गोवा के खूबसूरत समुद्र तटों पर सैलानियों की भीड़ तो बढ़ रही है, लेकिन उसके साथ सिगरेट के टुकड़ों का कचरा भी समुद्र और तटीय पर्यावरण के लिए नई चिंता बन रहा है।
सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के वैज्ञानिकों ने गोवा के आठ प्रमुख समुद्र तटों का अध्ययन किया, जहां अलग-अलग ज्वार के दौरान कुल 758 सिगरेट बट्स मिले। इनकी औसत संख्या 3.15 प्रति वर्ग मीटर रही, जबकि सबसे लोकप्रिय बागा बीच पर यह आंकड़ा बढ़कर 5.77 बट्स प्रति वर्ग मीटर पहुंच गया।
अध्ययन में सभी आठ समुद्र तटों पर सिगरेट बट प्रदूषण की स्थिति गंभीर पाई गई। वैज्ञानिकों को इन टुकड़ों में कई भारी धातुओं के निशान मिले, जिनमें तांबा और जस्ता की मात्रा तुलनात्मक रूप से अधिक थी।
सिगरेट फिल्टर में मौजूद सेल्यूलोज एसीटेट प्लास्टिक आसानी से नष्ट नहीं होता और समय के साथ छोटे कणों में टूट सकता है। निकोटीन, हाइड्रोकार्बन और धातुओं जैसे प्रदूषक बारिश, लहरों और ज्वार के साथ समुद्र तक पहुंच सकते हैं।
यह सिर्फ गोवा की रेत पर पड़े कचरे की कहानी नहीं है। हर फेंका गया सिगरेट बट समुद्री जीवों और नाजुक तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर लंबे समय तक असर छोड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने सख्त कचरा प्रबंधन, जागरूकता और प्रभावी नियम लागू करने की जरूरत बताई है।
सैलानियों की भीड़ से गुलजार रहने वाले गोवा के समुद्र तट अब सिगरेट के बचे हुए टुकड़ों से पट रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि यह कचरा सिर्फ समुद्र तट की खूबसूरती खराब नहीं करता, बल्कि इससे जहरीले रसायन और भारी धातुएं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में पहुंच सकती हैं।
हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (सीएसआईआर-एनआईओ), से जुड़े वैज्ञानिकों ने गोवा के आठ प्रमुख समुद्र तटों का अध्ययन किया, जिसके नतीजे बेहद चिंताजनक हैं।
शोधकर्ताओं को गोवा के बेहद लोकप्रिय बागा, कलंगुट और अरम्बोल बीचों पर बड़ी संख्या में सिगरेट के जले हुए टुकड़े (बट्स) मिले हैं।
अध्ययन के दौरान उच्च, मध्य और निम्न ज्वार के अलग-अलग स्तरों पर कुल 758 सिगरेट बट्स पाए गए। यह आंकड़ा बताता है कि समुद्र तटों पर फेंके जा रहे सिगरेट के टुकड़े किस तरह बढ़ते कचरे और समुद्री पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
अध्ययन के मुताबिक, इन समुद्र तटों पर सिगरेट के टुकड़ों की औसत संख्या 3.15 प्रति वर्ग मीटर रही। वहीं सबसे ज्यादा प्रदूषण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बागा बीच पर मिला, जहां प्रति वर्ग मीटर सिगरेट के औसतन 5.77 टुकड़े पाए गए। इसके बाद कलंगुट और अरम्बोल का स्थान रहा।
इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल मरीन पॉल्यूशन बुलेटिन में प्रकाशित हुए हैं।
कचरा दिखता छोटा है, पर खतरा बड़ा
सिगरेट का छोटा-सा टुकड़ा अक्सर लोगों को मामूली कचरा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका असर लंबे समय तक रह सकता है। सिगरेट फिल्टर में ‘सेल्यूलोज एसीटेट’ नाम का प्लास्टिक आधारित पदार्थ होता है, जो आसानी से प्राकृतिक रूप से नष्ट नहीं होता। समय के साथ यह छोटे-छोटे कणों में टूट सकता है और पर्यावरण में फैल सकता है।
इसके साथ ही इन फिल्टरों से निकोटीन, हाइड्रोकार्बन और भारी धातुओं जैसे प्रदूषक आसपास के वातावरण में पहुंच सकते हैं। समुद्र तटों पर पड़े ये टुकड़े बारिश, लहरों और ज्वार के साथ समुद्र में पहुंचकर समुद्री जीवों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।
