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प्रदूषण

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: ग्रासिम इंडस्ट्रीज के खतरनाक कचरे के निपटान के लिए सीपीसीबी तैयार करे मेमोरेंडम

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रेनुकूट स्थित ग्रासिम इंडस्ट्रीज के चिन्हित खतरनाक कचरे के निपटान का मामला

Susan Chacko

सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रेनुकूट स्थित ग्रासिम इंडस्ट्रीज के चिन्हित खतरनाक कचरे के निपटान के लिए आवश्यक सभी कदमों का एक मेमोरेंडम तैयार करे।

अदालत ने कहा कि इसके लिए ऐसी मान्यता प्राप्त एजेंसी का चयन भी शामिल होना चाहिए, जो इस काम को करने में सक्षम हो। मेमोरेंडम में भुगतान की रूपरेखा और प्रत्येक चरण को पूरा करने की अनुमानित समय-सीमा भी शामिल की जाए। साथ ही, प्रस्तावित कार्यों के लिए कंपनी द्वारा देय अनुमानित राशि और भुगतान के चरणों का स्पष्ट विवरण भी दिया जाए।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी केंद्रीय या राज्य सरकारी विभाग से सहयोग या अनुमति की आवश्यकता हो, तो उसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाए ताकि पूरी प्रक्रिया बिना देरी के पूरी हो सके। यह मेमोरेंडम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से परामर्श करके तैयार किया जाएगा। शपथपत्र सहित मेमोरेंडम तीन सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा गया है।

शीर्ष अदालत के 9 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एक अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया गया है। इस शपथपत्र में कचरे के ऑनसाइट और ऑफसाइट निपटान के कई विकल्प सुझाए गए हैं।

ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी लगभग 1,10,000 मीट्रिक टन खतरनाक कचरे के निपटान वाले विकल्प को अपनाने को तैयार है, जिसकी अनुमानित लागत 128 करोड़ रुपए है।

सीपीसीबी के शपथपत्र में कहा गया है कि कचरे के निपटान से जुड़े कार्य के लिए यूपीपीसीबी से परामर्श कर एक मान्यता प्राप्त एजेंसी को शॉर्टलिस्ट करना होगा। यूपीपीसीबी के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बोर्ड सीपीसीबी को आवश्यक पूरा सहयोग और सहायता देगा, इसलिए काम सीपीसीबी की निगरानी और नियंत्रण में किया जाना चाहिए।

यह मामला रेनुकूट स्थित ग्रासिम इंडस्ट्रीज द्वारा खतरनाक कचरा प्रबंधन से जुड़ा है। कंपनी ने 21 जुलाई 2025 को सीपीसीबी द्वारा दायर अनुपालन शपथपत्र में दी गई सिफारिशों के अनुसार साइट के उपचार (रिमेडिएशन) की अनुमति/आवश्यक निर्देश देने के लिए आवेदन दायर किया था।

सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि “मरकरी युक्त ब्राइन स्लज और एचसीएच मक्क (कीटनाशक अवशेष) वाले कचरे का लैंडफिल सेल (1, 2 और 3) तथा अन्य संभावित चिंताजनक क्षेत्रों में अनुचित भंडारण/डंपिंग पाई गई है, जिससे भूजल प्रदूषण हो रहा है।”