देश में एक ऐसा भी जिला है, जहां पूरे मानसून सीजन के दौरान बारिश की एक भी बूंद नहीं गिरी! इस रहस्यमयी जिले का नाम है दिबांग घाटी। अरुणाचल प्रदेश का इस जिले की उत्तर व पूर्वी सीमाएं तिब्बत से लगती अंतर्राष्टीय सीमा से जुड़ी हैं।
देश के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से लेकर 19 जुलाई के बीच दिबांग घाटी में सामान्य तौर पर 631.7 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन चालू वर्ष यानी 1 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच यहां शून्य बारिश रिकॉर्ड की गई है।
आईएमडी के मुताबिक देश के 741 जिलों में से दिबांग घाटी अकेला ऐसा जिला है, जहां शून्य बारिश रिकॉर्ड हुई है।
मानसून के दौरान लगभग 50 दिन तक किसी भी जिले में एक भी बूंद बारिश न होने की यह अप्रत्याशित घटना है। दो अन्य जिलों बिश्वनाथ और साउथ सलमारा में भी बारिश के आंकड़े नहीं दिए गए हैं, लेकिन उनके आगे एनडी यानी नो डाटा लिखा गया है। इसका अर्थ है कि वहां के आंकड़े उपलब्ध नहीं है। परंतु आईएमडी की वेबसाइट पर दिबांग घाटी के एनआर यानी नो रेन लिखा गया है।
इस रहस्य को सुलझाने के लिए डाउन टू अर्थ ने दिबांग घाटी के कई अधिकारियों से बात की। उन्होंने क्या बताया, इससे पहले यह जानते हैं कि आखिर दिबांग घाटी कैसी है?
दिबांग घाटी जिले का नाम दिबांग नदी के नाम पर पड़ा है। यह नदी जिले से होकर बहती है और अंततः मैदानी क्षेत्र में पहुंचकर सादिया के निकट लोहित नदी से मिल जाती है। दिबांग नदी की प्रमुख सहायक नदियां द्री, माथुन, तालोन, एमे, आही , एमरा और आवा हैं।
यह जिला ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा एक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र है, जिसकी भौगोलिक संरचना अत्यंत विशिष्ट और विविधतापूर्ण है। जिले की उत्तरी-पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी सीमाएं तिब्बत (चीन) के साथ लगती हैं। इसके दक्षिण में लोअर दिबांग वैली जिला तथा दक्षिण-पश्चिम में अपर सियांग जिला स्थित है।
इतने खूबसूरत जिले में बारिश का न होना चिंता में तो डालता ही है। यही जानने के लिए डाउन टू अर्थ ने दिबांग घाटी के जिला कृषि विज्ञान केंद्र को फोन किया। वहां से जवाब मिला कि घाटी में बारिश कम तो हो रही है, लेकिन बिल्कुल नहीं हो रही है। यह कहना गलत है। दिबांग घाटी में बारिश हो रही है। तब फिर मौसम विभाग की वेबसाइट पर बारिश शून्य क्यों दिखाई जा रही हैै, इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्र की महिला अधिकारी ने कुछ भी बताने में असमर्थतता जताई।
इसके बाद डाउन टू अर्थ ने मौसम विज्ञान केंद्र के इटानगर स्थित राज्य केंद्र के प्रभारी डॉ. ए संदीप से बात की। उन्होंने जो बताया, वो चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि दिबांग घाटी में अभी केवल एक ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) ही लगा है, जो तकनीकी कारणों से खराब पड़ा है। इस वजह से यहां बारिश का माप नहीं हो पा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस स्टेशन को ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे एक संवेदनशील जिले में बारिश के सही आंकड़े जुटाने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई जा रही है?