शिक्षा और गरीबी उन्मूलन में निवेश बढ़ाए बिना बाल श्रम रोकना मुश्किल है, लाखों बच्चे अभी भी खतरे में हैं। प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
राजकाज

हर 10 में से एक बच्चा बाल श्रम का शिकार, 5 करोड़ से अधिक खतरनाक कामों में लगे हैं बच्चे

बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में दुनिया पीछे: वर्तमान गति से 2030 तक लगभग 12.5 करोड़ बच्चे बाल श्रम में रह सकते हैं, जिससे सतत विकास लक्ष्य समय पर पूरा करना कठिन होगा।

Dayanidhi

  • वर्तमान गति से दुनिया बाल श्रम खत्म करने में पीछे है, 2030 तक लगभग 12.5 करोड़ बच्चे प्रभावित रह सकते हैं।

  • बाल श्रम उन्मूलन लक्ष्य हासिल करने के लिए देशों को तेज नीतिगत कार्रवाई और मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली लागू करनी होगी।

  • शिक्षा और गरीबी उन्मूलन में निवेश बढ़ाए बिना बाल श्रम रोकना मुश्किल है, लाखों बच्चे अभी भी खतरे में हैं।

  • सतत विकास लक्ष्य 2030 की समय सीमा के बावजूद बाल श्रम में कमी की वर्तमान गति पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

  • प्रभावी कानून, निगरानी और सामाजिक सहायता के अभाव में बाल श्रम उन्मूलन का वैश्विक लक्ष्य गंभीर रूप से पीछे चल रहा है।

दुनिया भर में लगभग हर 10 में से एक बच्चा बाल श्रम का शिकार है। यह एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि बचपन खेलने, पढ़ने और सीखने का समय होता है, न कि काम करने का। कई बच्चों को मजबूरी में ऐसे काम करने पड़ते हैं जो उनकी उम्र और शारीरिक क्षमता से बहुत अधिक होते हैं।

इसलिए हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया के हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और अच्छा बचपन मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे को मजबूरी में काम करने के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए। यह दिवस बच्चों से काम कराने की समस्या को खत्म करने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने का अवसर है। इस अभियान का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) करती है।

बाल श्रम क्या है और क्यों चिंता का विषय है

बाल श्रम वह काम है जो बच्चे बहुत छोटी उम्र में करने के लिए मजबूर किए जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और विकास प्रभावित होता है। कई बच्चे खेतों, कारखानों, खदानों, दुकानों और घरों में काम करने को मजबूर होते हैं। यह स्थिति उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर डालती है।

आज भी दुनिया में करोड़ों बच्चे इस समस्या का शिकार हैं। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 13.8 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं, जिनमें से लगभग 5.4 करोड़ बच्चे खतरनाक काम करते हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

2026 की थीम और संदेश

इस साल की थीम “बाल श्रम को रेड कार्ड: बच्चों के लिए निष्पक्ष खेल, वयस्कों के लिए सम्मानजनक काम” है। इस थीम का मतलब है कि बच्चों को काम नहीं, बल्कि शिक्षा और खेल का अधिकार मिलना चाहिए।

हाल ही में मोरक्को के माराकेच में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन में देशों ने यह तय किया कि बाल श्रम खत्म करने के लिए तेज और ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस योजना को “माराकेच ग्लोबल फ्रेमवर्क” कहा गया है, जो देशों को बाल श्रम खत्म करने के लिए एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है।

दुनिया की स्थिति और प्रगति

पिछले दो दशकों में बाल श्रम के खिलाफ कुछ प्रगति हुई है। साल 2000 में लगभग 24.6 करोड़ बच्चे बाल श्रम में थे, जो अब घटकर 13.8 करोड़ रह गए हैं। लेकिन यह कमी अभी भी बहुत धीमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही गति रही, तो बाल श्रम को पूरी तरह खत्म करने में बहुत अधिक समय लगेगा।

अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्र में स्थिति सबसे गंभीर है। यहां लगभग 8.7 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हैं। आबादी बढ़ने, गरीबी और संघर्षों के कारण यह संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है। यहां बाल श्रम की दर छह प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत हो गई है। वहीं लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में भी कुछ कमी आई है, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

दुनिया अभी बाल श्रम को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में सही रास्ते पर नहीं है

हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस समस्या में कमी आई है, लेकिन यह कमी इतनी तेज नहीं है कि तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा हो सके। मौजूदा रफ्तार से अगर काम चलता रहा, तो 2030 तक भी स्थिति चिंताजनक बनी रहेगी। अनुमान के अनुसार, अगर तेजी से और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो साल 2030 में लगभग 12.5 करोड़ बच्चे अभी भी बाल श्रम में फंसे रह सकते हैं।

यह इसलिए गंभीर है क्योंकि 2030 को सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की अंतिम समय-सीमा माना गया है। इसका मतलब है कि अगर अब भी ठोस और तेज कार्रवाई नहीं की गई, तो दुनिया एक अहम लक्ष्य से पीछे रह जाएगी।

इस स्थिति से साफ है कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करना भी जरूरी है। बच्चों को बाल श्रम से बचाने के लिए शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और सख्त कानून प्रवर्तन जैसे कदमों को और मजबूत करना होगा।

बच्चे कहां काम करते हैं

बाल श्रम का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में है, जहां लगभग 61 प्रतिशत बच्चे काम करते हैं। इसके बाद सेवा क्षेत्र आता है, जैसे घरेलू काम या बाजार में सामान बेचना, जिसमें लगभग 27 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं। उद्योग क्षेत्र, जैसे खदान और कारखाने, में भी लगभग 13 प्रतिशत बच्चे काम कर रहे हैं। यह दिखाता है कि समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जगह फैली हुई है।

समाधान के लिए जरूरी कदम

यूनिसेफ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने सरकारों से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की अपील की है। सबसे पहले, गरीब परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बढ़ाई जानी चाहिए ताकि उन्हें बच्चों से काम न करवाना पड़े। इसके साथ ही हर बच्चे को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है, खासकर ग्रामीण और संकटग्रस्त क्षेत्रों में।

बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून और निगरानी व्यवस्था जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार का शोषण रोका जा सके। वयस्कों और युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिले ताकि परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। इसके अलावा, कंपनियों को भी जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए ताकि सप्लाई चेन में किसी भी स्तर पर बाल श्रम न हो।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों का बचपन सुरक्षित और खुशहाल होना चाहिए। बाल श्रम केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यदि सरकारें, समाज और अंतरराष्ट्रीय संगठन मिलकर तेजी से काम करें, तो आने वाले वर्षों में हर बच्चे को स्कूल में देखने का सपना सच किया जा सकता है।