केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 6 (एनएफएचएस) में भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2019-20 में हुए एनएफएचएस 5 के बराबर ही है लेकिन कई राज्यों में इसमें बड़ी गिरावट देखी गई है। टीएफआर का 2.1 से नीचे आना जनसंख्या में गिरावट को प्रदर्शित करता है। 2.1 टीएफआर को रिप्लेसमेंट रेट कहा जाता है।
हालांकि भारत का टीएफआर इससे कम है लेकिन अंडमान एवं निकोबार ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जिसका टीएफआर 1 से नीचे पहुंच गया है। यह देश का सबसे न्यूनतम टीएफआर है।
एनएफएचएस 6 के आंकड़ों के अनुसार, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में टीएफआर 0.9 है जो पिछले एनएफएचएस 5 के मुकाबले 0.4 अंकों की गिरावट है। 2015-16 के एनएफएचएस 4 में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का टीएफआर 1.4 था। इस केंद्र शासित प्रदेश में टीएफआर का लगातार कम होना जनसंख्या में बड़ी गिरावट का संकेत है।
प्रजनन दर में गिरावट का नतीजा यह है कि 5 और 15 साल तक की आबादी में गिरावट हो रही है। एनएफएचएस 5 में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी 5.3 प्रतिशत थी जो एनएफएचएस 6 में गिरकर 3.7 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह 15 साल से कम आयु के बच्चों की आबादी भी 20.8 प्रतिशत से गिरकर 17.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों की आबादी 11 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई है। इसका साफ अर्थ है कि कुल आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है जबकि बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज हो रही है। यानी लोगों की बच्चों को पैदा करने में दिलचस्पी में भारी कमी आई है।
बच्चों की संख्या घटने से प्री स्कूल जाने वाले 2-4 साल के बच्चों के प्रतिशत में भी बड़ी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, एनएचएफएस 5 में इस उम्र के 88.5 प्रतिशत बच्चों के मुकाबले एनएचएफएस 6 में 66.2 प्रतिशत बच्चों ने ही प्री स्कूल का मुंह देखा है। दूसरे शब्दों में कहें तो करीब 26 प्रतिशत कम बच्चे प्री स्कूल गए हैं।
अंडमान एवं निकोबार में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) में निदेशक डॉक्टर एचएम सिद्दाराजू गिरते टीएफआर के कई कारण गिनाते हैं। उन्होंने डाउन टू अर्थ को बताया कि बहुत से दंपत्ति छोटा परिवार चाहते हैं और वे एक बच्चे से संतुष्ट हैं। साथ ही उनका कहना है परिवार नियोजन के आधुनिक उपायों तक पहुंच आसान हुई है। इसके अलावा सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ महिलाओं की उच्च साक्षरता दर भी इसमें कमी की एक वजह है।
अंडमान और निकोबार में आदिवासियों के बीच लंबे समय तक काम कर चुकीं भाषविद अन्विता अब्बी कहती हैं कि अंडमान एवं निकोबार मध्यम वर्गीय समाज है। यहां सभी लोग शिक्षित हैं और बेरोजगारी कम है। उनका कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता और शिक्षा जैसे कारक घटती प्रजनन दर का कारण हो सकते हैं