थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, हृदय, मस्तिष्क और प्रजनन तंत्र को नियंत्रित करते हैं और संतुलन बिगड़ने पर कई समस्याएं होती हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति, भारत में चार करोड़ से अधिक लोग थायरॉइड पीड़ित

विश्व थायरॉइड दिवस: भारत में 2025 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 51.4% किशोरियों और 44.5% महिलाओं में थायरॉयड संबंधी असंतुलन पाया गया।

Dayanidhi

  • विश्व स्तर पर हर 10 में 1 व्यक्ति थायरॉयड रोग से प्रभावित है, अधिकतर मामले समय पर निदान से वंचित रहते हैं।

  • भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड से पीड़ित हैं, जिनमें बड़ी संख्या को अपनी बीमारी की जानकारी नहीं है।

  • 2025 अध्ययन के अनुसार 51.4% किशोरियों और 44.5% महिलाओं में थायरॉयड असंतुलन पाया गया, जो गंभीर स्वास्थ्य संकेत है।

  • थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, हृदय, मस्तिष्क और प्रजनन तंत्र को नियंत्रित करते हैं और संतुलन बिगड़ने पर कई समस्याएं होती हैं।

  • विश्व थायरॉयड दिवस का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, नियमित जांच को प्रोत्साहित करना और जीवनशैली सुधार के माध्यम से रोकथाम सुनिश्चित करना है।

हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। थायरॉयड एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है और अक्सर इसके लक्षण सामान्य थकान या तनाव जैसे लगते हैं। इसलिए कई लोग समय पर इसका इलाज नहीं करा पाते। इस दिन लोगों को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि सही समय पर जांच, सही इलाज और जीवनशैली में सुधार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

थायरॉयड ग्रंथि क्या है

थायरॉयड ग्रंथि गर्दन के सामने एक तितली के आकार की छोटी ग्रंथि होती है। आकार में छोटी होने के बावजूद इसका शरीर में बहुत बड़ा काम होता है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है। थायरॉयड हार्मोन शरीर के कई अंगों जैसे दिल, मस्तिष्क, यकृत और प्रजनन तंत्र पर असर डालते हैं। जब इस ग्रंथि में गड़बड़ी होती है, तो पूरे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।

थायरॉयड हार्मोन का शरीर में कार्य

थायरॉयड हार्मोन शरीर की ऊर्जा और काम करने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। जब ये हार्मोन कम हो जाते हैं तो शरीर की गति धीमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति को थकान, वजन बढ़ना और सुस्ती महसूस हो सकती है। वहीं जब ये हार्मोन अधिक बनते हैं तो शरीर बहुत तेजी से काम करने लगता है, जिससे दिल की धड़कन बढ़ना, बेचैनी और वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ये हार्मोन दिल की धड़कन और रक्तचाप को भी नियंत्रित करते हैं। इनका असंतुलन दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा यह मस्तिष्क के कार्य, याददाश्त और मूड पर भी असर डालते हैं। थायरॉयड की समस्या से व्यक्ति को चिंता, तनाव या ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। महिलाओं में यह हार्मोन मासिक धर्म और प्रजनन क्षमता पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं।

भारत और दुनिया में बढ़ती समस्या

आज दुनिया भर में लगभग हर 10 में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में थायरॉयड की समस्या से प्रभावित है, लेकिन इनमें से बहुत से लोग इसकी जानकारी नहीं रखते। भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। शोध पत्र के मुताबिक, लगभग 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड से प्रभावित हैं, जिनमें से अधिकतर को इसकी जानकारी तक नहीं होती।

भारत में 2025 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 51.4 फीसदी किशोरियों और 44.5 फीसदी महिलाओं में थायरॉयड संबंधी असंतुलन पाया गया।

यह समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और लोग इसे सामान्य कमजोरी या जीवनशैली की थकान समझ लेते हैं। कई बार सही समय पर जांच न होने के कारण बीमारी बढ़ जाती है और इलाज जटिल हो जाता है।

महिलाओं और युवाओं पर बढ़ता असर

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि 20 से 30 वर्ष की उम्र की महिलाओं में थायरॉयड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शहरी जीवन में तनाव, अनियमित नींद, गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि इसका बड़ा कारण हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि किशोरियों और महिलाओं में थायरॉयड असंतुलन की दर काफी अधिक है।

यह समस्या महिलाओं के मासिक धर्म, गर्भधारण और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। युवाओं में यह बीमारी धीरे-धीरे उनकी ऊर्जा, पढ़ाई और काम करने की क्षमता को भी प्रभावित करती है।

जीवनशैली और रोकथाम का महत्व

थायरॉयड की बीमारी को केवल दवाओं से नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार से भी नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम बहुत जरूरी हैं। तनाव को कम करना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी आवश्यक है। सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।

थायरॉयड एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। इसकी समय पर पहचान और सही उपचार से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। विश्व थायरॉइड दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और नियमित जांच कराना कितना जरूरी है। सही खानपान, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह लेकर इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।