उत्तर प्रदेश के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने तमसा नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की 10 मार्च 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं और सीमांकन की प्रक्रिया जारी है। यह रिपोर्ट 22 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अनुपालन में प्रस्तुत की गई है।
मामला अंबेडकर नगर जिले में तमसा नदी में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण तथा बिना शोधन के सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के लगातार प्रवाह से जुड़ा है। तमसा नदी गंगा की एक सहायक नदी है। याचिकाकर्ता का कहना था कि नदी के बाढ़ क्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण नहीं होने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के समुचित पालन न होने से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है और नदी का पर्यावरण तेजी से बिगड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तमसा नदी के पुनर्जीवन और पुनर्स्थापन के कार्य भी चल रहे हैं। ये कार्य राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की निगरानी में किए जा रहे हैं। नदी के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत संबंधित जिला प्रशासन के सहयोग से कराया जा रहा है।
इससे पहले 9 दिसंबर 2025 को अयोध्या स्थित बाढ़ कार्य प्रभाग के कार्यकारी अभियंता ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की को पत्र लिखकर गंगा पुनर्जीवन आदेश, 2016 के अनुसार तमसा नदी के बाढ़ क्षेत्र का निर्धारण करने का अनुरोध किया था। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल भू-आकृतिक मॉडल और एक मीटर अंतराल वाले समोच्च आंकड़ों के आधार पर अध्ययन किया जाना है।
अयोध्या के बाढ़ कार्य प्रभाग ने भारत सर्वेक्षण विभाग को तमसा नदी के प्रवाह पथ की केएमएल फाइल उपलब्ध कराई है और नदी के दोनों किनारों से दो-दो किलोमीटर चौड़े क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल भू-आकृतिक आंकड़े और एक मीटर अंतराल वाले समोच्च आंकड़े उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि नदी के बाढ़ क्षेत्र का सटीक निर्धारण किया जा सके।
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की ने तमसा, मरहा और टोंस नदी के बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन के लिए एक प्रारंभिक प्रस्ताव भी तैयार किया है। संस्थान ने कहा है कि यह अध्ययन लगभग बारह महीनों में पूरा किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की को बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन तथा भारत सर्वेक्षण विभाग को आधा मीटर सटीकता वाले डिजिटल भू-आकृतिक आंकड़े और एक मीटर अंतराल वाले समोच्च आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए आंशिक धनराशि दी जा चुकी है, जबकि शेष धनराशि के आवंटन की प्रक्रिया जारी है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का कहना है कि तमसा नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन करने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है।