भारत में जल संकट गहराता जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर एक सप्ताह में 3.50 अरब घन मीटर घट गया है।
दक्षिण भारत और मराठवाड़ा के जलाशयों में पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
गुजरात और मध्य भारत में भी जल भंडारण सामान्य स्तर से नीचे है।
देश के प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति एक सप्ताह के भीतर और बिगड़ गई है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 15 अक्टूबर 2026 को देश के 178 प्रमुख जलाशयों में 126.717 अरब घन मीटर पानी था, जो 22 अक्टूबर को घटकर 123.228 अरब घन मीटर रह गया। यानी सात दिन में 3.489 अरब घन मीटर पानी कम हो गया। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 184.762 अरब घन मीटर है। इसके मुकाबले अब केवल 66.70 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि 15 अक्टूबर को यह स्तर 68.58 प्रतिशत था।
दक्षिणी राज्यों में कई जलाशयों में 30 प्रतिशत से भी कम पानी
दक्षिण भारत के कई प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का एक-तिहाई या उससे भी कम पानी बचा है। दक्षिण भारत के पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के 50 प्रमुख जलाशयों में 22 अक्टूबर 2026 तक कुल 23.659 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो इनकी कुल 55.879 अरब घन मीटर भंडारण क्षमता का केवल 42.34 प्रतिशत है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर को इन जलाशयों में 24.760 अरब घन मीटर पानी था। इस तरह एक सप्ताह में 1.101 अरब घन मीटर पानी कम हो गया।
स्थिति की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि पिछले वर्ष की समान अवधि में इन जलाशयों में कुल क्षमता का 89.35 प्रतिशत पानी उपलब्ध था, जबकि इस वर्ष यह घटकर 42.34 प्रतिशत रह गया है। दस वर्षों के औसत पर आधारित सामान्य भंडारण के मुकाबले भी इस वर्ष पानी का स्तर काफी नीचे है। सामान्य भंडारण कुल क्षमता का 77.94 प्रतिशत था। यानी मौजूदा भंडारण सामान्य स्तर से 35.60 प्रतिशत कम है।
राज्यवार स्थिति देखें तो तमिलनाडु के कई जलाशयों में पानी का स्तर बेहद कम है। मेट्टूर बांध में उसकी कुल क्षमता का 21.19 प्रतिशत, वैगई में 24.42 प्रतिशत, लोअर भवानी में 27.78 प्रतिशत और शोलायर में 19.58 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। अलीयार जलाशय पूरी तरह खाली हो चुका है, जबकि करायर में 12.75 प्रतिशत और मणिमुथार में 19.87 प्रतिशत पानी था।
केरल में पेरियार जलाशय में क्षमता का 28.90 प्रतिशत और करापुझा में 48.61 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। तेलंगाना के नागार्जुन सागर में 29.68 प्रतिशत तथा श्रीराम सागर में 44.65 प्रतिशत पानी बचा है।
मराठवाड़ा में बिगड़ रहे हालात
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के कुछ प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। मांजरा बांध में उसकी कुल जीवित भंडारण क्षमता का केवल 7.74 प्रतिशत, लोअर दूधना में 15.97 प्रतिशत, लोअर तेरणा में 19.43 प्रतिशत और माजलगांव बांध में महज 23.21 प्रतिशत पानी बचा है। यानी इन चारों जलाशयों में एक-चौथाई से भी कम पानी उपलब्ध है।
पूरे महाराष्ट्र की स्थिति देखें तो 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले 38 प्रमुख जलाशयों में कुल 20.366 अरब घन मीटर की जीवित भंडारण क्षमता के मुकाबले लगभग 16.37 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध था। यानी जलाशय अपनी कुल क्षमता के लगभग 80.4 प्रतिशत भरे हुए थे, लेकिन 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर 2026 के बीच कुल भंडारण में 0.340 अरब घन मीटर की कमी आई और क्षमता के मुकाबले पानी का स्तर 82.05 प्रतिशत से गिरकर 80.38 प्रतिशत पर आ गया।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में सूखा घोषित कर चुकी है।
गुजरात में घटा जल भंडारण
गुजरात के कुछ जलाशयों में पानी का भंडार चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के 19 निगरानी वाले जलाशयों की कुल जीवित भंडारण क्षमता 18.013 अरब घन मीटर है। इनमें उपलब्ध पानी का कुल भंडार लगभग 13.939 अरब घन मीटर था। 15 से 22 अक्टूबर के बीच राज्य के जलाशयों में पानी 0.289 अरब घन मीटर (28.9 करोड़ घन मीटर) कम हुआ। एक सप्ताह पहले की तुलना में यह गिरावट दर्ज की गई।
भादर बांध में उसकी कुल जीवित भंडारण क्षमता का केवल 17.78 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि दांतीवाड़ा में 21.90 प्रतिशत और मच्छू-1 में 22.71 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। साबरमती बांध में भी भंडारण क्षमता का महज 47.35 प्रतिशत पानी रह गया है। वहीं, उकाई बांध में 74.82 प्रतिशत और कडाना बांध में 52.79 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। इसके विपरीत, शेत्रुंजी बांध पूरी तरह भरा हुआ है और सरदार सरोवर बांध में 99.44 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है। आंकड़े गुजरात के जलाशयों में पानी की उपलब्धता की असमान स्थिति दिखाते हैं।
देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में भी जलाशयों का भंडारण पिछले साल और कई जगह सामान्य स्तर से नीचे है। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर बांध में कुल जीवित भंडारण क्षमता का केवल 15.38 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि गांधी सागर में 66.76 प्रतिशत और बरना बांध में 65.98 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। राजस्थान के जवई बांध में क्षमता का महज 12.44 प्रतिशत पानी रह गया है। पश्चिम बंगाल के हिंगलो बांध में पानी उसकी सामान्य भंडारण मात्रा के केवल 10.66 प्रतिशत के बराबर है। बिहार के बदुआ और चंदन बांधों में भी पानी का भंडार सामान्य स्तर के आधे से कम है।