भारत में 2025 की पहली तिमाही में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री साल दर साल 45 फीसदी बढ़ी है; फोटो: आईस्टॉक 
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2050 तक भारत में सड़क परिवहन से कार्बन उत्सर्जन में 50% की कमी संभव: रिपोर्ट

अध्ययन में 2050 तक वाहनों की बिक्री, ऊर्जा उपयोग और उत्सर्जन पर मौजूदा एवं प्रस्तावित नीतियों के प्रभाव का मॉडल प्रस्तुत किया गया

DTE Staff

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) के एक नए वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, यदि भारत अपने मौजूदा राष्ट्रीय और राज्य स्तर के इलेक्ट्रिक वाहन लक्ष्यों को पूरी तरह लागू करता है, तो 2050 तक सड़क परिवहन से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड -समतुल्य उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

यह निष्कर्ष विजन 2050 के चौथे संस्करण का हिस्सा है, जो आईसीसीटी का वार्षिक आकलन है आरै वैश्विक स्तर पर शून्य-उत्सर्जन वाहनों की ओर संक्रमण की प्रगति का विश्लेषण करता है।

अध्ययन में 2050 तक वाहनों की बिक्री, ऊर्जा उपयोग और उत्सर्जन पर मौजूदा एवं प्रस्तावित नीतियों के प्रभाव का मॉडल प्रस्तुत किया गया है।

भारत की विशिष्ट स्थिति

रिपोर्ट में भारत की उभरते ट्रांसपोर्ट बाजार के बारे में व्यापक स्तर पर बताया गया है। देश में अभी ईवी अपनाने की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, लेकिन भारत में बिकने वाले लगभग 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन घरेलू स्तर पर निर्मित होते हैं।

विश्लेषण के अनुसार, यदि राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मौजूदा लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत 2050 तक सड़क परिवहन से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को आधा कर सकता है। तरल ईंधन की मांग में भी 50 प्रतिशत तक कमी ला सकता है। यह प्रगति भारत के 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य को समर्थन देगी और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों को कम करेगी।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

घरेलू ईवी विनिर्माण मजबूत

भारत में बिकने वाले लगभग 80 प्रतशित ईवी देश में ही निर्मित होते हैं। इस मामले में भारत उन क्षेत्रों की श्रेणी में आता है जैसे यूरोपीय संघ और जापान, जहां ईवी की मांग मुख्यतः स्थानीय उत्पादन से पूरी होती है।

भारी वाहनों का विद्युतीकरण बड़ा अवसर

भारत उन चुनिंदा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में है, जहां भारी वाहनों के लिए दीर्घकालिक शून्य-उत्सर्जन महत्वाकांक्षाएं निर्धारित की गई हैं। माल परिवहन का विद्युतीकरण भविष्य में उत्सर्जन कटौती का एक प्रमुख स्रोत बन सकता है।

वैश्विक स्तर पर बड़ी कटौती की संभावना

भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते परिवहन क्षेत्र को देखते हुए, ईवी अपनाने से वैश्विक सड़क परिवहन उत्सर्जन में सबसे बड़ी मात्रात्मक कटौतियों में से एक संभव है।

नीतिगत पहलें

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत में ईवी संक्रमण मुख्यतः नीतिगत उपायों पर निर्भर करेगा जैसे प्रस्तावित ईंधन दक्षता मानक, शून्य-उत्सर्जन वाहन लक्ष्य और राज्य स्तरीय ईवी नीतियां।

2030 के बाद तेजी

हालांकि वर्तमान में ईवी की बिक्री हिस्सेदारी सीमित है, लेकिन विश्लेषण दर्शाता है कि 2030 के दशक में राष्ट्रीय और राज्य नीतियों के प्रभावी होने के साथ ईवी अपनाने की गति तेज होगी।

दुनिया के सबसे बड़े और तेज़ी से बढ़ते परिवहन बाजारों में से एक होने के कारण, अगले दशक में भारत के निर्णयों का वैश्विक प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहनों और आगे चलकर भारी माल परिवहन में बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने से वैश्विक उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

आईसीसीटी के वरिष्ठ शोधकर्ता अरिजीत सेन ने कहा, ““भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का घरेलू निर्माण मजबूत है। सरकार ईंधन दक्षता के नियम और शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य तय कर रही है। कई राज्यों की अपनी ईवी नीतियां भी हैं। इन सबके कारण भारत तेजी से ईवी की ओर बढ़ सकता है। इससे जलवायु और वायु गुणवत्ता दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।”