ईपीआर नियम लागू होने के बाद 207 लाख टन प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण हुआ, लेकिन कई कंपनियां अभी लक्ष्य पूरा नहीं कर पाईं।
रामगंगा और गोमती नदियों में औद्योगिक प्रदूषण बढ़ा, सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की पहचान और जांच शुरू।
चीता पुनर्वास परियोजना में 29 चीते लाए गए, 45 शावकों में से 33 जीवित हैं, जो अच्छी सफलता दर्शाता है।
एथेनॉल मिश्रण 20 प्रतिशत लक्ष्य दिसंबर 2025 में हासिल हुआ, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिली।
देश में प्लास्टिक पैकेजिंग और ईपीआर
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में कहा कि भारत में प्लास्टिक का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ा है। इसके कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
इस समस्या को कम करने के लिए सरकार ने विस्तारित उत्पादक दायित्व यानी ईपीआर नियम लागू किए हैं। इस नियम के अनुसार जो कंपनियां प्लास्टिक बनाती हैं या उसका उपयोग करती हैं, उन्हें उसके कचरे को वापस इकट्ठा करके उसका सही तरीके से निपटान करना होता है।
यादव ने कहा कि मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है। देश में अब तक 60,128 उत्पादक, आयातक और ब्रांड मालिक पंजीकृत हो चुके हैं। साथ ही 3,012 प्लास्टिक कचरा संसाधक भी इस प्रणाली से जुड़े हैं। ईपीआर नियम लागू होने के बाद लगभग 207 लाख टन प्लास्टिक कचरे का रीसाइक्लिंग या पुनर्चक्रण किया गया है।
यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अभी भी बहुत काम करना बाकी है। कई कंपनियों ने अपने लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं, इसलिए सरकार ने उन्हें नोटिस भी जारी किए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस नियम को गंभीरता से लागू कर रही है और भविष्य में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने का प्रयास जारी रहेगा।
रामगंगा और गोमती नदियों में औद्योगिक प्रदूषण
नदियों में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत की नदियां हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन औद्योगिक प्रदूषण के कारण इनकी स्थिति खराब होती जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश के विभिन्न जल स्रोतों की निगरानी करता है। इसके तहत हजारों स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।
सिंह ने बताया कि 2025 में रामगंगा और गोमती नदियों के कुछ हिस्सों को प्रदूषित पाया गया है। इन नदियों में प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों से निकलने वाला गंदा पानी है। रामगंगा नदी के बरेली और बदायूं क्षेत्रों में तथा गोमती नदी के जौनपुर क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या अधिक देखी गई है। सरकार इन क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जांच कर रही है और उन्हें नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रही है।
दिल्ली में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता स्तर
सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में प्लास्टिक कचरे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डालती है।
आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में दिल्ली में लगभग 3.45 लाख टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हुआ था। यह बढ़कर 2021-22 में लगभग 3.77 लाख टन हो गया। यह वृद्धि चिंता का विषय है।
मंत्री ने कहा कि इस समस्या का मुख्य कारण प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और उसका सही तरीके से निपटान न होना है। यदि लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दें, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
चीता पुनर्वास परियोजना
सदन में प्रश्नों का सिलसिला जारी रहा, एक अन्य प्रश्न के उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत में चीता को फिर से बसाने की एक महत्वपूर्ण परियोजना चलाई जा रही है। यह परियोजना केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
इस परियोजना के तहत अब तक कुल 29 चीतों को भारत लाया गया है। इनमें से कुछ चीते नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए हैं। इन्हें मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में रखा गया है।
सिंह ने बताया कि इन चीतों से अब तक 45 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 33 जीवित हैं। यह एक अच्छा संकेत है। चीतों की जीवित रहने की दर भी अच्छी पाई गई है, जो इस परियोजना की सफलता को दर्शाती है। यह परियोजना भारत में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (ईबीपी)
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के संबंध में सदन में उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए आज, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम चला रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर प्रदूषण को कम करना है।
गोपी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में एथेनॉल मिश्रण में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार ने 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा था, जिसे दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया गया। इसके अलावा सरकार बायोगैस और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा दे रही है। भविष्य में विमान ईंधन में भी जैव ईंधन का उपयोग बढ़ाने की योजना है। यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है।
देशभर में भूजल की स्थिति
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि भारत में भूजल एक अहम संसाधन है, जिसका उपयोग पीने के पानी, खेती और उद्योगों में किया जाता है। मंत्रालय इस संसाधन की निगरानी और प्रबंधन करता है।
चौधरी ने कहा कि 2025 में देश में कुल भूजल पुनर्भरण 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि उपयोग योग्य जल 407.75 बिलियन क्यूबिक मीटर है। कुल उपयोग 247.22 बिलियन क्यूबिक मीटर है। इस आधार पर भूजल उपयोग की दर 60.63 प्रतिशत है। यह स्थिति सामान्य मानी जा सकती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में जल की कमी की समस्या हो सकती है। इसलिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल के सही उपयोग पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
शहरों में साइकिलिंग और पैदल मार्ग
सदन में उठे एक सवाल का जवाब देते हुए आज, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री टोखन साहू ने राज्यसभा में बताया कि शहरों में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए सरकार साइकिलिंग और पैदल चलने को बढ़ावा दे रही है। मंत्रालय इस दिशा में कई योजनाएं चला रहा है।
साहू ने बताया कि अमृत योजना के तहत कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं। अब तक सैकड़ों किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक तैयार किए जा चुके हैं। इससे लोगों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा के विकल्प मिल रहे हैं। यह पहल न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करती है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।