मोनरो केनेडी (बीच में) और उनके सहयोगियों ने रोबोटिक उंगलियों के सिरे विकसित किए हैं, जो देखकर महसूस करते हैं। फोटो: स्टेनफोर्ड स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

बुजुर्ग आबादी की देखभाल के लिए तैयार हो रहे हैं रोबोट

स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ऐसे रोबोट्स पर काम कर रहे हैं जो बुजुर्गों को चलने-फिरने, शौच, नहाने, कपड़े पहनने, सामाजिक संपर्क बनाने या घरेलू काम करने में मदद कर सकें

Bhagirath

सारांश

  • अमेरिका वृद्ध होती आबादी वाला देश है। 2050 तक 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के अमेरिकियों की संख्या 82 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022 की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है

  • 2030 तक पहली बार अमेरिका के इतिहास में 65 वर्ष से अधिक आयु वालों की संख्या 18 वर्ष से कम आयु वालों से अधिक होने की उम्मीद है। नए सेवानिवृत्त लोगों की संख्या नए कामगारों से अधिक होगी

  • इन हालात में ऐसे रोबोट जो लोगों को चलने-फिरने, शौच, नहाने, कपड़े पहनने, सामाजिक संपर्क बनाने या घरेलू काम करने में मदद कर सकें, घर पर बुढ़ापा बिताने का एक बेहतर अवसर प्रदान करेंगे

दुनिया में रोबोट्स के प्रति नजरिया बदल रहा है। कभी सुरक्षा के लिए खतरनाक माने गए रोबोट्स अब मददगार के रूप में देखे जा रहे हैं, खासकर बुजुर्ग आबादी के लिए। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ अमेरिकी का बुजुर्ग आबादी की मदद के लिए ऐसे रोबोट्स विकसित कर रहे हैं जो उनकी रोजमर्रा के कामों में मदद कर सकें।

1 अप्रैल 2026 को प्रकाशित स्टेनफोर्ड की एक रिपोर्ट में स्टेनफोर्ड रोबोटिक्स सेंटर के कार्यकारी निदेशक स्टीव कजिंस कहते हैं, “हाइड्रोलिक जैसे हाथ वाले शुरुआती रोबोट्स खतरनाक थे। पहले 40 वर्षों तक रोबोट को सुरक्षा पिंजरों के पीछे रखा जाता था। उन्हें मजबूत और सटीक बनने के लिए डिजाइन किया गया था, न कि इंसानों के साथ रहने के लिए। सुरक्षा प्राथमिकताओं में शामिल ही नहीं थी।”

हम अब एक अलग युग में जी रहे हैं, जहां ड्राइवरलेस कारें और डिलीवरी रोबोट शहर की सड़कों पर चलते हैं और अपनी कृत्रिम समझदारी से अपना काम करते हुए इंसानों से उचित दूरी बनाए रखते हैं। कजिंस का मानना है कि हम एक और परिवर्तन के कगार पर हैं, जहां रोबोट केवल लोगों से बचने की समझ ही नहीं रखेंगे, बल्कि हमारे व्यक्तिगत जीवन में हमारे साथ बहुत नजदीक शारीरिक रूप से काम करने की क्षमता भी विकसित कर लेंगे। घरेलू रोबोट का युग अब निकट है।

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका एक वृद्ध होती आबादी वाला देश है। 2050 तक 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के अमेरिकियों की संख्या 82 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022 की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है। 2030 तक पहली बार अमेरिका के इतिहास में 65 वर्ष से अधिक आयु वालों की संख्या 18 वर्ष से कम आयु वालों से अधिक होने की उम्मीद है। नए सेवानिवृत्त लोगों की संख्या नए कामगारों से अधिक होगी और साथ ही उपयुक्त आवास की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव होगा।

इन हालात में ऐसे रोबोट जो लोगों को चलने-फिरने, शौच, नहाने, कपड़े पहनने, सामाजिक संपर्क बनाने या घरेलू काम करने में मदद कर सकें, वे घर पर बुढ़ापा बिताने का एक बेहतर अवसर प्रदान हैं। कजिंस कहते हैं, “जब हम घरेलू रोबोटिक्स की बात करते हैं, तो वास्तव में हम ऐसे रोबोट की बात करते हैं जो वृद्धावस्था और विकलांगता में सहायता करें।”

