दुनिया में लगभग 13.3 करोड़ लड़कियां आज भी स्कूल से बाहर हैं और शिक्षा से वंचित हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

दुनिया में हर पांच में से एक लड़की का बाल विवाह होता है, 13 करोड़ से अधिक लड़कियां स्कूल से वंचित हैं

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: दुनिया में हर पांच में से एक लड़की की शादी 18 साल से पहले हो रही है, 13.3 करोड़ लड़कियां स्कूल से वंचित हैं और 6.8 करोड़ बाल विवाह रोके गए हैं।

Dayanidhi

  • दुनिया में हर पांच में से एक लड़की की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है।

  • आज दुनिया में लगभग 65 करोड़ महिलाएं और लड़कियां ऐसी हैं, जिनकी शादी बचपन में हुई थी।

  • दुनिया में लगभग 13.3 करोड़ लड़कियां आज भी स्कूल से बाहर हैं और शिक्षा से वंचित हैं।

  • 15 से 19 वर्ष की लगभग हर चार में से एक विवाहित या साथी के साथ रहने वाली लड़की हिंसा झेल चुकी है।

  • पिछले 25 वर्षों में शिक्षा, कानूनी सुधार और सामाजिक सुरक्षा के प्रयासों से लगभग 6.8 करोड़ बाल विवाह रोके गए हैं।

दुनिया भर में हर साल 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके सामने आने वाली समस्याओं को दूर करना है। इस साल की थीम “बाल विवाह समाप्त करें और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करें ” है। यह संदेश समाज को याद दिलाता है कि हर लड़की को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

बाल विवाह आज भी बड़ी समस्या

दुनिया के कई देशों में बाल विवाह आज भी एक गंभीर समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया में हर पांच में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है। आज लगभग 65 करोड़ महिलाएं और लड़कियां ऐसी हैं, जिनकी शादी बचपन में ही कर दी गई थी।

बाल विवाह के कारण लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। कम उम्र में शादी होने से उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। कई लड़कियों को घरेलू हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक दबाव और पुरानी परंपराएं इस समस्या को बढ़ाती हैं।

शिक्षा से बदल सकता है भविष्य

शिक्षा हर लड़की का अधिकार है। पढ़ी-लिखी लड़की अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकती है और अपने जीवन के फैसले खुद ले सकती है। शिक्षा से उसे रोजगार पाने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिलते हैं।

दुनिया में आज भी लगभग 13.3 करोड़ लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। कई लड़कियां आर्थिक परेशानी, घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक भेदभाव के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। इसलिए जरूरी है कि हर लड़की को स्कूल जाने, आगे पढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिले।

सरकार, परिवार और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी लड़की की पढ़ाई कम उम्र में शादी या अन्य कारणों से न रुके।

लड़कियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य भी जरूरी

लड़कियों के विकास के लिए केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी जरूरी हैं। किशोरावस्था में लड़कियों को सही स्वास्थ्य जानकारी, पोषण और उचित चिकित्सा सुविधाएं मिलनी चाहिए।

कई लड़कियां अपने घरों, स्कूलों और समाज में हिंसा तथा भेदभाव का सामना करती हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद लड़कियों को सहायता देना आवश्यक है। परिवारों को भी बेटियों की बात सुननी चाहिए और उन्हें अपनी समस्याएं खुलकर बताने का अवसर देना चाहिए।

समाज की सोच में बदलाव जरूरी

बाल विवाह रोकने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। माता-पिता, शिक्षकों और समुदाय के लोगों को समझना होगा कि लड़कियां भी लड़कों की तरह समान अधिकार और अवसर पाने की हकदार हैं।

लड़कियों को अपनी पसंद, शिक्षा और भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। सरकार को बाल विवाह रोकने वाले कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। साथ ही, गरीब परिवारों को शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

प्रगति संभव है

पिछले 25 वर्षों में शिक्षा, कानूनी सुधार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के कारण दुनिया में लगभग 6.8 करोड़ बाल विवाह रोके जाने का अनुमान है। यह दिखाता है कि सही कदम उठाकर इस समस्या को कम किया जा सकता है।

हालांकि अभी बहुत काम करना बाकी है। विशेष रूप से संकट और मानवीय सहायता की जरूरत वाले क्षेत्रों में रहने वाली लड़कियों को शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

हर लड़की को मिले आगे बढ़ने का अवसर

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि किसी भी लड़की को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा। लड़कियों की

आवाज को महत्व देना और उन्हें अपने जीवन से जुड़े फैसलों में शामिल करना जरूरी है।

जब लड़कियां सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर होती हैं, तो उनका जीवन ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज का भविष्य भी बेहतर बनता है। इसलिए बाल विवाह रोकना और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

हर लड़की को पढ़ने, आगे बढ़ने और अपनी पसंद का जीवन चुनने का अवसर मिलना चाहिए। यही एक समान, सुरक्षित और बेहतर समाज की पहचान है।