मध्य प्रदेश में चुटका परमाणु परियोजना 1400 मेगावाट क्षमता की है, 21000 करोड़ लागत से विकसित की जा रही है।
ऑनशोर पवन ऊर्जा पर सब्सिडी नहीं, लेकिन ऑफशोर परियोजनाओं हेतु 7453 करोड़ की वीजीएफ योजना शुरू की।
2050 तक 41 प्रतिशत वैश्विक आबादी अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होगी, मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है।
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रति केजी लगभग 10 लीटर पानी चाहिए, 5 एमएमटी लक्ष्य हेतु हर साल 50 एमसीएम की जरूरत।
महाराष्ट्र में वन अधिकार कानून के तहत 14726 दावे लंबित हैं। सरकार रेबीज नियंत्रण और किसानों हेतु बीज वितरण पर काम कर रही है।
चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना (मध्य प्रदेश)
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण लगातार जारी है। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही है। इसी को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि यह परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र का विकास होगा।
इस परियोजना की क्षमता 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की है। इस परियोजना को सरकार ने लगभग 21,000 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इसमें 70:30 का ऋण और इक्विटी अनुपात रखा गया है, जिसमें सरकार द्वारा इक्विटी का हिस्सा दिया जाएगा।
इस परियोजना को न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा लागू किया जा रहा है। परियोजना के लिए कुल 708.19 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। इसमें से 640.49 हेक्टेयर भूमि प्लांट के लिए और 67.70 हेक्टेयर भूमि टाउनशिप के लिए है। इस भूमि में निजी, सरकारी, एनवीडीए और वन भूमि शामिल है। सिंह ने बताया कि परियोजना का कार्य आगे बढ़ रहा है और इससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
पवन ऊर्जा उत्पादन
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा बिजली मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने लोकसभा में बताया कि भारत में पवन ऊर्जा एक महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। वर्तमान में सरकार ऑनशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कोई सीधी वित्तीय सब्सिडी नहीं दे रही है। ये परियोजनाएं निजी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा तकनीकी और आर्थिक आधार पर स्थापित की जा रही हैं।
हालांकि सरकार ने ऑफशोर पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इस योजना का नाम वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) है। इस योजना के तहत कुल 7,453 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से 6,853 करोड़ रुपये 1 गीगावाट ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए हैं, जो गुजरात और तमिलनाडु के तट पर स्थापित होंगी।
नाइक ने कहा कि इसके अलावा 600 करोड़ रुपये दो बंदरगाहों के विकास के लिए दिए जाएंगे ताकि इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था हो सके। यह योजना भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी।
तापमान में वृद्धि
सदन में उठे एक ओर प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि दुनिया भर में तापमान लगातार बढ़ रहा है और यह एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। उन्होंने आगे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि साल 2010 के आसपास दुनिया की लगभग 23 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गर्मी की स्थिति में रह रही थी।
यह संख्या साल 2050 तक बढ़कर लगभग 41 प्रतिशत हो सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 3.79 अरब लोग अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होंगे। यह समस्या विशेष रूप से दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में ज्यादा देखने को मिलेगी। इसका मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना और ग्लोबल वार्मिंग है। यदि तापमान 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
देश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए पानी की जरूरत
ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर सदन में उठाए गए एक और प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा बिजली मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने लोकसभा में बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है। इसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से तैयार किया जाता है। एक किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए लगभग 10 लीटर डिमिनरलाइज्ड पानी की जरूरत पड़ती है।
भारत सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगभग 50 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन से प्रदूषण कम होगा और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी।
महाराष्ट्र में आदिवासी विरोध प्रदर्शन
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, जनजातीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में आदिवासी समुदाय द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण वन अधिकार कानून, 2006 के तहत भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दे हैं।
आदिवासियों का कहना है कि उनके दावों को सही तरीके से स्वीकार नहीं किया जा रहा है और भूमि के क्षेत्र को लेकर भी विवाद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक महाराष्ट्र में कुल 14,726 व्यक्तिगत वन अधिकार मामले लंबित हैं। इसमें 6,158 दावे और 8,568 अपीलें शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार इन मामलों को हल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
आवारा कुत्तों की समस्या
भारत में आवारा कुत्तों की समस्या एक बड़ी चुनौती है। इससे लोगों में डर और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं, खासकर रेबीज जैसी बीमारी का खतरा रहता है। इसी विषय को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य रेबीज को नियंत्रित करना और लोगों को सुरक्षित रखना है।
इसके अलावा “नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मेडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन 2030” भी शुरू किया गया है। इस योजना को स्वास्थ्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने मिलकर 28 सितंबर 2021 को शुरू किया था। ललन सिंह ने कहा कि रेबीज को खत्म करने के लिए सभी विभागों का मिलकर काम करना जरूरी है।
बीज वितरण (बीबीएसएसएल)
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बताया कि किसानों की मदद के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) काम कर रही है। इस संस्था ने अब तक 8 फसलों में 78 किस्मों के बीज विकसित किए हैं। इनमें गेहूं, धान, दालें और चारा फसलें शामिल हैं।
बीबीएसएसएल बीजों का वितरण कई माध्यमों से कर रही है। इसमें लगभग 37,000 सहकारी समितियां और 480 पंजीकृत डीलर शामिल हैं। इसके अलावा संस्था सीधे किसानों तक भी पहुंच रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 3,24,090 क्विंटल बीज वितरित किए गए हैं। शाह ने कहा कि इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज मिल रहे हैं और कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है।