स्ट्रेट ऑफ होर्मूज का नक्शा। साभार- आईस्टॉक 
राजकाज

युद्ध के विनाशकारी नतीजे

भारत पर होर्मुज की नाकाबंदी का असर

Kiran Pandey

कृषि

उर्वरक: भारत के कुछ यूरिया निर्माताओं ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं या मेंटेनेंस का काम समय से पहले शुरू कर दिया है। ऐसा कतर से होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई रुकने के कारण हुआ है। यह गैस उत्पादन के लिए एक मुख्य कच्चा माल है।

किसान: बेंगलुरु में एलपीजी की कमी के कारण होटल बंद हो रहे हैं। इससे सब्जियों की मांग कम हो गई है। मांग घटने की वजह से सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

डेयरी: महाराष्ट्र और तमिलनाडु के डेयरी संचालकों का कहना है कि एलपीजी की कमी ने उनके दैनिक कामकाज को प्रभावित किया है। दूध को उबालने और पाश्चुराइजेशन के लिए एलपीजी बेहद जरूरी है।

उद्योग

सिरेमिक: गुजरात के मोरबी में लगभग एक-चौथाई सिरेमिक इकाइयां बंद हो गई हैं। इसका कारण प्रोपेन की आपूर्ति में कमी से पैदा हुआ ईंधन संकट है।

केमिकल: केमिकल निर्माताओं को जरूरत की केवल 40% गैस मिल रही है। इस कारण उन्हें उत्पादन कम करना पड़ा है। साथ ही कीमतों में 30-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद) के उद्योगों को सल्फर की आपूर्ति रुकने से सल्फ्यूरिक एसिड की कमी का सामना करना पड़ सकता है। अहमदाबाद (गुजरात) के वटवा इंडस्ट्री एसोसिएशन की स्थिति भी ऐसी ही है।

क्राफ्ट डिस्टिलरी: कर्नाटक में एलपीजी आपूर्ति बाधित होने से छोटे निर्माताओं पर मार पड़ी है। मैसूरु के पास एक क्राफ्ट रम डिस्टिलरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।

डिटर्जेंट: युद्ध ने उत्तर प्रदेश में डिटर्जेंट निर्माण को बाधित कर दिया है। डिटर्जेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाला ‘लीनियर अल्काइल बेंजीन’ नाम का केमिकल की आपूर्ति कट गई है। डिटर्जेंट में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की कीमतें 2.5 गुना बढ़ गई हैं।

फुटवियर: हरियाणा का बहादुरगढ़ एशिया के सबसे बड़े (नॉन-लेदर) फुटवियर हब में से एक है। यहां एलपीजी और सीएनजी की कमी के कारण 100 फुटवियर इकाइयां बंद हो गई हैं।

बिजली: काशीपुर में गैस आधारित प्लांट बंद होने से उत्तराखंड गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है।

आभूषण: इंदौर और लखनऊ में आभूषण निर्माण प्रभावित हुआ है। यहां गहनों को पिघलाने और डिजाइन करने के लिए गैस की जरूरत होती है। कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर रोक लगने से यह काम रुक गया है।

मध्यम एवं लघु उद्योग: हरियाणा में ऑटोमोटिव, गारमेंट और फुटवियर क्षेत्रों की लगभग 15,000 इकाइयां एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित हुई हैं।

पॉलीबैग: आंध्र प्रदेश के तिरुपुर में पॉलीबैग की कीमतों में करीब 80% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पाद ‘नैफ्था’ से प्राप्त कच्चे माल की कीमतों में आया भारी उछाल है।

प्लास्टिक: गुजरात का प्लास्टिक निर्माण क्षेत्र भारत के कुल प्लास्टिक उत्पादन का 35-40% हिस्सा है। यहां 10,000 से अधिक इकाइयां हैं। यह क्षेत्र कच्चे माल की बढ़ती लागत और ‘पीईटी’ की कम आपूर्ति से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

बोतलबंद पानी: भारत में बोतलबंद पानी का बाजार 5 अरब डॉलर का है, लेकिन यहां भी लागत बढ़ गई है। गर्मियों से पहले पॉलीमर की कीमतें 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।

कांच के वैज्ञानिक उपकरण: हरियाणा के अंबाला में कांच के वैज्ञानिक उपकरण बनाने वाली 300 से अधिक इकाइयां एलपीजी की कमी के कारण संकट का सामना कर रही हैं।

टेक्सटाइल: पानीपत (हरियाणा) और सांगानेर (राजस्थान) की टेक्सटाइल इकाइयां एलपीजी की कमी के कारण बंद होने की कगार पर हैं।