दशकों तक स्वास्थ्य और वृद्धावस्था पर शोध करने वाली प्रोफेसर एबी किंग कहती हैं जनसांख्यीय दबाव का एक सकारात्मक पहलू यह है कि इससे सोच और निवेश ऐसे तरीकों पर केंद्रित हो रहे हैं जो भविष्य के वरिष्ठ नागरिकों की मदद करेंगे। वे कहती हैं, “बेबी बूमर्स के लिए जो कुछ भी विकसित किया जा रहा है, वह हर अन्य पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन संपत्ति साबित होगा।”

रोबोट के संदर्भ में उन्हें ऐसे उपकरणों की उम्मीद है जो स्वतंत्रता और सामाजिक जुड़ाव को बनाए रखें, ताकि जीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य भी लंबे समय तक बना रहे। वह कहती हैं, “जैसे-जैसे लोग बूढ़े होते हैं, ‘एजेंसी’ बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि हमें महसूस हो कि हम अपने जीवन के मालिक हैं और हम खुद को असहाय महसूस न करें।”

कजिंस कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ हममें से कई लोगों को भी शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 46 प्रतिशत अमेरिकी किसी न किसी विकलांगता की रिपोर्ट करते हैं, जो 35 से 64 वर्ष आयु वर्ग की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। रोबोट हमें इन परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद कर सकते हैं।

कजिन्स कहते हैं, “बेबी बूमर्स अब 80 वर्ष के हो रहे हैं और उनमें से कई उम्र के साथ विकलांगता का सामना करेंगे। देखभाल वह महत्वपूर्ण सामाजिक समस्या है जिसे रोबोटिक्स को हल करना होगा।”

रास्ता दिखांएगे, सावधान करेंगे

रोबोटिक सेंटर में रोबोटिक इंजीनियर मिशेल बाल्डानाडो इस मुद्दे को व्यवसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि शोध के नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि इसका व्यावसायीकरण होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। वह कहती हैं, “यह कल्पना वास्तविक है कि आने वाले कुछ वर्षों में अगली पीढ़ी का आउटडोर वॉकिंग कंपैनियन रोबोट उपलब्ध हो सकता है।” मिशेल एक ऐसे रोबोट की कल्पना करती हैं जो सिर्फ कुत्ते जैसी प्यारी दिखावट तक सीमित न हो, बल्कि उससे कहीं ज्यादा सक्षम हो।

वह रोबोटिक्स सेंटर के एक प्रमुख प्रोजेक्ट स्टेनफोर्ड ओल्डर एडल्ट रोबोटिक्स (एसओएआर) का नेतृत्व कर रही हैं, जिसका उद्देश्य ऐसे रोबोट विकसित करना है जिनकी क्षमताएं कम दृष्टि वाले लोगों की मदद करने वाले गाइड डॉग्स जैसी हों।

मिशेल और उनकी टीम ऐसे कंपैनियन रोबोट बनाना चाहती है जो रास्ता दिखा सकें, सड़क पर ऊबड़-खाबड़ सतह के बारे में चेतावनी दे सकें, शारीरिक सहारा प्रदान कर सकें और साथ निभा सकें। साथ ही यदि उपयोगकर्ता की चाल अस्थिर लगे तो उसे सतर्क भी कर सकें।

कपड़े पहनाएंगे रोबोट्स

मकैनिकल इंजीनियर प्रोफेसर एलीसन ओकामुरा की रुचि ऐसे छोटे, खास काम के लिए बनाए गए रोबोट्स में है, जो इंसानों की मदद करें लेकिन उनकी नकल न करें। उदाहरण के लिए कुछ वैज्ञानिक ऐसे रोबोटिक हाथ पर काम कर रहे हैं जो लोगों को कपड़े पहनाने में सक्षम हों।

लेकिन ओकामुरा की लैब कपड़ों को ही नए तरीके से सोच रही है। उनकी लैब का एक प्रोजेक्ट ऐसे कपड़े डिजाइन करने पर काम कर रहा है जो खुद-ब-खुद जुड़ने वाले पैनलों और ऑटोमैटिक जिपर से बने हों। यह तकनीक खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जिन्हें गठिया जैसी समस्या है।

ओकामुरा “सॉफ्ट रोबोटिक्स” की बड़ी समर्थक हैं यानी ऐसे रोबोट जो लचीले, खिंचने योग्य और हल्के पदार्थों से बने होते हैं, जो शरीर के अनुसार ढल जाते हैं और पारंपरिक सख्त रोबोटिक हिस्सों की तुलना में अधिक कोमलता से सहारा देते हैं। वह कहती हैं, “मेरे मिशन का एक हिस्सा लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित करना है कि रोबोट क्या होता है। सही काम के लिए सही रोबोट डिजाइन करना जरूरी है।”