मॉनसून 2026 की वापसी हो चुकी है, लेकिन देश के ज्यादातर जलाशय पूरी तरह भर नहीं पाए। हालात यह हैं कि जलाशयों में कुल क्षमता के मुकाबले लगभग 31 फीसदी कम पानी मौजूद हैं। इसे आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है।
गुरुवार 15 अक्टूबर, 2026 को जारी जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार, देश के 178 जलाशयों में 126.717 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध है, जो इनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का 68.58 प्रतिशत है। यानी जलाशयों में कुल क्षमता का 31.42 प्रतिशत हिस्सा खाली है।
बुलेटिन के मुताबिक जलाशयों में वर्तमान जल भंडारण पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 41.193 अरब घन मीटर (24.53 प्रतिशत) कम है, जबकि सामान्य जल भंडारण के मुकाबले यह 24.930 अरब घन मीटर (16.44 प्रतिशत) कम है। इन जलाशयों में पिछले दस साल के भंडारण के औसत को सामान्य माना जाता है।
केंद्रीय जल आयोग देश के 178 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति की निगरानी करता है और हर गुरुवार को साप्ताहिक बुलेटिन जारी करता है। इन जलाशयों की कुल जल भंडारण क्षमता 184.762 अरब घन मीटर है, जो देश के कुल जल भंडारण क्षमता 257.812 अरब घन मीटर का लगभग 71.67 प्रतिशत है।
देश के कई प्रमुख जलाशयों में सामान्य जल भंडारण की तुलना में पानी का स्तर आधे से भी कम रह गया है। बुलेटिन में दिए गए आंकड़े बताते हैं कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना के कई जलाशयों में पानी की कमी गंभीर है।
सामान्य जल भंडारण के मुकाबले 50 प्रतिशत से कम पानी वाले जलाशयों की सूची में कर्नाटक का अलीयार जलाशय सबसे निचले स्तर पर है, जहां सामान्य भंडारण का महज शून्य प्रतिशत पानी बचा है।
आंध्र प्रदेश के सोमासिला में सामान्य भंडारण का 22.05 प्रतिशत और श्रीशैलम में 33.64 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। तमिलनाडु के मेट्टूर में यह स्तर 32.49 प्रतिशत, जबकि केरल के इडुक्की में केवल 10.62 प्रतिशत है।
महाराष्ट्र के कई जलाशयों में भी स्थिति चिंताजनक है। जायकवाड़ी में सामान्य भंडारण का 15.55 प्रतिशत, उजनी में 10.62 प्रतिशत, मंजरा में 12.45 प्रतिशत और लोअर तेरना में 28.24 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
कर्नाटक के घटप्रभा में 22.56 प्रतिशत, तुंगभद्रा में 22.54 प्रतिशत और शोलायार में 23.62 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है। वहीं, केरल के पेरियार में सामान्य भंडारण का 46.43 प्रतिशत पानी है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई जलाशयों में पानी की उपलब्धता सामान्य स्तर से काफी नीचे है।
बुलेटिन के अनुसार, सामान्य जल भंडारण की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत के बीच पानी वाले जलाशयों की संख्या भी उल्लेखनीय है। कुल 42 जलाशय इस श्रेणी में हैं। इनमें 11 जलाशयों में सामान्य भंडारण का 51 से 60 प्रतिशत, 14 में 61 से 70 प्रतिशत और 17 में 71 से 80 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
इसके अलावा, 20 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 12 में पानी सामान्य स्तर से कम या उसके बराबर है। यह स्थिति सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन के लिहाज से चिंता बढ़ाती है।
बेसिनवार स्थिति देखें तो पेन्नार और कावेरी नदी बेसिन में जल भंडारण की स्थिति बेहद कमी वाली श्रेणी में है। वहीं, सिंधु, माही, कृष्णा और साबरमती बेसिन के साथ-साथ कच्छ-सौराष्ट्र और लूणी नदी क्षेत्र में भी जल भंडारण की स्थिति कमी वाली श्रेणी में दर्ज की गई है। पेन्नार से कन्याकुमारी के बीच बहने वाली पूर्ववाहिनी नदियों और तादरी से कन्याकुमारी के बीच की पश्चिमवाहिनी नदियों के बेसिन में भी पानी की कमी है।
इसके विपरीत, नर्मदा, महानदी और स्वर्णरेखा बेसिन में जल भंडारण सामान्य स्तर से बेहतर है। गंगा, ताप्ती, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र और ब्राह्मणी-बैतरणी सहित कई अन्य नदी बेसिन में जल भंडारण सामान्य स्तर के करीब है। यह वर्गीकरण बताता है कि देश में जल भंडारण की स्थिति सभी नदी बेसिन में एक जैसी नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत के पेन्नार और कावेरी जैसे प्रमुख बेसिन में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है।
कावेरी बेसिन में सामान्य जल भंडारण के मुकाबले पानी 60.50 प्रतिशत कम है, जबकि पेन्नार बेसिन में यह कमी 72.32 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कृष्णा बेसिन में सामान्य से 32.59 प्रतिशत और साबरमती में 38.03 प्रतिशत कम पानी उपलब्ध है।
इसके उलट, नर्मदा बेसिन में सामान्य से 7.81 प्रतिशत अधिक पानी उपलब्ध है। महानदी में यह स्तर सामान्य से 2.95 प्रतिशत और स्वर्णरेखा में 30.74 प्रतिशत अधिक है।