प्रतीकात्मक तस्वीर  - फोटो: फराज अहमद / सीएसई
जल

एनजीटी ने बेंगलुरु की चंदापुरा झील संरक्षण पर सख्त रुख अपनाया, दो अन्य मामलों पर जवाब तलब

एनजीटी में हरियाणा के कायमसर झील प्रदूषण और आगरा में जलाशय पर अतिक्रमण मामले की सुनवाई हुई

Susan Chacko

देश के विभिन्न हिस्सों में जल निकायों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और अतिक्रमण हटाने से जुड़े मामलों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है।

बेंगलुरु की चंदापुरा झील के कैचमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना पर पर्यावरणीय चिंता जताई गई है, वहीं हरियाणा के हांसी स्थित कायमसर झील में सीवेज और ठोस कचरे के बढ़ते दबाव को लेकर त्वरित सुधारात्मक कदम सुझाए गए हैं।

दूसरी ओर, आगरा में जलाशय पर अतिक्रमण के मामले में आदेशों के अनुपालन न होने पर अधिकरण ने प्रशासन से जवाब मांगा है।

चंदापुरा झील संरक्षण मामला

बेंगलुरु के अनेकल तालुक स्थित चंदापुरा झील के संरक्षण का मामला 18 मार्च 2026 को एनजीटी के समक्ष आया। आवेदक ने झील की लगातार बिगड़ती स्थिति और इसका प्रभाव डाउनस्ट्रीम जल निकायों मुत्तनल्लूर झील और बिदरगुप्पे झील पर पड़ने को लेकर चिंता जताई।

आवेदक ने "स्विफ्ट सिटी" परियोजना पर भी आपत्ति जताई, जो मुत्तनल्लूर झील के कैचमेंट क्षेत्र के 11 गांवों में प्रस्तावित है। इन गांवों की झीलें बिदरगुप्पे झील की सहायक जलधाराएं हैं, और इस परियोजना से प्रदूषण, जल संकट और पारिस्थितिक क्षति बढ़ने की आशंका है।

आवेदन में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड की इस परियोजना को रोकने और चंदापुरा–मुत्तनल्लूर–बिदरगुप्पे झीलों के कैचमेंट क्षेत्र की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई। साथ ही, परियोजना पर पुनर्विचार से पहले किसी स्वतंत्र मान्यता प्राप्त एजेंसी द्वारा व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराने की मांग भी की गई।

एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले को 30 मार्च 2026 को दक्षिणी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

कायमसर झील प्रदूषण मामला (हरियाणा)

हरियाणा के हांसी स्थित कायमसर झील में प्रदूषण को लेकर संयुक्त समिति की 19 मार्च 2026 की रिपोर्ट में गंभीर स्थिति उजागर करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदमों की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को तुरंत रोकने, सभी नालों की पहचान कर उन्हें नजदीकी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने, झील के आसपास ठोस कचरे की डंपिंग बंद करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार निपटान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

साथ ही झील के संवेदनशील हिस्सों में अवरोध लगाने, पुराने कचरे (लेगेसी वेस्ट) का आकलन कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों के तहत बायो-माइनिंग/बायो-रीमेडिएशन कराने, ड्रेनेज और सीवरेज की समुचित योजना बनाकर वर्षाजल और सीवेज को अलग करने तथा वैज्ञानिक पुनर्जीवन योजना लागू करने की आवश्यकता बताई गई है।

यह मामला शहर से निकलने वाले गंदे पानी और सीवेज के झील में डाले जाने से जुड़ा है, जिस पर एनजीटी ने 28 नवंबर 2025 को संयुक्त समिति गठित की थी। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1 अप्रैल 2020 से 3 मार्च 2026 तक 71 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है, लेकिन नगर परिषद, हांसी ने अभी तक यह राशि जमा नहीं की है, जबकि ड्रेनेज मैप, सीवेज और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी अभी लंबित है।

आगरा में जलाशय अतिक्रमण मामला

18 मार्च 2026 को एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के आगरा के जिलाधिकारी को जलाशय अतिक्रमण मामले में अदालत के आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को होगी।

आवेदक ने 17 जनवरी 2025 के आदेश के अनुपालन की मांग की थी। उनके वकील ने बताया कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एनजीटी ने अपने 17 जनवरी 2025 के आदेश में निर्देश दिया था कि:

  • जिलाधिकारी/कलेक्टर, आगरा राजस्व अभिलेखों के अनुसार तालाब की स्थिति और आकार को बनाए रखें

  • यदि कोई अतिक्रमण है, तो उसे हटाकर तालाब को मूल स्थिति में बहाल किया जाए

  • एक माह के भीतर कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए

हालांकि, अदालत को बताया गया कि जिलाधिकारी द्वारा अब तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।