साइनोबैक्टीरिया यूवी किरणों से बचाव और एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देने वाले माइकोस्पोरिन जैसे यौगिक बनाते हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

थाईलैंड के गर्म पानी के झरनों में पाया गया यूवी किरणों से बचाने वाला नया प्राकृतिक सनस्क्रीन

थाईलैंड के गर्म झरनों के साइनोबैक्टीरिया से खोजा गया नया प्राकृतिक अल्ट्रावायलेट (यूवी)-रक्षक यौगिक, सुरक्षित व पर्यावरण-अनुकूल सनस्क्रीन के लिए आशाजनक समाधान

Dayanidhi

  • साइनोबैक्टीरिया यूवी किरणों से बचाव और एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देने वाले माइकोस्पोरिन जैसे यौगिक बनाते हैं।

  • नई खोज जीआईसीएच 326: थाईलैंड के गर्म झरनों में ग्लोकोकैप्सा प्रजाति ने बीटा-ग्लूकोज-बाउंड हाइड्रॉक्सी माइकोस्पोरिन-सार्कोसिन नामक नया यूवी-रक्षक यौगिक बनाया।

  • जीआईसीएचएस326 में तीन अनोखी रासायनिक परिवर्तन-ग्लाइकोसिलेशन, हाइड्रॉक्सी लोशन और मिथाइलेशन-इसके स्थायित्व और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ाते हैं।

  • यूवी-ए, यूवी-बी और उच्च नमक की स्थिति में जीआईसीएच 326 का उत्पादन बढ़ता है, लेकिन गर्मी से सक्रिय नहीं होता।

  • जीआईसीएच 326 प्राकृतिक सनस्क्रीन, एंटी-एजिंग क्रीम और अन्य त्वचा-रक्षक उत्पादों के लिए सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।

सूरज की तेज किरणों से हमारी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) किरणों के संपर्क में रहने से सूरज की जलन, त्वचा की उम्र बढ़ना और त्वचा का कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसी कारण वैज्ञानिक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से त्वचा की रक्षा करने वाले नए पदार्थ खोजने में लगे हुए हैं। हाल ही में, वैज्ञानिकों ने थाईलैंड के गर्म पानी के झरनों में रहने वाले एक विशेष प्रकार के जीवाणु (साइनोबैक्टीरीया) से एक नया यूवी-प्रोटेक्टिव यौगिक खोजा है।

सायनोबैक्टीरिया और उनकी खासियत

साइनोबैक्टीरिया छोटे सूक्ष्म जीवाणु होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं और ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। ये कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। इन जीवाणुओं की एक खासियत यह है कि ये यूवी किरणों से बचाने वाले रासायनिक यौगिक बनाते हैं। इन्हें माइकोस्पोरिन जैसी अमीनो एसिड (मास) कहा जाता है।

मास छोटे और पानी में घुलनशील अणु होते हैं। ये यूवी किरणों को अवशोषित करते हैं, जिससे कोशिकाओं को सूरज से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही ये एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं और शरीर में उत्पन्न होने वाले हानिकारक रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (आरओएस) को नष्ट करते हैं।

नए यौगिक की खोज

शोधकर्ताओं ने थाईलैंड के बो ख्लुंग गर्म झरना से आठ गर्मी सहनशील साइनोबैक्टीरिया की प्रजातियां अलग कीं। इनमें से ग्लोकोकैप्सा प्रजाति बीआरएसजेड नामक प्रजाति ने यूवी-ए और यूवी-बी किरणों के संपर्क में आने पर एक नया यौगिक बनाया। इसे वैज्ञानिकों ने बीटा-ग्लूकोज-बाउंड हाइड्रॉक्सी माइकोस्पोरिन-सार्कोसिन (जीआईसीएच 326) नाम दिया।

जीआईसीटीएस 326 की विशेषताएं

जीआईसीटीएस 326 अन्य मास से अलग इसलिए है क्योंकि इसमें तीन तरह के रासायनिक परिवर्तन होते हैं -

  • ग्लाइकोसिलेशन यह यौगिक को अधिक स्थिर बनाता है और यूवी किरणों से बेहतर सुरक्षा देता है।

  • हाइड्रॉक्सी लोशन – यह एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

  • मिथाइलेशन – यह यौगिक की स्थिरता, यूवी अवशोषण और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को बढ़ाता है।

साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जीआईसीएच 326 का उत्पादन यूवी किरणों और उच्च नमक की स्थिति में बढ़ जाता है, लेकिन गर्मी से यह सक्रिय नहीं होता। इसके अलावा, यह यौगिक सामान्य मास की तुलना में अधिक फ्री-रैडिकल नष्ट करने की क्षमता रखता है।

प्राकृतिक सुरक्षा और विकास की समझ

यह खोज दिखाती है कि साइनोबैक्टीरिया ने कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशेष रासायनिक रास्ते विकसित किए हैं। जीआईसीएच 326 न केवल यूवी किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है बल्कि पर्यावरणीय दबावों को सहन करने में भी मदद करता है।

शोध के अनुसार, अत्यधिक कठिन वातावरण में रहने वाले साइनोबैक्टीरिया न केवल पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये विभिन्न शोध क्षेत्रों में नई खोजों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

भविष्य में उपयोग

जीआईसीएच 326 को सस्टेनेबल और बड़े पैमाने पर पैदा किया जा सकता है। इसका उपयोग प्राकृतिक सनस्क्रीन, एंटी-एजिंग क्रीम, स्किनकेयर उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स में किया जा सकता है। यह पारंपरिक रासायनिक यूवी फिल्टर का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हो सकता है।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि प्रकृति में अभी भी कई रासायनिक आश्चर्य छिपे हैं। कठिन वातावरण में रहने वाले साइनोबैक्टीरिया ऐसे दुर्लभ यौगिक प्रकट करते हैं, जो नई वैज्ञानिक खोज और टिकाऊ जैव-प्रौद्योगिकी के लिए प्रेरणा देते हैं।

इस शोध ने दिखाया कि गर्म पानी के झरनों में रहने वाले साइनोबैक्टीरिया यूवी किरणों और अन्य तनावों से बचने के लिए विशेष यौगिक उत्पन्न करते हैं। नया एमएए यौगिक जीआईसीएच 326 न केवल सूरज से सुरक्षा देता है बल्कि एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण त्वचा और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। यह खोज प्राकृतिक और सुरक्षित सनस्क्रीन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।