भारत में 2022 में स्तन कैंसर के करीब 1.92 लाख नए मामले सामने आए, महिलाओं में यह सबसे आम कैंसर रहा।
भारत में 2022 के दौरान महिलाओं में सामने आए कुल कैंसर मामलों में स्तन कैंसर की हिस्सेदारी 26.6 प्रतिशत रही।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में स्तन कैंसर से करीब 6.94 लाख लोगों की मौत हुई।
2024 में 186 देशों में से 164 देशों में महिलाओं के बीच स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर रहा।
हर साल 18 अगस्त को विश्व स्तन कैंसर अनुसंधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन स्तन कैंसर के इलाज और इससे बचाव के लिए हो रहे शोध को याद करने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। इसका मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर की जल्द पहचान, बेहतर इलाज और भविष्य में इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम को बढ़ावा देना है।
महिलाओं में सबसे आम कैंसर
स्तन कैंसर आज भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन चुका है। ग्लोबोकैन 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्ष 2022 में करीब 14.13 लाख नए कैंसर के मामले सामने आए। इनमें महिलाओं में स्तन कैंसर के करीब 1.92 लाख नए मामले थे। यह महिलाओं में पाए जाने वाले सभी कैंसर का लगभग 26.6 प्रतिशत था।
देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में महिलाओं में होने वाले कैंसर में स्तन कैंसर की हिस्सेदारी काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र, कम शारीरिक गतिविधि और कई अन्य कारणों के चलते इसके मामलों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है।
देर से पहचान बड़ी चुनौती
भारत में स्तन कैंसर के इलाज के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक बीमारी की देर से पहचान है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं या जांच कराने में देरी करती हैं। ऐसे में बीमारी का पता अक्सर आगे की अवस्था में चलता है, जिससे इलाज मुश्किल हो सकता है।
स्तन में गांठ, आकार में अचानक बदलाव, त्वचा में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्राव या लंबे समय तक कोई अन्य बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हालांकि हर गांठ कैंसर नहीं होती, इसलिए खुद से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
कम उम्र में भी सामने आ रहे मामले
स्तन कैंसर को केवल अधिक उम्र की महिलाओं की बीमारी मानना सही नहीं है। भारत में कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 25 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में भी बड़ी संख्या में मामले पाए जाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है और 50 से 64 वर्ष की उम्र में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।
गुजरात में राज्य सरकार ने महिलाओं को नियमित स्तन कैंसर जांच कराने की सलाह दी है। सरकार के अनुसार, राज्य में महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर में स्तन कैंसर की हिस्सेदारी 31.2 प्रतिशत है। अहमदाबाद के गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में साल 2025 में स्तन कैंसर के 1,541 नए मामले दर्ज किए गए।
दुनिया के लिए भी गंभीर चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन के (डब्ल्यूएचओ) अनुसार, स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक है। बड़ी संख्या में महिलाओं में इसका कोई खास ज्ञात जोखिम कारक नहीं होता। यानी केवल पारिवारिक इतिहास या किसी एक कारण के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किस महिला को स्तन कैंसर होगा।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर में स्तन कैंसर से करीब 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई। इसी साल 186 देशों में से 164 देशों में महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर रहा। यह आंकड़ा बताता है कि स्तन कैंसर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, स्तन कैंसर के करीब 80 प्रतिशत मामले ऐसी महिलाओं में होते हैं, जिनमें उम्र और महिला होना छोड़कर कोई विशेष जोखिम कारक नहीं होता। इसलिए केवल उन महिलाओं को ही जांच की जरूरत है जिनके परिवार में पहले किसी को स्तन कैंसर हुआ हो, ऐसा मानना सही नहीं है। हालांकि स्तन कैंसर महिलाओं में अधिक पाया जाता है, लेकिन पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। दुनिया में स्तन कैंसर के लगभग 0.5 से 1 प्रतिशत मामले पुरुषों में पाए जाते हैं।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि स्तन कैंसर से होने वाली मौतों और बीमारी के बोझ को कम करने के लिए समय पर जांच और जल्द पहचान बेहद जरूरी है। इसके साथ सही और पूरा इलाज, बीमारी के बाद पुनर्वास तथा जरूरत पड़ने पर पेलिएटिव केयर भी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
समय पर जांच और इलाज से बढ़ती उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन कैंसर की समय पर पहचान और सही इलाज से मरीजों के बेहतर जीवन की संभावना बढ़ सकती है। बीमारी की स्थिति के अनुसार डॉक्टर सर्जरी, दवाओं, रेडिएशन या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।
इलाज के साथ मरीजों को मानसिक सहयोग और पुनर्वास की भी जरूरत होती है। गंभीर बीमारी की स्थिति में पेलिएटिव केयर मरीज को दर्द और अन्य परेशानियों से राहत देने के साथ बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती है।
जागरूकता सबसे जरूरी
विश्व स्तन कैंसर अनुसंधान दिवस हमें याद दिलाता है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल नए इलाज की खोज तक सीमित नहीं है। जागरूकता, समय पर जांच और सही चिकित्सा सलाह भी उतनी ही जरूरी हैं।
महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार और समाज को भी महिलाओं को समय पर डॉक्टर से सलाह लेने और जरूरी जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। स्तन कैंसर की जल्द पहचान और बेहतर उपचार की दिशा में उठाया गया हर कदम कई जिंदगियां बचाने में मदद कर सकता है।