विश्व मस्तिष्क दिवस पर जोर, बचपन से बुजुर्गों तक दिमाग की देखभाल, स्वस्थ आदतों और जागरूकता से बेहतर मानसिक स्वास्थ्य संभव। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी किसी न किसी मस्तिष्क संबंधी समस्या जूझ रही है

विश्व मस्तिष्क दिवस 2026: स्वस्थ आदतों, पोषण और समय पर इलाज से जीवनभर बेहतर रखी जा सकती है दिमाग की कार्यक्षमता

Dayanidhi

  • विश्व मस्तिष्क दिवस पर जोर, बचपन से बुजुर्गों तक दिमाग की देखभाल, स्वस्थ आदतों और जागरूकता से बेहतर मानसिक स्वास्थ्य संभव।

  • दुनिया में बढ़ रहे न्यूरोलॉजिकल रोगों के बीच विशेषज्ञों की सलाह, संतुलित आहार और नियमित जीवनशैली से मस्तिष्क रखें सुरक्षित।

  • अल्जाइमर, पार्किंसन और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर देखभाल, इलाज और मस्तिष्क स्वास्थ्य की जानकारी जरूरी।

  • ओमेगा-3, विटामिन बी, मैग्नीशियम और प्राकृतिक सप्लीमेंट दिमागी कार्यक्षमता में सहायक, लेकिन विशेषज्ञ सलाह के बाद ही करें उपयोग।

  • योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और स्वस्थ भोजन से याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद।

मस्तिष्क यानी दिमाग हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह केवल सोचने, समझने और याद रखने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर की हर गतिविधि को नियंत्रित करता है। आमतौर पर लोग दिमाग की सेहत को बढ़ती उम्र से जोड़ते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क की देखभाल बचपन से ही शुरू हो जानी चाहिए। स्वस्थ आदतें अपनाकर जीवन के हर पड़ाव पर दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।

विश्व मस्तिष्क दिवस हर साल 22 जुलाई को मनाया जाता है। साल 2026 में इसकी थीम ‘ब्रेन हेल्थ: एक्सेस फॉर ऑल’ यानी ‘सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य’ रखी गई है। इस अभियान का उद्देश्य दुनिया भर में न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सभी लोगों तक बेहतर इलाज की पहुंच सुनिश्चित करना है।

न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ता खतरा

दुनिया में 3.4 अरब से अधिक लोग यानी दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी किसी न किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या से प्रभावित हैं। इनमें अल्जाइमर, पार्किंसन रोग, मिर्गी, स्ट्रोक और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी बीमारियां शामिल हैं। ये बीमारियां लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं और कई बार लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है।

हालांकि हर व्यक्ति को समय पर इलाज और विशेषज्ञों की सुविधा नहीं मिल पाती। कई जगहों पर इलाज की ऊंची लागत, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, लंबा इंतजार और बीमारी से जुड़ी सामाजिक झिझक जैसी समस्याएं लोगों के सामने आती हैं। विश्व मस्तिष्क दिवस का उद्देश्य ऐसी असमानताओं को कम करना है।

अच्छी जीवनशैली से मजबूत रहेगा दिमाग

विशेषज्ञों के अनुसार, दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। रोजमर्रा की अच्छी आदतें भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव को कम करने की कोशिश दिमाग की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करती है।

योग और ध्यान तनाव कम करने में सहायक हो सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से बचना और शराब का अधिक सेवन न करना भी दिमाग के लिए फायदेमंद है। बचपन से ही पढ़ने, नई चीजें सीखने और मानसिक गतिविधियों में भाग लेने की आदत दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है।

कुछ पोषक तत्व दे सकते हैं अतिरिक्त सहारा

स्वस्थ आहार के साथ कुछ सप्लीमेंट यानी पोषक तत्वों की गोलियां या कैप्सूल भी दिमाग की सेहत में मदद कर सकते हैं। हालांकि ये किसी बीमारी का इलाज नहीं करते और न ही संतुलित भोजन की जगह ले सकते हैं। किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। इसमें मौजूद डीएचए मस्तिष्क की कोशिकाओं का अहम हिस्सा होता है और याददाश्त व सीखने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। फिश ऑयल और अल्गल ऑयल इसके अच्छे स्रोत हैं।

विटामिन और प्राकृतिक सप्लीमेंट की भूमिका

विटामिन बी कॉम्प्लेक्स भी तंत्रिका तंत्र के लिए जरूरी माना जाता है। विटामिन बी6, बी9 और बी12 शरीर में होमोसिस्टीन नामक तत्व के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जिसका संबंध उम्र के साथ होने वाली मानसिक कमजोरी से जोड़ा जाता है।

गिंको बिलोबा एक लोकप्रिय हर्बल सप्लीमेंट है, जिसका उपयोग याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह दिमाग में रक्त संचार को बेहतर बनाने और ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाव में मदद कर सकता है।

मैग्नीशियम शरीर में कई जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी खनिज है। यह नसों के कामकाज और दिमाग के संकेतों के आदान-प्रदान में भूमिका निभाता है। इसकी कमी से थकान, ध्यान लगाने में परेशानी और नींद की समस्या हो सकती है।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां भी चर्चा में

लायंस मेन मशरूम और ब्राह्मी जैसी प्राकृतिक चीजें भी दिमाग की सेहत के लिए लोकप्रिय हो रही हैं। लायंस मेन के बारे में शुरुआती शोध बताते हैं कि यह तंत्रिका कोशिकाओं के विकास में मदद कर सकता है। वहीं, आयुर्वेद में ब्राह्मी का इस्तेमाल लंबे समय से याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है।

विश्व मस्तिष्क दिवस हमें याद दिलाता है कि दिमाग की देखभाल किसी एक उम्र में नहीं, बल्कि पूरे जीवन की जरूरत है। सही खानपान, स्वस्थ दिनचर्या और समय पर चिकित्सकीय सलाह से हम अपने मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रख सकते हैं।