नदी

कृष्णा नदी में एथेनॉल प्रदूषण के आरोपों पर एनजीटी सख्त, अब चेन्नई पीठ करेगी सुनवाई

आवेदन में कृषि भूमि और फसलों को नुकसान तथा आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है

Vivek Mishra

कर्नाटक के बेलगावी जिले में 845 केएलपीडी क्षमता वाले एथेनॉल संयंत्र से कथित रूप से बिना उपचार किया गया अपशिष्ट जल कृष्णा नदी में छोड़े जाने के आरोपों से जुड़े मामले की सुनवाई अब चेन्नई स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण की दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ करेगी। एनजीटी की प्रधान पीठ ने 31 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए इसे चेन्नई स्थित दक्षिणी पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया।

मामला बेलगावी जिले के कागवाड़ तालुका के उगार खुर्द में उगार शुगर फैक्ट्री के निकट संचालित 845 केएलपीडी क्षमता वाले एथेनॉल संयंत्र से संबंधित है। शिकायत में संयंत्र के कथित अवैध संचालन के साथ-साथ जल, वायु, मिट्टी और ध्वनि प्रदूषण के आरोप लगाए गए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने की।

नदी में अपशिष्ट जल छोड़ने का आरोप

मामले में सागर एन. खराड़े ने आरोप लगाया है कि एथेनॉल संयंत्र और संबंधित कारखाने से निकलने वाला अपशिष्ट जल कथित रूप से बिना उपचार किए कृष्णा नदी में छोड़ा जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इससे नदी और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आवेदन में आसपास के कुओं और नलकूपों के पानी के कथित रूप से प्रदूषित होने की भी शिकायत की गई है। इसके अलावा कृषि भूमि और फसलों को नुकसान तथा आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

आवेदक ने संयंत्र और कारखाने के निरीक्षण, संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई और पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। इसमें एथेनॉल संयंत्र को बंद करने पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है।

पत्र याचिका पर स्वतः संज्ञान

यह मामला सागर एन. खराड़े की ओर से 25 मई 2026 को भेजी गई पत्र याचिका के आधार पर सामने आया। एनजीटी ने सर्वोच्च न्यायालय के म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा, (2022) 13 एससीसी 401 में निर्धारित विधि के मद्देनजर इस पत्र को स्वतः संज्ञान के आधार पर मूल आवेदन के रूप में माना और पंजीकृत किया है।

सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए आवेदक

31 अगस्त की सुनवाई में आवेदक न तो व्यक्तिगत रूप से अधिकरण के समक्ष उपस्थित हुए और न ही दूरस्थ माध्यम से कार्यवाही में शामिल हुए। इसके बावजूद पीठ ने उनकी अनुपस्थिति के आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया। अधिकरण ने आवेदक को एक और अवसर देते हुए व्यक्तिगत रूप से अथवा दूरस्थ माध्यम से अगली सुनवाई में उपस्थित होने और उनके पास उपलब्ध सामग्री प्रस्तुत करने को कहा है। अधिकरण की पंजीयन शाखा को आवेदक को अगली सुनवाई की तारीख की सूचना देने का निर्देश दिया गया है।

बेलगावी से चेन्नई पहुंचेगा मामला

प्रधान पीठ ने कहा कि मामले में जिस स्थान पर विवाद का कारण उत्पन्न होने की बात कही गई है, वह राष्ट्रीय हरित अधिकरण की दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ, चेन्नई के क्षेत्राधिकार में आता है। इसलिए मामले की सुनवाई चेन्नई की दक्षिणी पीठ के समक्ष किया जाना उचित होगा।

पीठ ने पंजीयन शाखा को निर्देश दिया है कि आवश्यकता होने पर मामले के स्थानांतरण के लिए अधिकरण के अध्यक्ष से आदेश प्राप्त किया जाए। इसके बाद मामले को 23 सितंबर 2026 को दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ, चेन्नई के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

इस स्तर पर अधिकरण ने कृष्णा नदी में प्रदूषण, एथेनॉल संयंत्र के संचालन या अन्य पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अगली सुनवाई में आवेदक को अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध सामग्री रखने का अवसर मिलेगा।