यमुना नदी की गिरती जैव विविधता पर चिंता जताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए नदी में देशी मछलियों की बहाली और विदेशी मछली प्रजातियों के प्रसार पर रोक लगाने संबंधी आदेश केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और यमुना राज्यों को दिए हैं।
एनजीटी ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया। रिपोर्ट में यमुना नदी में पारंपरिक देशी मछलियों की संख्या में लगातार गिरावट और विदेशी प्रजातियों के तेजी से फैलने की ओर इशारा किया गया था।
एनजीटी के चेयरमैन और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेनथिल वेल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक सर्वे पर गौर किया कि यमुना नदी के अत्यधिक प्रदूषित स्थलों में विदेशी प्रजातियों की मछलियों की संख्या में तेजी से प्रसार हो रहा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईएफआरआई), प्रयागराज द्वारा वर्ष 2020 से 2024 के बीच किए गए सर्वेक्षण में यमुना नदी में कुल 126 मछली प्रजातियों की पहचान की गई थी। इसमें कटला, रोहू, महासीर और ईल जैसी देशी मछलियों की आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इसके विपरीत नदी में जहां प्रदूषण ज्यादा है वहां कॉमन कार्प, नाइल टिलापिया और थाई मांगुर जैसी विदेशी प्रजातियां तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों ने इसके लिए जल प्रदूषण, बांधों का निर्माण, नदी के प्राकृतिक आवास में बदलाव, अत्यधिक मछली पकड़ना और जलवायु परिवर्तन को प्रमुख कारण बताया है।
ट्रिब्यूनल ने यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने कहा है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारें आईसीएआर-सीआईएफआरआई की सिफारिशों को लागू करें।
वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) यह सुनिश्चित करें कि अपशिष्ट जल मानकों का कड़ाई से पालन हो और मछलियों के अनुकूल जल गुणवत्ता बनी रहे।
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखें व अनावश्यक अवरोधों को हटाएं और मछलियों के प्राकृतिक प्रवास को सुनिश्चित करें।
पीठ ने कहा कि राज्य मत्स्य पालन विभाग देशी मछलियों के बीज छोड़ने, हैचरी स्थापित करने और मत्स्य पालन गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ विदेशी प्रजातियों के पालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। इसके अलावा विदेशी प्रजातियों से पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान को लेकर अनुसंधान और जन-जागरूकता कार्यक्रम मजबूत किए जाएं।
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यमुना की पारिस्थितिकी सेहत केवल जल की स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें देशी जैव विविधता की सुरक्षा और सतत मछली आबादी की बहाली भी उतनी ही आवश्यक है।