फाइल फोटो: सीएसई 
जल

जलाशयों में घटने लगा पानी का स्तर, दक्षिण में 50 फीसदी से नीचे पहुंचा जलस्तर

भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण धीरे-धीरे कम हो रहा है

Raju Sajwan

भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण घटता जा रहा है। हालांकि कुल जल भंडारण अभी सामान्य से अधिक है, लेकिन जिस तेजी से भंडारण कम हो रहा है, उससे स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। कुछ राज्यों और नदी बेसिनों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से कम हो गया है।

दरअसल इस वर्ष की शुरुआत से अब तक देश के कम से कम 70 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम या बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। इससे हालात काफी बिगड़ रहे हैं।

दक्षिण भारत और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के पांच मार्च 2026 को जारी साप्ताहिक बुलेटिन के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल 104.13 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है, जो कुल 183.565 अरब घन मीटर क्षमता का 56.73 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्तर पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक और सामान्य स्तर से 27 प्रतिशत ज्यादा है।

लेकिन कई जलाशयों में पानी सामान्य स्तर के मुकाबले काफी कम है।

दक्षिण भारत में दबाव

क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार दक्षिण भारत के 47 जलाशयों में कुल भंडारण 26.35 बीसीएम है, जो उनकी कुल क्षमता का लगभग 47.66 प्रतिशत है। यह देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है और गर्मी के मौसम में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण भारत में सिंचाई और पेयजल की मांग पहले से ही अधिक रहती है। ऐसे में यदि मानसून पूर्व वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कई क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

कुछ जलाशयों में भंडारण आधे से भी कम

बुलेटिन के अनुसार देश में कम से कम पांच जलाशयों में भंडारण सामान्य स्तर के 50 प्रतिशत से भी नीचे है। इनमें चंदन डैम (बिहार) में सबसे बुरे हालात है। यहां सामान्य के मुकाबले मात्र 15 प्रतिशत पानी बचा है।

झारखंड के देवघर की पहाड़ियों से निकलने वाली चंदन नदी पर 1962 में चंदन बांध बनाया गया था, जो बांका जिले की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। यह बांध बांका, बौसी, बाराहाट और धोरैया प्रखंडों के साथ-साथ भागलपुर जिले के कुछ हिस्सों में सिंचाई की सुविधा प्रदान करता है। यह बांध रबी और खरीफ की लगभग 80 हजार हेक्टेयर फसलों की सिंचाई करने की क्षमता रखता है।

ऐसे में जलाशय में पानी का स्तर सामान्य से बहुत कम होना आने वाले महीनों में रबी फसलों और गर्मी के मौसम की सिंचाई के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

इसके अलावा शोलायर (तमिलनाडु) में लगभग 31 प्रतिशत, वैगई (तमिलनाडु) में लगभग 38 प्रतिशत, खांडोंग (असम) में लगभग 43 प्रतिशत, तुइरियल (मिजोरम) में लगभग 46 प्रतिशत पानी बचा है।

कुछ नदी बेसिनों में भी कमी

बुलेटिन में बेसिन-वार विश्लेषण में बराक नदी बेसिन को “कमी” श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में जलाशयों का भंडारण सामान्य स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक कम है।

हालांकि अभी किसी भी नदी बेसिन को “अत्यधिक कमी” की श्रेणी में नहीं रखा गया है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में गिरता जल स्तर आने वाले महीनों के लिए चेतावनी संकेत माना जा रहा है।

मध्य भारत पर भी संकट

मध्य भारत के 28 जलाशयों में जल स्तर 48.588 अरब घन मीटर (बीसीएम) की कुल क्षमता के मुकाबले 30.121 बीसीएम यानी लगभग 62 प्रतिशत दर्ज किया गया। छत्तीसगढ़ के बांध 76 प्रतिशत तक भरे हुए थे, जबकि मध्य प्रदेश में जल भंडारण 64 प्रतिशत रहा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह स्तर क्रमशः 53 प्रतिशत और 50 प्रतिशत दर्ज किया गया।

पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में जल स्तर 38.094 बीसीएम की कुल क्षमता के मुकाबले 25.450 बीसीएम यानी लगभग 67 प्रतिशत रहा। गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों का स्तर 65 से 70 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया।

चूंकि मौसम विभाग ने अगले दो सप्ताह में किसी बड़ी बारिश का अनुमान नहीं जताया है, इसलिए जलाशयों में पानी का स्तर और घटने की आशंका है।

गर्मी के महीनों में बढ़ सकती है चुनौती

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 719 जिलों के आंकड़ों से पता चलता है कि उनमें से 91 प्रतिशत जिलों में 1 मार्च से अब तक बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। जनवरी-फरवरी के दौरान देश के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल भी वर्षा दर्ज नहीं की गई।

मार्च से जून के बीच जलाशयों का जल स्तर सामान्यतः तेजी से घटता है क्योंकि इस दौरान वर्षा बहुत कम होती है जबकि सिंचाई और पेयजल की मांग बढ़ जाती है।

ऐसे में जिन क्षेत्रों में अभी से जल स्तर कम है, वहां गर्मी के दौरान जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में पानी के उपयोग और वितरण की बेहतर योजना बनाना जरूरी होगा ताकि संभावित जल संकट से निपटा जा सके।