गढ़वाघाट के पुनर्निर्माण को लेकर उठे पर्यावरणीय सवालों के बीच प्रशासन ने एनजीटी के समक्ष दायर रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 6,264 वर्ग मीटर में प्रस्तावित निर्माण से गंगा के प्रवाह या पारिस्थितिकी पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञ समिति, सिंचाई और वन विभाग की रिपोर्टों ने भी परियोजना का समर्थन किया है।
न्यायिक निगरानी में चल रही इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से अनुमति की प्रक्रिया जारी है, जबकि प्रशासन का दावा है कि सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
वाराणसी में गंगा किनारे स्थित गढ़वाघाट के पुनर्निर्माण को लेकर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। 23 फरवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर दायर रिपोर्ट में वाराणसी के जिलाधिकारी ने कहा है कि प्रस्तावित निर्माण से गंगा के प्रवाह पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
अधिकरण के आदेश पर गठित विशेषज्ञ समिति ने भी गढ़वाघाट के पुनर्निर्माण के पक्ष में अपनी सिफारिश दी है।
समिति की सहमति के बाद गंगा के बाएं तट पर स्थित इस घाट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह परियोजना 80 मीटर लंबाई और 78.3 मीटर चौड़ाई में फैली है, जिसका कुल निर्माण क्षेत्र 6,264 वर्ग मीटर है।
वाराणसी मंडल के संयुक्त निदेशक (पर्यटन) के अनुसार, इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने 1,154.16 लाख रुपए की मंजूरी दी है। वहीं उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन के परियोजना प्रबंधक ने 28 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के पोर्टल पर निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन किया था।
बैठक के दौरान सिंचाई विभाग, बंधी प्रखंड, वाराणसी के अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया कि यह पुनर्निर्माण पहले से मौजूद घाट पर ही हो रहा है और इससे न तो गंगा के जल प्रवाह में बाधा आएगी और न ही नदी की पारिस्थितिकी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
वन विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि परियोजना क्षेत्र में कोई वन भूमि शामिल नहीं है और न ही प्रस्तावित निर्माण स्थल पर कोई पेड़ मौजूद है।
न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ रही परियोजना
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआइए) अधिसूचना 2006 के तहत 20,000 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण पर राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पूर्व अनुमति जरूरी होती है।
चूंकि इस परियोजना का निर्माण क्षेत्र केवल 6,264 वर्ग मीटर है, इसलिए इसे पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, अधिकरण के आदेश का पालन करते हुए वाराणसी के जिलाधिकारी ने 28 जनवरी 2026 को पर्यटन विभाग को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से ऑनलाइन अनुमति प्राप्त किए बिना गढ़वाघाट पर कोई आगे का निर्माण कार्य न किया जाए।
कुल मिलाकर प्रशासन का दावा है कि गढ़वाघाट का यह पुनर्निर्माण गंगा के प्रवाह और पर्यावरण को बिना प्रभावित किए किया जा रहा है, जबकि न्यायिक निगरानी के बीच सभी औपचारिक अनुमतियों की प्रक्रिया भी जारी है।