राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में यमुना नदी में खनन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन मामले में अपने आदेश में प्रशासन को जारी की गई पर्यावरण मंजूरी और खनन पट्टे की जांच कर उचित कदम उठाने का आदेश दिया है।
एनजीटी ने “बिट्टू बनाम राज्य उत्तर प्रदेश एवं अन्य” मामले में पाया कि गाजियाबाद स्थित यमुना नदी क्षेत्र में अवैध खनन, नदी की मुख्य धारा में खनन, रात्रिकालीन खनन, भारी मशीनों के उपयोग तथा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन किया जा रहा है।
यह मामला गाजियाबाद के लोनी तहसील में ग्राम पंचायत पनचायरा से जुड़ा है।
एनजीटी के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रिकॉर्ड पर प्रस्तुत फोटो, वीडियो, शिकायतों एवं अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। ट्रिब्यूनल ने माना कि रिकॉर्ड में पर्यावरणीय नियमों एवं खनन शर्तों के बार-बार उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
ट्रिब्यूनल ने यह भी दर्ज किया कि परियोजना संचालक पर उत्तर प्रदेश माइनर मिनरल्स (कन्सेशन) नियमावली, 2021 के अंतर्गत 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसे जमा करा दिया गया है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में खनन की अनुमति दी जाती है, तो परियोजना संचालक को पर्यावरणीय स्वीकृति की सभी शर्तों, सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस 2016 तथा एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस 2020 का कड़ाई से पालन करना होगा। साथ ही केवल जीपीएस युक्त वाहनों का उपयोग किया जाएगा तथा साप्ताहिक मॉनिटरिंग रिपोर्ट एवं सीसीटीवी फुटेज संबंधित विभागों को उपलब्ध करानी होगी।
ट्रिब्यूनल ने जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त तथा जिला खनन अधिकारी को अवैध खनन रोकने के लिए आकस्मिक निरीक्षण एवं सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 02 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।