यह भीमताल झील है जो उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत झील है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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2050 तक झीलों के पारिस्थितिकी मूल्य में 20% तक गिरावट, प्रदूषण में दोगुनी वृद्धि व मीथेन उत्सर्जन बढ़ने की आशंका

विश्व झील दिवस 2026: दुनिया भर में 11.7 करोड़ झीलें, भूमि के चार फीसदी हिस्से पर फैली हैं, 90 फीसदी सतही ताजा या मीठा पानी, 85 फीसदी प्रजातियों की गिरावट।

Dayanidhi

  • हर साल 27 अगस्त को विश्व झील दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य झीलों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और टिकाऊ प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

  • दुनिया में 11.7 करोड़ से अधिक झीलें हैं, जो पृथ्वी की भूमि के लगभग चार प्रतिशत हिस्से पर फैली हैं।

  • झीलें पीने का पानी, खेती, मछली पालन, जैव विविधता, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मानी जाती हैं।

  • प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, पानी का अत्यधिक उपयोग, शहरीकरण और जैव विविधता का नुकसान झीलों के सामने बड़ी चुनौतियां बनकर उभरे हैं।

  • संयुक्त राष्ट्र ने 12 दिसंबर 2024 को प्रस्ताव 79/142 के तहत हर वर्ष 27 अगस्त को विश्व झील दिवस घोषित किया।

दुनिया भर में 27 अगस्त को विश्व झील दिवस मनाया जाता है। यह दिन झीलों के महत्व को समझने और उन्हें बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। साल 2026 में यह दिवस गुरुवार को मनाया जा रहा है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व झील दिवस का दूसरा वार्षिक आयोजन है।

झीलें केवल सुंदर प्राकृतिक स्थान नहीं हैं। वे इंसानों, पशुओं और पेड़-पौधों के जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं। झीलों से पीने का पानी, खेती के लिए पानी और मछली पालन जैसी कई जरूरतें पूरी होती हैं। इनके आसपास रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका भी झीलों पर निर्भर है।

संयुक्त राष्ट्र ने दी मान्यता

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 12 दिसंबर 2024 को प्रस्ताव ए/आरईएस/79/142 के जरिए हर साल 27 अगस्त को विश्व झील दिवस मनाने का फैसला किया। यह प्रस्ताव बिना मतदान के स्वीकार किया गया था। पहला विश्व झील दिवस 27 अगस्त 2025 को मनाया गया था।

इस दिन की तारीख का संबंध जापान के शिगा प्रांत से है। 27 अगस्त 1984 को शिगा में पहला विश्व झील सम्मेलन आयोजित किया गया था। शिगा प्रांत में जापान की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील बिवा स्थित है। इसी ऐतिहासिक सम्मेलन की याद में 27 अगस्त को विश्व झील दिवस के लिए चुना गया।

जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं झीलें

धरती पर 11.7 करोड़ से अधिक झीलें होने का अनुमान है। ये पृथ्वी की जमीन के लगभग चार प्रतिशत हिस्से पर फैली हैं। दुनिया का ज्यादातर मीठा पानी बर्फ और जमीन के नीचे मौजूद है, लेकिन जमी हुई सतह के बाहर उपलब्ध मीठे पानी का बड़ा हिस्सा झीलों में पाया जाता है। इसलिए झीलें साफ और सुरक्षित पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

झीलें जैव विविधता के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनमें मछलियों, पक्षियों, पौधों और दूसरे जलीय जीवों की कई प्रजातियां रहती हैं। इसके अलावा झीलें बाढ़ और सूखे के असर को कम करने में भी मदद कर सकती हैं। पर्यटन, मनोरंजन और स्थानीय संस्कृति में भी इनका खास स्थान है।

बढ़ता प्रदूषण बड़ी चिंता

आज दुनिया की कई झीलें गंभीर समस्याओं का सामना कर रही हैं। खेतों से बहकर आने वाले खाद और रसायन, गंदा पानी, प्लास्टिक और दूसरे कचरे से झीलों का पानी प्रदूषित हो रहा है। इससे पानी की गुणवत्ता खराब होती है और जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ता है।

शहरों और उद्योगों के तेजी से विस्तार ने भी झीलों पर दबाव बढ़ाया है। कई जगह प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बदल रहे हैं और झीलों में गंदा पानी पहुंच रहा है।

जलवायु परिवर्तन का असर

जलवायु परिवर्तन भी झीलों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। तापमान बढ़ने से पानी का वाष्पीकरण बढ़ सकता है। बारिश के बदलते तरीके और अधिक गर्मी, सूखा या अचानक आने वाली भारी बारिश झीलों के जल स्तर और उनके प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

झीलों से जरूरत से ज्यादा पानी निकालना भी एक गंभीर समस्या है। खेती, उद्योग और दूसरी जरूरतों के लिए लगातार पानी निकालने से झीलों का जल स्तर घट सकता है और उनका पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।

जैव विविधता बचाना जरूरी

मीठे पानी के जीवों की संख्या में पिछले 50 वर्षों में भारी गिरावट आई है। प्रदूषण, प्राकृतिक आवास का नुकसान और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। अगर झीलों की हालत खराब होती रही तो इसका असर केवल जलीय जीवों पर नहीं, बल्कि इंसानों की खाद्य सुरक्षा, रोजगार और पानी की उपलब्धता पर भी पड़ेगा।

विशेषज्ञों की चिंता है कि आने वाले वर्षों में झीलों पर बढ़ता दबाव उनके पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व को कम कर सकता है। प्रदूषण और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

संरक्षण में सबकी भूमिका

विश्व झील दिवस हमें याद दिलाता है कि झीलों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। आम लोग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। झीलों में कचरा नहीं डालना, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करना और पानी की बर्बादी रोकना छोटे लेकिन जरूरी कदम हैं।

सरकारों और स्थानीय संस्थाओं को झीलों की नियमित सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा पर ध्यान देना होगा। विकास योजनाओं में झीलों और उनके आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

विश्व झील दिवस 2026 का संदेश साफ है-झीलें बचेंगी तो पानी, प्रकृति और लोगों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। इसलिए आज झीलों की रक्षा के लिए उठाया गया हर कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य बनाने में मदद करेगा।