सभी आठ समुद्र तटों पर मिला गंभीर प्रदूषण
शोधकर्ताओं ने सिगरेट बट्स से होने वाले प्रदूषण का आकलन करने के लिए सिगरेट बट् पॉल्यूशन इंडेक्स (सीबीपीआई) की मदद ली है। इसके आधार पर अध्ययन में शामिल सभी आठ समुद्र तटों पर प्रदूषण की स्थिति गंभीर पाई गई। वैज्ञानिकों ने इसका एक प्रमुख कारण इन स्थानों पर आने वाले पर्यटकों की बड़ी संख्या को माना है।
इसके अलावा हानिकारक वस्तु सूचकांक (एचआईआई) से भी पता चला है कि पर्यटकों की अधिक आवाजाही वाले समुद्र तटों पर सिगरेट के टुकड़ों के जमा होने का खतरा ज्यादा है।
भारी धातुओं के निशान भी मिले
शोधकर्ताओं ने सिगरेट के टुकड़ों में कई तरह की भारी धातुओं की मौजूदगी भी दर्ज की। हालांकि, इन धातुओं की कुल मात्रा कम से मध्यम प्रदूषण जोखिम वाली सीमा में रही, लेकिन तांबा (कॉपर) और जस्ता (जिंक) की मात्रा तुलनात्मक रूप से अधिक थी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही मौजूदा स्तर तत्काल बड़े खतरे का संकेत नहीं देते, लेकिन समुद्र तटों पर लगातार सिगरेट के टुकड़े जमा होते रहे तो इनके प्रदूषक धीरे-धीरे मिट्टी और समुद्री पर्यावरण में पहुंच सकते हैं। इससे लंबे समय में तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
अनुमान है कि एक सिगरेट अपने जीवन चक्र में मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और अन्य वायु प्रदूषकों के साथ करीब 14 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है।
एक अन्य रिसर्च से पता चला है कि एक सिगरेट बट करीब 40 लीटर पानी को दूषित कर सकता है। कूड़े की दर और एक सिगरेट बट के औसत वजन के आधार पर रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि सालाना साढ़े तीन लाख टन से अधिक प्लास्टिक तंबाकू फिल्टर वैश्विक जलमार्गों में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में यदि 15 वर्षों का हिसाब लगाएं तो करीब 53 लाख टन तक सिगरेट के टुकड़े हमारी जल धाराओं में मौजूद हो सकते हैं।
देखा जाए तो नदियों समुद्रों पर पड़ता इनका प्रभाव प्लास्टिक प्रदूषण से कहीं ज्यादा है। अनुमान है कि जितनी मात्रा में यह सिगरेट के टुकड़े समुद्रों और नदियों में मिल रहे हैं वो हर साल 72,000,000,000,000,000 (72 क्वाड्रिलियन) लीटर पानी को दूषित कर सकते हैं।
समुद्र तट की खूबसूरती से आगे की चिंता
हमें समझना होगा कि गोवा के समुद्र तट सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं हैं। यहां रेत, समुद्री जल, वनस्पतियां, मछलियां और दूसरे जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सिगरेट का एक छोटा-सा बट भी इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में प्रदूषण की एक नई कड़ी जोड़ सकता है।
शोधकर्ताओं ने सिगरेट के कचरे को नियंत्रित करने के लिए कड़े तंबाकू नियंत्रण उपाय, कचरे का उचित प्रबंधन, जन-जागरूकता अभियान और समुद्र तटों पर कचरा फैलाने के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई है।
ऐसे में गोवा की रेत पर पड़ा सिगरेट का एक छोटा-सा टुकड़ा भले ही किसी को नजरअंदाज करने लायक लगे, लेकिन समुद्र के लिए यह लंबे समय तक रहने वाला जहर बन सकता है। हमें समझना होगा कि साफ समुद्र तट सिर्फ पर्यटन की खूबसूरती नहीं, बल्कि समुद्री जीवन और हमारी आने वाली पीढ़ियों की विरासत भी हैं।