विविध उद्योग: पानीपत, सोनीपत और करनाल में खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्युटिकल और कृषि उपकरण बनाने वाली बड़ी संख्या में इकाइयां एलपीजी की कमी के कारण बंद होने की स्थिति में हैं।

स्वास्थ्य

हीलियम सप्लाई चेन: युद्ध के कारण कतर एनर्जी को अपना रास लफान प्लांट बंद करना पड़ा है। इससे वैश्विक हीलियम आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बाजार से हट गया है। इससे भारत में एमआरआई स्कैन, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष अभियानों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा आ सकती है।

चिकित्सा उपकरण: इस क्षेत्र को पॉलीप्रोपाइलीन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह एक थर्मोप्लास्टिक पॉलीमर है, जिसका उपयोग सिरिंज, आईवी बैग, कैथेटर के पुर्जों, ब्लड बैग और सर्जिकल ड्रेप्स बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है। साथ ही, तेल की कीमतें बढ़ने से इंसुलिन सिरिंज, सैनिटाइजर, नाइट्राइल ग्लव्स और मलहम जैसे उत्पादों के दाम बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इनके निर्माण में पेट्रोलियम या उसके उप-उत्पादों की आवश्यकता होती है।

दवाएं: घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए पेट्रोकेमिकल्स के इस्तेमाल पर सरकारी फैसले ने दवाओं के उत्पादन के लिए जरूरी सप्लाई को बाधित कर दिया है। रिफाइनरी-ग्रेड प्रोपलीन की कमी से आइसोप्रोपिल अल्कोहल (आईपीए) बनाना मुश्किल हो गया है। इसके कारण महीने के अंत तक लगभग 200 निर्माता अपना उत्पादन बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं। बेंजीन की आपूर्ति रुकने से कई ‘एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स’ (एपीआई) का निर्माण प्रभावित हुआ है। इसमें बुखार की सामान्य दवा पैरासिटामोल भी शामिल है। मुख्य कच्चे माल की लागत में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण भारत में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

श्मशान घाट: पुणे नगर निगम ने एलपीजी की कमी के कारण 5 मार्च से अगले आदेश तक 22 गैस-आधारित श्मशान घाटों को बंद रखने का फैसला किया है।

हॉस्पिटैलिटी

रेस्टोरेंट: एलपीजी की कमी के कारण देश भर में रेस्टोरेंट का कामकाज और डिलीवरी ऑर्डर कम हो गए हैं। फूड ऑर्डर घटने से ‘गिग वर्कर्स’ (डिलीवरी पार्टनर्स) की कमाई पर असर पड़ा है।

पर्यटन: केरल का हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र राज्य की जीडीपी में करीब 10% का योगदान देता है। यहां अब बड़े पैमाने पर बुकिंग रद्द हो रही हैं। हैदराबाद का मेडिकल टूरिज्म क्षेत्र भी इस संकट से प्रभावित हुआ है।

सामुदायिक रसोइयां: एलपीजी संकट की वजह से हरिद्वार और ऋषिकेश के सामूहिक भोजनालय बंद होने पर मजबूर हो गए हैं।

निर्यात

केला: युद्ध ने मध्य प्रदेश के बड़वानी से होने वाले केले के निर्यात को बाधित कर दिया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र और पश्चिम एशिया को होने वाली शिपमेंट लगभग ठप हो गई है। केले की कीमतें 25 रुपये प्रति किलो से गिरकर 9 रुपये प्रति किलो पर आ गई हैं, जो उत्पादन लागत से भी कम है।

चावल: 37,500 टन बासमती चावल समुद्री बंदरगाहों और गोदामों में फंसा हुआ है। राजस्थान के बूंदी से भेजे गए इस चावल की कीमत 300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।

कॉफी: युद्ध की वजह से घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है। कर्नाटक के बागान मालिक कॉफी बीन्स बेचना चाहते हैं, लेकिन अधिकतर व्यापारी इस समय खरीदारी नहीं करना चाहते।

कपड़ा (टेक्सटाइल): युद्ध की वजह से राजस्थान के भीलवाड़ा से 800-1,000 करोड़ रुपये का कपड़ा निर्यात भी बाधित है, शिपमेंट में देरी हो रही है और विदेशी ऑर्डर होल्ड पर रख दिए गए हैं। इसका असर लुधियाना की औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ा है, जिससे इनपुट लागत बढ़ गई है और निर्यात बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।