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नदी

एनजीटी का आदेश : 31 मार्च तक पूरा करें यूपी में गंगा-यमुना नदियों के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन

एनजीटी ने कहा बाढ़ क्षेत्र से जुड़ी सभी जानकारी अब सार्वजनिक रूप से संबंधित वेबसाइट पर हो मौजूद

Vivek Mishra

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को 31 मार्च, 2026 तक गंगा और यमुना नदियों के बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन का काम पूरा करने का आदेश दिया है। प्रधान पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि बाढ़ क्षेत्र से जुड़ी सभी जानकारी अब सार्वजनिक रूप से उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और फ्लड मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम सेंटर (एफएमआईएससी) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराएं। 

एनजीटी में यह सुनवाई प्रधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य माननीय डॉ. ए. सेंथिल वेल ने की।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता  ने दिनांक 09 फरवरी 2026 को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में गंगा नदी के सेगमेंट-बी, फेज-II (उन्नाव से बलिया तक) के बाढ़ क्षेत्र का भौतिक सीमांकन और इसके स्तंभ (पिलर) स्थापना की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 13 जनपदों में कुल 7,350 बाढ़ क्षेत्र सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। वहीं, सभी जिलों में निविदा प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और कार्य आवंटित कर दिया गया है। कई जिलों में स्तंभ स्थापना का कार्य पहले ही प्रगति पर है। जबकि यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पूर्ण हो चुका है, तकनीकी स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है और अनुमोदन के लिए गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया कि गौतम बुद्ध नगर जिले में बाढ़ क्षेत्र का भौतिक सीमांकन और स्तंभ स्थापना पूरा कर दिया गया है। वहीं, अधिकरण के निर्देशानुसार बाढ़ क्षेत्र से संबंधित सभी जानकारी अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसे उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तथा फ्लड मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम सेंटर (एफएमआईएससी) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिकरण को आश्वासन दिया है कि बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन, स्तंभ स्थापना और ग्राउंड ट्रुथिंग सहित सभी कार्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 के लिए निर्धारित की गई है।