भोपाल की शाहपुरा झील की सीमाएं तय करने में हो रही देरी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।
ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर झील के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन की पहचान कर सीमांकन पूरा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, स्पष्ट किया है कि अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय आपसी समन्वय से काम करें।
5 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस बात पर हैरानी जताई कि कोलार के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को सीमांकन की प्रगति की पूरी जानकारी नहीं थी। भोपाल नगर निगम ने भी अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया था।
ट्रिब्यूनल ने निगम को 30 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले कम्प्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
सीमांकन पूरा होने के बाद झील के आसपास एफटीएल और बफर जोन में हुए अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू करनी होगी। मध्य प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार, भोपाल के शाहपुरा गांव में स्थित यह झील 47.22 हेक्टेयर में फैली है।
झील की सीमाएं तय करना उसके संरक्षण और अतिक्रमण की पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी कर पाते हैं या नहीं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शाहपुरा झील के संरक्षण और उसके आसपास अतिक्रमण का मामला एक बार फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने पहुंचा है।
झील की वास्तविक सीमाएं तय करने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन की पहचान कर सीमांकन पूरा करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी की सेंट्रल बेंच ने 5 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाय संबंधित विभागों को आपस में मिलकर काम करना होगा। एनजीटी ने कहा कि झील की सीमाएं तय करने में अनावश्यक देरी से अदालत का समय बर्बाद हो रहा है।
इस मामले में 2 सितंबर 2026 को जारी पिछले आदेश का पालन करते हुए कोलार के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सुनवाई में उपस्थित हुए। उनका कहना था कि जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) से रिकॉर्ड भोपाल नगर निगम (बीएमसी) को सौंपे जा चुके हैं। झील के फुल टैंक लेवल और अन्य मापों को अंतिम रूप देने के लिए इन रिकॉर्ड की जरूरत है।
हालांकि, न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह की पीठ ने इस पर हैरानी जताई कि कोलार के एसडीएम को झील के सीमांकन और बफर जोन की पहचान के संबंध में हुई प्रगति की जानकारी तक नहीं थी। इससे जाहिर हुआ कि अधिकारी जरूरी जानकारी के बिना ही सुनवाई में पहुंचे थे।
ट्रिब्यूनल ने यह भी गौर किया कि भोपाल नगर निगम ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। उसने निगम को अगली सुनवाई, 30 अक्टूबर 2026 से पहले कम्प्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी ने याद दिलाया कि इस मामले को सुलझाने के लिए पहले ही एक समिति गठित की जा चुकी है। इसके बावजूद सीमांकन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर अधिकरण ने कोलार के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम को समिति के साथ समन्वय कर काम पूरा करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ने स्पष्ट कहा कि संबंधित अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने और न्यायाधिकरण का समय बर्बाद करने के बजाय 10 दिनों के भीतर शाहपुरा झील की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया हर हाल में पूरी करें। सीमांकन पूरा होने के बाद कोलार के एसडीएम को झील के फुल टैंक लेवल और बफर जोन में हुए अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश अदालत ने दिया है।
मध्य प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने 21 अगस्त 2026 को एक पत्र के जरिए शाहपुरा झील से जुड़ी जानकारी साझा की थी। इसके अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) की परियोजना के तहत तैयार आर्द्रभूमि सूची में मध्य प्रदेश की कुल 13,565 आर्द्रभूमियों का मानचित्रण किया गया है।
इस सूची में भोपाल की शाहपुरा झील को एमपी002153 पहचान संख्या दी गई है। रिकार्ड्स के मुताबिक, झील का क्षेत्रफल 47.2205 हेक्टेयर है। यह भोपाल जिले की कोलार तहसील के शाहपुरा गांव में स्थित है।
गौरतलब है कि झील की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण उसके संरक्षण और आसपास के अतिक्रमण की पहचान के लिए बेहद अहम है। अब एनजीटी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों के सामने तय समयसीमा में यह काम पूरा करने की जिम्मेदारी है। ऐसे में अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अधिकारियों ने सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की दिशा में कितनी प्रगति की है।