजा अपडेट में कहा है कि मलक्का जलडमरूमध्य के ऊपर बना गहरा दबाव पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी गति और संरचना को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि यह धीरे-धीरे तीव्र होकर एक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इस दौरान 60 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करेंगी और तटीय इलाकों में चेतावनी की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

मलक्का जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, क्योंकि यह अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ता है। इस क्षेत्र में बनने वाले दबाव तंत्र अक्सर बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते हैं और भारत के पूर्वी तट तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष प्रभाव डालते हैं।

अंडमान-निकोबार में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने 26 और 27 नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहां तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और समुद्र में उथल-पुथल की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है और लोगों को सतर्क रहने का अनुरोध किया है। 28 नवंबर से बारिश में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है, लेकिन तब तक मौसम काफी अस्थिर रहेगा।

दूसरी प्रणाली: तमिलनाडु और दक्षिण भारत में भी भारी बारिश

बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में और दक्षिण श्रीलंका के पास एक अन्य कम दबाव का क्षेत्र भी सक्रिय है। मौसम विभाग का कहना है कि यह प्रणाली भी आगे चलकर डिप्रेशन में तब्दील हो सकती है और इससे दक्षिण भारत के मौसम पर सीधा असर पड़ेगा। इस कारण तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है और आने वाले दिनों में इसकी तीव्रता बढ़ सकती है।

तमिलनाडु के कई जिलों, खासकर तटीय इलाकों जैसे तूतीकोरिन में भारी बारिश हुई, जिसके कारण कई जगहों पर जलभराव हो गया। सड़कें डूब गई और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। इसी को देखते हुए कई जिलों में मंगलवार को स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए।

मौसम विभाग ने अपने राष्ट्रीय मौसम बुलेटिन में कहा है कि आज, 26 नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीपों के कई इलाकों में गरज के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने तथा वज्रपात का अंदेशा जताया गया है। वहीं केरल और माहे में भी गरज के साथ बादलों के जमकर बरसने के आसार हैं।

चक्रवात का प्रभाव और तैयारी

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि चक्रवात ‘सेंयार’ कितना शक्तिशाली होगा या यह किस दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह बंगाल की खाड़ी में अपनी ताकत बढ़ा सकता है। यदि यह चक्रवात तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ता है, तो भारी बारिश, तूफानी हवाएं और समुद्री उफान जैसे खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं।

स्थानीय प्रशासन ने बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के ताजा अपडेट का पालन करने की सलाह दी गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने और अपनी नावों को सुरक्षित स्थानों पर बांधने की हिदायत दी गई है।

दक्षिण भारत और अंडमान-निकोबार में मौसम तेजी से बदल रहा है और कई क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी है। मलक्का जलडमरूमध्य में बन रहे चक्रवात ‘सेंयार’ पर मौसम विभाग की पैनी नजर बनी हुई है। आने वाले दो से तीन दिन बहुत अहम होंगे, क्योंकि इन्हीं दिनों में यह तय होगा कि यह प्रणाली कितनी मजबूत होती है और इसका वास्तविक प्रभाव किन क्षेत्रों पर पड़ेगा।

लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की घोषणाओं का पालन करें और मौसम से संबंधित ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखें।