तीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
आपदा

चक्रवात ‘अर्नब’ का आंध्र प्रदेश तट पर कहर, 84 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं, भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त; 91 ट्रेनें और 21 उड़ानें रद्द

Dayanidhi

  • चक्रवात अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं और ऊंची समुद्री लहरों से जनजीवन प्रभावित हुआ।

  • प्रशासन ने 84,396 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और राज्यभर में 2,131 राहत शिविरों की व्यवस्था की।

  • तूफान के चलते 91 ट्रेनें और 21 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

  • अधिकारियों को राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधाओं और बिजली बहाली की तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश ।

  • काकीनाडा में बाढ़ में फंसे सात लोगों के बचाव की सूचना मिली, जबकि राहत दलों को सतर्क रखा गया।

🔴 चक्रवात अर्नब अपडेट : 7:30 बजे सुबह

बंगाल की खाड़ी से उठे बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। आज, बुधवार को तूफान की लैंडफॉल प्रक्रिया जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, तूफान का केंद्र तट के काफी करीब था और इसकी लैंडफॉल प्रक्रिया अगले तीन घंटे तक जारी रहने की आशंका है। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में उठती ऊंची लहरों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

प्रशासन ने हालात को देखते हुए बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान शुरू किया। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के मुताबिक, राज्य में 84,396 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया।

135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात का केंद्र पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में 16.4 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 82.0 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित था। यह नरसापुर से लगभग 30 किमी पूर्व, यनम से 45 किमी दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से 70 किमी दक्षिण-पश्चिम में था।

तूफान के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और बापटला से विशाखापत्तनम के बीच, यनम के दक्षिण में तट पार करने का अनुमान था। इस दौरान हवाओं की अधिकतम रफ्तार 135 किमी से लेकर 150 किमी प्रति घंटे तक रहने की आशंका जताई गई।

अनकापल्ली, विशाखापत्तनम, काकीनाडा और कोनसीमा जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया। कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए। श्रीकाकुलम में भी भारी बारिश दर्ज की गई।

84 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला

तूफान के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की तैयारी रखने को भी कहा।

राज्य के 20 जिलों में 2,131 राहत शिविरों की पहचान की गई। वहीं, 18 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ लोगों को सतर्क रहने की सूचना दी गई। समुद्र में जाने वाली 30 हजार से अधिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं को सुरक्षित कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए 1,087 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया। अस्पतालों में 8,281 आपातकालीन बिस्तरों की व्यवस्था की गई और 1,274 एंबुलेंस तैयार रखी गईं। सांप काटने की घटनाओं से निपटने के लिए 21,536 खुराक एंटी-स्नेक वेनम का भंडार रखा गया। इसके अलावा, करीब 5,000 गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पहुंचाया गया।

रेल और हवाई सेवाओं पर असर

चक्रवात के कारण रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। मंगलवार और बुधवार को कम से कम 91 ट्रेनें रद्द की गईं। दक्षिणी तट के 53 मार्गों पर रेल सेवाएं रोक दी गईं, जबकि पूर्वी क्षेत्र में 12 और ओडिशा में कम से कम 26 ट्रेनें रद्द होने की सूचना मिली।

विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों पर मंगलवार को 21 उड़ानें रद्द कर दी गईं। विजयवाड़ा हवाई अड्डे पर पांच उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें इंडिगो की चार और एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक उड़ान शामिल थी।

समुद्र में एक से दो मीटर तक ऊंची लहरें उठने से उप्पाडा-काकीनाडा मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। तटीय इलाकों में दुकानें बंद रहीं और समुद्र तटों पर लहरें टकराने के दृश्य सामने आए।

बाढ़ में फंसे लोगों को बचाया गया

काकीनाडा के बॉम्बे कट्टा इलाके में भारी बारिश और समुद्री पानी भरने से चार लोग बाढ़ में फंस गए। ये लोग सुबह काम पर निकले थे, लेकिन पानी से घिर जाने के कारण रात तक अपने ठिकाने से बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलने पर पुलिस ने अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित निकाला और घर भेज दिया।

काकीनाडा एंकरज पोर्ट स्थित केंद्रीय जल आयोग के गोदामों में भी तीन लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। परिसर में बारिश और समुद्री पानी भर गया था तथा बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। इससे रात की पाली में काम कर रहे कर्मचारी बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

एक निजी कंपनी के कर्मचारी जी. राजू ने बताया कि तूफान के दौरान वह दोपहर की पाली में काम करते हुए फंस गए थे। बाद में बचाव दल मौके पर पहुंचा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

राहत और जरूरी सेवाओं पर जोर

प्रशासन ने पानी के टैंकर, जनरेटर और पानी साफ करने वाले आरओ संयंत्र तैयार रखे। राज्य की 14,686 राशन दुकानों में दो महीने का जरूरी सामान जमा किया गया। वहीं, 35.96 लाख किसानों को मौसम को लेकर सलाह जारी की गई।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, नौसेना और तटरक्षक बल को भी सतर्क रखा गया। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की जान बचाने, राहत सामग्री पहुंचाने और बिजली-पानी जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करने की है।