विश्व मेनोपॉज दिवस हर साल 18 अक्टूबर को मनाया जाता है, ताकि महिलाओं को हार्मोनल बदलावों के प्रति जागरूक किया जा सके।
पेरिमेनोपॉज के शुरुआती संकेत 30 की उम्र में भी दिख सकते हैं, जिनमें पीरियड्स की अनियमितता प्रमुख है।
नींद टूटना, थकान, बालों का झड़ना, ब्रेन फॉग और मूड में बदलाव पेरिमेनोपॉज के संभावित लक्षण हो सकते हैं।
मां या नानी में जल्दी मेनोपॉज का इतिहास महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी चर्चा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर डॉक्टर की सलाह मेनोपॉज के दौरान बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मददगार हैं।
हर साल 18 अक्टूबर को विश्व मेनोपॉज दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद महिलाओं को मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के बारे में जागरूक करना, इससे जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करना और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देना है।
आमतौर पर मेनोपॉज 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि इससे पहले होने वाले हार्मोनल बदलावों के संकेत 30 की उम्र में भी दिखाई दे सकते हैं? कई बार महिलाएं इन बदलावों को काम का तनाव, बढ़ती उम्र या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। ऐसे में जरूरी है कि शरीर के संकेतों को समझा जाए और समय रहते सही कदम उठाए जाएं।
30 की उम्र में भी क्यों दिख सकते हैं लक्षण?
मेनोपॉज अचानक नहीं होता। इससे पहले शरीर एक ऐसे दौर से गुजरता है, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। ये हार्मोन महिलाओं के मासिक धर्म चक्र और प्रजनन स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हार्मोनल बदलाव 30 के दशक के मध्य या आखिरी वर्षों से शुरू हो सकते हैं। हालांकि हर महिला का अनुभव अलग होता है और केवल कुछ लक्षणों के आधार पर पेरिमेनोपॉज की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पीरियड्स में बदलाव हो सकता है पहला संकेत
पेरिमेनोपॉज के शुरुआती संकेतों में मासिक धर्म चक्र में बदलाव शामिल हो सकते हैं। किसी महिला को पहले से ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है, तो किसी के पीरियड्स हल्के हो सकते हैं। कभी पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं, तो कभी उनके बीच का अंतर बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आपके पीरियड्स का पैटर्न बदल रहा है, तो इसे सिर्फ तनाव या थकान का असर मानकर न छोड़ें। अपने मासिक धर्म की तारीखों, रक्तस्राव और दूसरे लक्षणों पर ध्यान दें। बहुत ज्यादा रक्तस्राव, लगातार अनियमित पीरियड्स या असामान्य दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
नींद टूटना, थकान और ब्रेन फॉग भी हैं संकेत
हार्मोनल बदलावों का असर सिर्फ पीरियड्स तक सीमित नहीं रहता। कुछ महिलाओं को त्वचा रूखी लगने लगती है, बाल पतले होने लगते हैं या ज्यादा झड़ने लगते हैं। दिनभर थकान महसूस होना, ध्यान लगाने में परेशानी और चीजें भूलने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
कुछ महिलाओं की नींद भी प्रभावित होती है। जो महिलाएं पहले रातभर अच्छी नींद लेती थीं, वे अचानक रात के तीन या चार बजे जागने लगती हैं और दोबारा सोने में परेशानी महसूस करती हैं।
इसके अलावा स्तनों में दर्द या भारीपन, पीरियड्स से पहले होने वाली तकलीफों में बढ़ोतरी, सिरदर्द, माइग्रेन और हड्डियों या जोड़ों में दर्द भी हो सकता है। योनि में सूखापन, पेशाब से जुड़ी आदतों में बदलाव और यौन इच्छा में कमी भी कुछ महिलाओं में देखी जा सकती है।
हालांकि इन सभी लक्षणों के पीछे पेरिमेनोपॉज ही हो, यह जरूरी नहीं है। थायरॉइड की समस्या, खून की कमी, तनाव और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।
परिवार का इतिहास भी हो सकता है अहम
मेनोपॉज किस उम्र में होगा, इसमें आनुवंशिक कारणों की भूमिका हो सकती है। यदि मां या नानी को अपेक्षाकृत कम उम्र में मेनोपॉज हुआ था, तो इस जानकारी को डॉक्टर के साथ साझा करना उपयोगी हो सकता है।
कुछ उत्पादों और पैकेजिंग में मौजूद ऐसे रसायनों को लेकर भी चिंता जताई जाती है, जो शरीर के हार्मोनल तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इनका किसी महिला में मेनोपॉज जल्दी शुरू होने से सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें इसका पक्का कारण मानना सही नहीं होगा।
सही देखभाल से आसान हो सकता है सफर
पेरिमेनोपॉज के दौरान संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद बेहद महत्वपूर्ण हैं। खाने में प्रोटीन, फल, सब्जियां और कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करें। हड्डियों की सेहत के लिए विटामिन डी और कैल्शियम की जरूरत पर भी डॉक्टर से सलाह लें।
यदि नींद की परेशानी, मूड में बदलाव या दूसरे लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो उन्हें चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी इतिहास के आधार पर उचित जांच और इलाज का सुझाव दे सकते हैं।
याद रखें, शरीर में होने वाले बदलावों को समझना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सेहत के प्रति जागरूकता है। मेनोपॉज जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है। सही जानकारी, समय पर सलाह और अच्छी जीवनशैली के साथ इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।