नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी बॉम्बे और एनआईएसईआर भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों के सहयोग से ऐसी नई सामग्री विकसित की है, जो पराबैंगनी (यूवी) रोशनी के संपर्क में आने पर अलग-अलग रंगों का प्रकाश उत्सर्जित कर सकती है। ये सामग्रियां तापमान और नमी में बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया देती हैं। इनका इस्तेमाल सुरक्षा प्रणालियों, सेंसर और प्रकाश तकनीकों में किया जा सकता है।
इस शोध में वैज्ञानिकों ने सीसा आधारित प्रकाश उत्सर्जक सामग्रियों के सुरक्षित विकल्प के रूप में बिस्मथ आधारित यौगिकों का अध्ययन किया। सीसा आधारित सामग्रियों का उनके प्रकाश उत्सर्जन गुणों के कारण व्यापक अध्ययन किया जाता है, लेकिन सीसे की विषाक्तता से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
प्रकाश उत्पन्न करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई सामग्रियों में सीसा होता है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इसका सुरक्षित विकल्प तलाशने के लिए शोधकर्ताओं ने बिस्मथ आधारित यौगिकों की जांच की। इन यौगिकों में कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों तरह के घटक होते हैं। इनमें सीसे का इस्तेमाल किए बिना उपयोगी प्रकाश उत्सर्जक गुण हो सकते हैं।
इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री सी में प्रकाशित हुए हैं। शोधपत्र के सह-लेखकों में एनआईटी राउरकेला के रसायन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सरोज एल. सामल और उनके शोधार्थी सुभाषिष साहू शामिल हैं। इनके अलावा आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. परमेश्वर के. अय्यर और चकाली श्रीनिवास, आईआईटी बॉम्बे के रजनिकांत राणा तथा एनआईएसईआर भुवनेश्वर के प्रो. हिमांशु एस. बिस्वाल और लक्ष्मीप्रिया दाश ने भी इस शोध में योगदान दिया है।
शोधकर्ताओं द्वारा विकसित बिस्मथ आधारित सामग्री तापमान और नमी में बदलाव के प्रति खास प्रतिक्रिया देती है। गर्म करने पर इसकी संरचना में मौजूद पानी बाहर निकल जाता है। इस बदलाव के कारण यूवी रोशनी पड़ने पर यह सामग्री नीली रोशनी उत्सर्जित करने लगती है। जब वातावरण में नमी लौटती है, तो सामग्री दोबारा पानी सोख लेती है और नीली रोशनी का उत्सर्जन बंद हो जाता है।
आसपास की परिस्थितियों में बदलाव करके इस प्रक्रिया को उलटा भी किया जा सकता है। यानी तापमान और नमी को नियंत्रित करके सामग्री से होने वाले प्रकाश उत्सर्जन को चालू या बंद किया जा सकता है। इससे ऐसी नई तकनीकों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिनमें पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर संकेत देने वाली सामग्रियों की जरूरत होती है।
एनआईटी राउरकेला के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सरोज एल. सामल के मुताबिक, बिस्मथ आधारित इस सामग्री को सस्ते और पर्यावरण अनुकूल घटकों से सरल तकनीक के जरिए तैयार किया गया है। इसकी खासियत है कि तापमान और नमी में बदलाव के साथ इसकी संरचना और प्रकाश उत्सर्जन के गुण बदलते हैं और यह प्रक्रिया उलटी भी की जा सकती है।
इस सामग्री का इस्तेमाल दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों और सुरक्षा लेबल पर विशेष स्याही के रूप में किया जा सकता है, जिससे नकली उत्पादों की पहचान में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, नमी सेंसर, खाद्य पैकेजिंग और प्रकाश तकनीकों में भी इसकी उपयोगिता हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने सीसा-मुक्त एलईडी भी विकसित की है, जो यूवी रोशनी में पीला प्रकाश उत्सर्जित करती है। नीला प्रकाश देने वाली व्यावसायिक सामग्री के साथ मिलाकर इससे सफेद एलईडी बनाई गई, जिसने लगातार काम करने के दौरान स्थिर प्रकाश दिया।
प्रो. सामल के अनुसार, यह सामग्री नमी की पहचान, प्रकाश तकनीक और नकली उत्पादों की रोकथाम में उपयोगी हो सकती है। अब शोधकर्ता इसकी प्रकाश उत्सर्जन क्षमता, दीर्घकालिक स्थिरता और सेंसर की विश्वसनीयता बढ़ाने पर काम करेंगे।