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संसद में आज: सरकार ने कहा- फसलों को अल-नीनो से खतरा, सचेत हैं हम

मानसून सत्र के चौथे दिन, 24 जुलाई 2026 को संसद के दोनों सदनों में सरकार के मंत्रियों ने स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, अनुसंधान और डिजिटल अवसंरचना सहित कई अहम मुद्दों पर सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए।

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • देश में एंटी-रेबीज वैक्सीन की राष्ट्रीय स्तर पर कोई कमी नहीं, स्थानीय स्तर की अस्थायी कमी से राज्य सरकारें प्रभावी ढंग से निपट रही हैं।

  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, माताओं और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा।

  • स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग का बजट 2014-15 की तुलना में पांच गुना से अधिक बढ़ाकर स्वास्थ्य अनुसंधान को मजबूत किया गया।

  • सरकार खरीफ फसलों, मानसून, अलनीनो और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की लगातार निगरानी कर कृषि सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

  • एआई आधारित डेटा सेंटरों में आधुनिक कूलिंग तकनीकों के उपयोग से पानी और ऊर्जा की बचत के साथ क्षमता में तेज वृद्धि हुई।

देश में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। देश में एंटी-रेबीज वैक्सीन को लेकर उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि देश में एंटी-रेबीज वैक्सीन की राष्ट्रीय स्तर पर कोई कमी नहीं है। हालांकि कुछ अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में कुछ समय के लिए वैक्सीन की कमी हो सकती है। इसका कारण वैक्सीन की अधिक मांग, खरीद में देरी या आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

नड्डा ने कहा कमी की स्थिति में संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें उपलब्ध वैक्सीन का पुनर्वितरण करती हैं। जरूरत पड़ने पर आपातकालीन खरीद भी की जाती है और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाया जाता है। सरकार का उद्देश्य लोगों को समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराना है।

देश में बच्चों के पोषण के लिए राष्ट्रीय योजनाएं

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय देश में बच्चों और महिलाओं के पोषण में सुधार के लिए कई योजनाएं चला रहा है। मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 शुरू किया है। इस मिशन में आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान और किशोरी बालिका योजना (14 से 18 वर्ष की किशोरियों के लिए, आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर राज्यों में) को एक साथ जोड़ा गया है।

ठाकुर ने बताया कि यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसकी जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। इस योजना का लाभ छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा पात्र किशोरियों को दिया जाता है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को कम करना और स्वस्थ भारत का निर्माण करना है।

स्वास्थ्य अनुसंधान पर सरकारी खर्च

स्वास्थ्य पर शोध को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को लगातार अधिक बजट दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में नई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिससे शोध कार्य को बढ़ावा मिल सके।

जाधव ने बताया कि डीएचआर का आवंटन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 0.012 प्रतिशत है। साल 2014-15 में विभाग का बजट 932 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में बढ़कर 4,821.21 करोड़ रुपये हो गया है। यह पाबच गुना से अधिक की वृद्धि है। सरकार का मानना है कि अधिक निवेश से स्वास्थ्य अनुसंधान मजबूत होगा और नई चिकित्सा तकनीकों का विकास होगा।

कर्नाटक में सागरमाला योजना

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय में मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय के अंतर्गत सागरमाला योजना देश के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के विकास के लिए चलाई जा रही है।

सोनोवाल ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने मंगलुरु से मरावंथे तक यात्री फेरी सेवा तथा उडुपी जिले के कोटा पडुकेरे में एकीकृत तटीय पर्यटन और मरीना विकास परियोजना के लिए प्रस्ताव भेजे थे। इन परियोजनाओं में समुद्री पर्यटन, जल क्रीड़ा और फेरी सेवाओं की संभावनाएं शामिल थीं। लेकिन वर्तमान सागरमाला योजना में वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण इन प्रस्तावों को आर्थिक सहायता नहीं दी जा सकी।

खरीफ फसलों पर मानसून में देरी का असर

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का लिखित उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय खरीफ सीजन की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। साल 2026-27 के लिए खरीफ फसलों की बुवाई अभी जारी है। इसलिए पहली अग्रिम उत्पादन अनुमान रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।

ठाकुर ने बताया कि मंत्रालय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीआरआर), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (सीआरआईडीए), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी), महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (एमएनसीएफसी), खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उर्वरक विभाग तथा राज्य सरकारों के साथ मिलकर मानसून और संभावित अल नीनो की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

खरीफ की तैयारी और अल नीनो से बचाव

सदन में उठे एक और प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि अल नीनो का असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। इसलिए समय रहते आवश्यक तैयारी की जा रही है। मौसम की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है और राज्यों के साथ मिलकर आवश्यक योजनाएं बनाई जा रही हैं।

ठाकुर ने बताया कि सरकार सभी संबंधित संस्थानों के साथ मिलकर खेती को सुरक्षित रखने और किसानों को सहायता देने के लिए लगातार काम कर रही है। इसका उद्देश्य फसल उत्पादन को नुकसान से बचाना और किसानों की आय की रक्षा करना है।

जलवायु परिवर्तन, मानसून और खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा को लेकर सदन में उठाए गए एक अन्य सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की अनिश्चितता का कृषि पर प्रभाव पड़ता है। जब पूरे देश में मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत या उससे अधिक कम होती है, तब खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में कमी देखने को मिल सकती है।

ठाकुर ने बताया कि साल 1982, 1987, 2002, 2004, 2009, 2014 और 2015 जैसे अल नीनो और सूखे वाले वर्षों में बारिश में 12 से 22 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के वर्षों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, सूखा सहन करने वाली फसल किस्मों का उपयोग, बेहतर मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह, पर्याप्त कृषि सामग्री और सरकारी योजनाओं के कारण इनका प्रभाव पहले की तुलना में कम हुआ है।

एआई आधारित डेटा सेंटर और पानी की खपत

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के जवाब में आज, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि भारत में डेटा सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं। ये मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे शहरों में स्थित हैं।

साल 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता 375 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 1575 मेगावाट हो गई है। एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए डेटा सेंटर नई तकनीकों जैसे डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, इमर्शन कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग का उपयोग कर रहे हैं। इन तकनीकों से पानी की खपत कम होती है, ऊर्जा की बचत होती है और डेटा सेंटर अधिक कुशल बनते हैं।