राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन के तहत 17 जनजातीय राज्यों में 7.25 करोड़ से अधिक लोगों की जांच, महाराष्ट्र में 1.11 करोड़ स्क्रीनिंग पूरी।
राजस्थान में अनीमिया की चुनौती बरकरार, डूंगरपुर की 72.6 प्रतिशत महिलाएं प्रभावित, गर्भवती महिलाओं में भी चिंता बढ़ी।
भारत वर्ष 2025 में दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग देश बना, अलंग-सोसिया यार्ड ने 98 प्रतिशत कार्य संभाला।
पोषण 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश को 2,145.42 करोड़ रुपए जारी, बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा लाभ।
स्वास्थ्य बजट 2017-18 के 47,353 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 1,01,709 करोड़ रुपए पहुंचा।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन
संसद का मानसून सत्र जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय देश से सिकल सेल रोग को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (एनएससीएईएम) चला रहा है। इस मिशन के तहत 17 जनजातीय बहुल राज्यों में 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है।
यह जांच जिला अस्पताल से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में की जा रही है। सरकार का उद्देश्य रोग की समय पर पहचान करना और उचित उपचार उपलब्ध कराना है।
नड्डा ने कहा कि 26 जुलाई 2026 तक देश के जनजातीय क्षेत्रों में 7.25 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। केवल महाराष्ट्र में ही 1.11 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हुई है। यह मिशन जनजातीय समाज के स्वास्थ्य में सुधार लाने की दिशा में एक अहम कदम है।
राजस्थान में महिलाओं में अनीमिया की स्थिति
अनीमिया या खून की कमी को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में कहा कि महिलाओं में अनीमिया आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएच-5, 2019-21) के अनुसार, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की दर 46.3 प्रतिशत है। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की अनुसूचित जनजाति की महिलाओं में यह दर 61.6 प्रतिशत है।
पटेल ने बताया कि राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 15 से 49 वर्ष की सभी महिलाओं में अनीमिया की दर 72.6 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पूरे राज्य में यह दर 54.4 प्रतिशत है। सरकार अनीमिया की रोकथाम के लिए पोषण, आयरन की गोलियां और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।
अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड की उपलब्धि
सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय में मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में बताया कि भारत ने वर्ष 2025 में जहाजों के पुनर्चक्रण के क्षेत्र में दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास (यूएनसीटीएडी) की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई है।
भारत में साल 2024 में 1.86 मिलियन ग्रॉस टन जहाजों का पुनर्चक्रण हुआ था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 2.99 मिलियन ग्रॉस टन हो गया। यह लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि है। गुजरात का अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड, जिसकी स्थापना 1982-83 में हुई थी, देश के लगभग 98 प्रतिशत शिप रीसाइक्लिंग कार्य को संभालता है। यह उपलब्धि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाती है।
उत्तर प्रदेश में पोषण 2.0 के लिए धनराशि
सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए भारत सरकार मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 चला रही है। यह योजना देश के सभी पात्र लाभार्थियों के लिए है। इसके अंतर्गत छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा पूर्वोत्तर राज्यों और आकांक्षी जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को लाभ दिया जाता है।
ठाकुर ने बताया कि योजना का लाभ पाने के लिए लाभार्थियों का ई-केवाईसी और फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के माध्यम से सत्यापन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश को इस योजना के तहत 2,145.42 करोड़ रुपये जारी किए गए। यह योजना बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
बच्चों के लिए पौष्टिक आहार
सदन में उठाए गए एक और सवाल का जवाब देते हुए आज, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत बच्चों और महिलाओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत टेक होम राशन (टीएचआर), सुबह का नाश्ता और गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। छह से तेईस महीने तक के बच्चों के लिए टेक होम राशन आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिया जाता है। इसके वितरण में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि योजना के मुताबिक, छह से बारह महीने के बच्चों को 200 कैलोरी ऊर्जा और 8 से 10 ग्राम प्रोटीन दिया जाता है। एक से तीन वर्ष तथा तीन से छह वर्ष के बच्चों को 400 कैलोरी ऊर्जा और 15 से 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ सात आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भी दिए जाते हैं। ठाकुर ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ता बजट
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा रही है। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2017-18 में विभाग का बजट 47,353 करोड़ रुपये था। यह बढ़कर वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में 1,01,709 करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि में बजट में 114.79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जाधव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य देश के हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। बढ़ा हुआ बजट अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता करेगा। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को बेहतर उपचार तथा स्वास्थ्य सेवाएं हासिल होंगी।