भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के शोधकर्ताओं ने एक विशेष कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित मंच विकसित किया है। यह मंच इलेक्ट्रिक वाहनों, एयरोस्पेस, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री बुनियादी ढांचे समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले मटीरियल की खोज में तेजी ला सकता है।
आईआईटी मद्रास के धातुकर्म और मटीरियल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित बत्रा ने बताया, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता नए मटीरियल की खोज के हमारे तरीकों में बड़ा बदलाव ला रही है। अब हजारों शोधपत्रों से मैन्युअल रूप से आंकड़े जुटाने में वर्षों का समय नहीं लगेगा।” उनके अनुसार, विकसित किया गया ढांचा अपने आप संरचित डेटाबेस तैयार करता है, जिससे टिकाऊ मटीरियल की पहचान तेजी से की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मटीरियल के प्रदर्शन को पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के साथ जोड़कर यह मंच शोधकर्ताओं को ऐसे मिश्रधातु विकसित करने में मदद कर सकता है, जो तकनीकी प्रदर्शन के साथ-साथ टिकाऊ भविष्य के लिहाज से भी बेहतर हों।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस मंच के जरिये तैयार किए गए दो बड़े डेटाबेस में 1.85 लाख से अधिक संरचित रिकॉर्ड हैं। इनमें उन्नत बहु-घटक मिश्रधातुओं से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल है। डेटाबेस तैयार करते समय पर्यावरण, आर्थिक और सामाजिक मानकों से जुड़े टिकाऊपन संकेतकों को भी ध्यान में रखा गया है। इसका उद्देश्य कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली उन्नत मिश्रधातुओं की पहचान करना है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक एआई आधारित मटीरियल डेटाबेस आम तौर पर 25 से कम मटीरियल गुणों की जानकारी तक सीमित रहे हैं। इसके मुकाबले आईआईटी मद्रास का विकसित ढांचा 350 से अधिक अलग-अलग मटीरियल गुणों की जानकारी हासिल कर सकता है। यह प्रत्येक माप के साथ संबंधित प्रसंस्करण और परीक्षण परिस्थितियों को भी दर्ज करता है। इससे अलग-अलग अध्ययनों से प्राप्त आंकड़ों की अधिक सटीक वैज्ञानिक तुलना संभव होती है और एआई आधारित मटीरियल डिजाइन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने 10 हजार से अधिक शोधपत्रों का अध्ययन कर उन्नत धातु मिश्रधातुओं का एक बड़ा डेटाबेस तैयार किया है। उनका कहना है कि इस एआई आधारित ढांचे की मदद से वैज्ञानिक और निर्माता ऐसे मटीरियल की जल्द पहचान कर सकेंगे, जिनमें बेहतर प्रदर्शन के साथ पर्यावरणीय टिकाऊपन के गुण भी हों। डेटाबेस और इससे संबंधित सॉफ्टवेयर एलॉय गिटहब पर उपलब्ध हैं, जिससे दुनिया भर के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योगों को मटीरियल नवाचार में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस तकनीक से अगली पीढ़ी के इंजीनियरिंग मटीरियल की खोज में लगने वाले समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। शोधकर्ता, स्टार्टअप और विनिर्माण कंपनियां महंगे प्रयोगों को बार-बार दोहराने से बच सकती हैं। इससे स्वच्छ उत्पादन की दिशा में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा महत्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास को गति देने में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रयोगों से हासिल महत्वपूर्ण आंकड़े अक्सर हजारों शोधपत्रों के पाठ, तालिकाओं और आंकड़ों में बिखरे रह जाते हैं। इससे उपलब्ध जानकारी का दोबारा इस्तेमाल करना और अलग-अलग मटीरियल की व्यवस्थित तुलना करना मुश्किल हो जाता है। इस जानकारी को मैन्युअल रूप से निकालने में काफी समय और मेहनत लगती है और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी बनी रहती है।
डॉ. बत्रा ने बताया कि इसी चुनौती को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक स्वचालित एआई पाइपलाइन विकसित की है। यह वैज्ञानिक शोधपत्रों का विश्लेषण कर मिश्रधातु की संरचना, निर्माण प्रक्रिया और परीक्षण की परिस्थितियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी निकाल सकती है। इससे शोधपत्रों में बिखरी जानकारी को एक संरचित रूप में लाकर मटीरियल अनुसंधान के लिए इस्तेमाल करना आसान हो जाता है।
यह शोध ‘एडवांस्ड साइंस’ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में आईआईटी मद्रास के डॉ. रोहित बत्रा के साथ शोधार्थी अरविंदन कमाची सुंदरम, मोहित चक्रवर्ती, साई मणि कुमार देवथी और बी. पवित्रमोहन शामिल रहे।